Officers rushed to Go-Conservation Center on DM s rebuke - डीएम की फटकार पर गो-संरक्षण केंद्र की ओर दौड़े अधिकारी DA Image

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डीएम की फटकार पर गो-संरक्षण केंद्र की ओर दौड़े अधिकारी

डीएम की फटकार पर गो-संरक्षण केंद्र की ओर दौड़े अधिकारी

गो-संरक्षण केंद्र पर फैली अव्यवस्थाओं व दम तोड़ रही गायों को लेकर डीएम ने ईओ की कड़ी फटकार लगाई। गोवंशीयों की सही ढंग से देखभाल किए जाने, व्यवस्थाएं दुरुस्त किए जाने के निर्देश दिए हैं। पूरे दिन पालिका अधिकारी गो-संरक्षण केंद्र पर व्यवस्थाओं के सुधार में जुटे रहे।

पशु चिकित्सा विभाग से आए डाक्टरों ने बीमार गोवंशीयों का इलाज किया।बीसलपुर में नगर पालिका के द्वारा कासिमपुर मार्ग पर एक खाली पड़ी जगह पर गो-संरक्षण केंद्र बनाया गया। दशकों से यह इलाका जलभराव से घिरा रहता है। गो-संरक्षण केंद्र पर 69 गाय एवं बछड़ा हैं। घायल व बीमारी की अवस्था में गोवंशीय अंतिम सांस लेते दिखाई दे रहे हैं। पालिका ने दस कर्मचारियों को गोवंशीयों की देखरेख के लिए लगाया है, लेकिन गोसंरक्षण केंद्र केवल दिखावे के लिए चल रहा है। गोसरंक्षण केंद्र पर गोवंशीयों के लिए न तो सही से चारा मिल पा रहा है और न ही उनकी देखभाल हो रही है। जिसके कारण गोवंशीय की मौते होती जा रही है। गोसंरक्षण केंद्र पर बरसात होते ही जलभराव हो जाता है। पालिका प्रशासन ने ईट का रोड़ा डलवा दिया, लेकिन गोवंशीयों के लिए खाने व सही से रखने की कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है। बीमार व घायल गोवंशीयों का समय से उपचार भी नहीं किया जा रहा है। पिछले दिनो विधायक रामसरन वर्मा व तहसीलदार ने गो-संरक्षण केंद्र का निरीक्षण किया था। खबर को हिंदुस्तान ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। डीएम वैभव श्रीवास्तव ने ईओ वंदना शर्मा की न सिर्फ कड़ी फटकार लगाई। बल्कि गो-संरक्षण केंद्र पर जाकर तत्काल फोटोग्राफ व वीडियो बनाकर भेजे जाने के निर्देश दिए।

डीएम की फटकार के बाद पालिका के अधिकारियों के कान खड़े हो गए। पूरे दिन गोसंरक्षण केंद्र पर व्यवस्थाओं के सुधार में लगे रहे। वहीं आनन फानन में पहुंचे पशु पालन विभाग के डाक्टरों ने बीमार पशुओं का इलाज किया। गोसंरक्षण केंद्र की बेहतर साफ सफाई कराई गई।तीस रुपये में कैसे भर सकता है एक गोवंशीय का पेटप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने शहर से लेकर गांव तक गोसंरक्षण केंद्र बनाए जाने के निर्देश तो दिए हैं, लेकिन सबसे अहम बात यह है कि एक गाय के लिए मात्र 30 रुपये प्रतिदिन की व्यवस्था की गई है। 30 रुपये में गाय का पेट कैसे भरा जा सकता है। पूरे दिन में कोई व्यक्ति भी अपना पेट नहीं भर सकता। तीस रुपये में गोवंशीयों को चारा खिलाकर पेट भरना मुश्किल कार्य है। सरकार को इस दिशा में ध्यान देने की जरूरत है।पालतू पशुओं को भी गो-संरक्षण केंद्र पर छोड़ा गयागो-संरक्षण केंद्रों पर नियमानुसार आवारा गोवंशीयों को ही रखने का प्राविधान है, लेकिन गोसंरक्षण केंद्र पर तमाम ऐसे गोवंशीए छोड़ दिए जाते हैं जो लोग पालते हैं। गोवंशीयों के मरणासन हालत में होने पर उन्हें गो-संरक्षण केंद्र पर छोड़ दिया जाता। यही कारण है कि गोवंशीयों की गो-संरक्षण केंद्र पर मौते हो जाती है।

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