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कंपोजिट ग्रांट से बदली बेसिक के स्कूलों की तस्वीर

कंपोजिट ग्रांट से बदली बेसिक के स्कूलों की तस्वीर

शासन की एक बेहतरीन पहल से बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों की तस्वीर बदल गई है। वर्षों से बदहाल इन स्कूलों की तस्वीर बदली है इस बार मिले कंपोजिट ग्रांट से। इस ग्रांट की पहली किश्त में जिले को 70 प्रतिशत धनराशि उपलब्ध हुई थी। अब शेष 30 प्रतिशत धनराशि भी उपलब्ध हो गई है।

इस तरह जिले में बेसिक शिक्षा परिषद के 1802 स्कूलों के लिए शासन से कुल छह करोड़ 60 लाख रुपया उपलब्ध हो चुका है। इससे बेसिक स्कूलों का कायाकल्प भी साफ नजर आ रहा है।बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों के रखरखाव के लिए बीते वर्षों तक मात्र पांच हजार रुपया प्रति स्कूल की दर से धनराशि उपलब्ध होती थी। इस राशि से स्कूलों का रंग रोगन आदि कराना होता था।

विभाग से यह राशि स्कूलों के खातों में भेजी जाती थी, पर इससे कभी भी स्कूलों का भला नहीं हुआ। हर साल रुपया मिलने के बाद भी वर्षों तक स्कूलों का रंग रोगन तक नहीं होता था। इस स्कूल भवन बदहाल नजर आते थे। स्कूल और विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते इस राशि के बंदरबांट होने के आरोप लगते रहते थे। स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए इस बार शासन ने कई मदों को मिलाकर कंपोजिट ग्रांट का फार्मूला अपनाया। यह ग्रांट सीधे स्कूलों के खातों में भेजने के साथ ही इसका मद वार उपभोग सुनिश्चित करने की भी व्यवस्था की गई।

इस राशि के उपभोग की निगरानी के लिए जिला स्तर से लेकर शासन स्तर तक कमेटी भी गठित कर दी गई। स्कूल के प्रधानाध्यापक को इस राशि के खर्च का पाई-पाई का हिसाब रखना अनिवार्य किया गया है। इसके लिए उन्हें मदवार खर्च का रजिस्टर तैयार करना है। खर्च का हिसाब समय से जांच कमेटी को उपलब्ध भी कराना है। कंपोजिट ग्रांट के खर्च में इतनी सख्ती होने के चलते ही इसका उपभोग हो सका है। विभाग को तीन महीने पहले इस ग्रांट की पहली किश्त में चार करोड़ 60 लाख की धनराशि मिली थी। विभाग ने इसको छात्र संख्या के आधार पर स्कूल प्रबंध समिति के खातों में ट्रांसफर कर दिया था। रुपया मिलने पर प्रधानाध्यापकों ने इसको खर्च करने में भी पूरी सावधानी बरती। उन्होंने इस राशि से स्कूलों का रंग रंगोन कराया और जिस मद से जो खरीदारी करनी वह खरीदी। कूछ स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने इस राशि से अपने स्कूलों की तस्वीर ही बदल डाली है। उन्होंने अपने स्कूलों में घरों की तरह बेहतर क्वालिटी का पेंट कराया है। स्कूलों में जरूरत का जो भी सामान खरीदा है वह भी बेहतर क्वालिटी का खरीदा गया है। ऐसे प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों ने अपने स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता भी सुधारी है। इससे इनके स्कूलों में जहां छात्र संख्या में इजाफा हुआ वहीं बच्चों की उपस्थिति भी बेहतर हुई है। ऐसे स्कूल अब विभाग की शान बने हुए हैं।

छात्र संख्या के आधार पर मिला 25 से 50 हजार तक

कंपोजिट ग्रांट स्कूलों को छात्र संख्या के आधार पर आवंटित हुई। इसमें एक से 25 तक छात्र संख्या वाले स्कूलों को 12 हजार, 26 से 100 छात्र संख्या वाले स्कूलों को 25 हजार, 101 से 250 छात्र संख्या वाले स्कूलों को 50 हजार और 250 से अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों को 75 हजार रुपया आवंटित करना था। जिले में अधिकांश स्कूलों को 25 हजार से 50 हजार रुपया तक कंपोजिट ग्रांट मिली।

ग्रांट का 10 प्रतिशत खर्च करना था स्वच्छता में

स्कूलों को आंवटित हुई कंपोजिट ग्रांट में से 10 प्रतिशत स्वच्छता में खर्च करना अनिवार्य है। इसके अलावा इस ग्रांट में मिली धनराशि को स्कूलों के रंग रोगन, बिजली उपकरण खरीदने, बागनवानी किट खरीदने, अग्निशमन यंत्र, फस्र्ट एड बाक्स, स्मार्ट क्लास के लिए उपकरण खरीदने के साथ ही टीचर रिसोर्स लैब से जुड़े कार्य करने में खर्च करना है। इस राशि से स्कूलों में रेडियो कार्यक्रम सुनाने के लिए बैटरी, रेडियो भी खरीदे गए।

बच्चों के लिए माइक, वाद्य यंत्र आदि भी इस राशि से खरीदे गए हैं। कंपोजिट ग्रांट के लिए नोडल बनाए गए विभाग के जिला समन्वयक निर्माण पंकज शाक्य ने बताया कि स्कूलों ने अपने हिस्से की 85 फीसदी धनराशि का उपयोग कर लिया है। शासन से इस ग्रांट की शेष 30 फीसदी राशि में एक करोड़ 98 लाख रुपया भी उपलब्ध हो गया है। यह राशि स्कूलों के खातों में ट्रांसफर हो रही है। इसके बाद जिला स्तर से लेकर शासन स्तर स्तर की कमेटी से इसका सत्यापन होगा।

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  • Web Title:Pictures of basic schools replaced with composite grant