Murder of Tiger in pilibhit - पास में थी वन चौकी, फिर भी बाघिन को बचाने समय से नहीं पहुंचे वन कर्मचारी DA Image
7 दिसंबर, 2019|3:41|IST

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पास में थी वन चौकी, फिर भी बाघिन को बचाने समय से नहीं पहुंचे वन कर्मचारी

मटेहना में हुई घटना की हर तरह से जांच पड़ताल के बाद अधिकारियों ने बाघिन की जिस तरह से हत्या की गई उसे जघन्य अपराध माना है साथ ही पहली बार इस तरह की घटना होना करार दिया है। जांच के बाद यदि वन विभाग की रिपोर्ट पर गौर किया जाए तो ग्रामीणों ने बाघिन को उसी के घर में घेरकर बुरी तरह से पीटा था। अधिकारियों का दावा है कि बाघिन उस क्षेत्र में पहले से देखी जा रही थी और निगरानी के साथ ग्रामीणों को अगाह भी किया गया था। ग्रामीण खुद जंगल में बाघिन के सामने गया था। 

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पोस्टमार्टम होने के  बाद प्रधान मुख्य संरक्षक सुनील कुमार ने एफडी से पूरी जानकारी जुटाई थी। जानकारी में पाया गया था कि जिस क्षेत्र में बाघिन ने ग्रामीणों पर हमला किया था वह जंगल क्षेत्र था और वहां पर बाघिन रहती थी। वहां पर गुड्डू नाम का व्यक्ति खुद गया था। बाघिन ने उसे देखकर खुद को असुरक्षित मानकर हमला कर दिया था। अधिकारियों का दावा है कि बाघिन को उसके ही क्षेत्र में जाकर ग्रामीणों ने घेरा और मारते मारते बेदम कर दिया था। गंभीर चोट आने से ही उसकी मौत हुई है। यह काफी जघन्न अपराध की श्रेणी मे आता है। घटना की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए सभी को सचेत कर दिया गया। यहां यह बात भी दीगर है कि आखिर जब बाघिन ने ग्रामीणों पर हमला बोला तो कर्मचारी कहां थे जबकि निगरानी के लिए टीम बनाई गई थी। घटना स्थल पर मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर वन चौकी होने के बाद भी कर्मचारी काफी देर तक पहुंच सके थे।

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चल्तुआ की घटना से भी नहीं लिया अधिकारियों ने सबक

जिस तरह से मटेहना में गांव वालों ने बाघिन को घेर कर मौत के घाट उतारा है उसी तरह से सेहरामऊ क्षेत्र के गांव चल्तुआ में भी घटना हुई थी। यहां भी एक बीमार बाघिन गांव के पास देखी जा रही थी। निगरानी के लिए टीम बनाई गई और हाथी से कांबिंग भी हो रही थी। इतना सब होने के बाद भी अधिकारी बाघिन को सुरक्षा नहीं दे सके थे। बाघिन ने जब पांच नवंबर को गांव के एक व्यक्ति पर हमला किया तो ग्रामीणों ने वन कर्मियों के सामने ही बाघिन को लाठी से पीटकर मौत की नींद सुला दिया था। इस घटना में भी ग्रामीणों पर मुकदमा दर्ज हुआ था। घटना के बाद पुलिस ने तो अपना काम शुरू कर दिया, लेकिन वन विभाग का रवैया वैसा ही बना रहा। यदि अधिकारियों ने चल्तुआ की घटना से सबक थोडा भी लिया होता तो यहां मटेहना में इसकी पुनरावृत्ति न होती। यदि इसी तरह से कर्मचारियों की लापरवाही होती रही तो संघर्ष की घटनाओं पर रोक लग पाना संभव नहीं है।
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बाघिन को जंगल क्षेत्र में ही घेरकर पीटकर मारा गया था। बाघिन खेत पर नहीं गई थी। उस क्षेत्र में 17 जुलाई को बछड़े का शिकार किया गया था और इसके बाद कर्मचारियों को लगा दिया गया था। ग्रामीण खुद बाघिन के पास गया था।
डा. एच राजा मोहन, फील्ड डायरेक्टर
पीलीभीत टाइगर रिजर्व  

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