मिलावटी दूध पर एक साल कैद, जुर्माना
पीलीभीत में एक दूध विक्रेता त्रिलोचन सिंह को दूध में मिलावट करने के लिए एक साल की सजा और पांच हजार रुपए जुर्माना सुनाया गया। खाद्य निरीक्षक ने 2009 में दूध का नमूना लिया था, जिसमें अधोमानक पाया गया। विक्रेता ने खुद को निर्दोष बताते हुए न्यायालय में अपील की, लेकिन सजा सुनाई गई।

पीलीभीत। दूध का नमूना जांच में फेल होने के 17 साल बाद मिलावट करने वाले दूधिए को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुंदर पाल ने पांच हजार रुपए जुर्माना सहित एक साल की सजा सुनाई। अभियोजन के मुताबिक खाद्य निरीक्षक विजेंद्र कुमार 18 अप्रैल 2009 को चेकिंग के दौरान अमरिया के भैंसाह निवासी त्रिलोचन सिंह को साइकिल पर करीब 30 लीटर दूध विक्रय के लिए ले जाते हुए देखा। पूछने पर उसने यह दूध गाय और भैंस का मिश्रित बताया। संदेह होने पर खाद्य निरीक्षक ने 30 रुपए भुगतान देकर डेढ़ लीटर दूध खरीदकर परीक्षण के लिए भेजा। रिपोर्ट में अधोमानक पाया गया।
विक्रेता त्रिलोचन सिंह के विरुद्ध राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2009 में खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की गई। मामले की सुनवाई अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुंदर पाल ने की। न्यायालय में खाद्य निरीक्षक विजेंद्र कुमार ने अपने शपथ पूर्वक बयान दर्ज कराए और सभी अभिलेखों को साबित किया। दूध विक्रेता त्रिलोचन सिंह ने न्यायालय में स्वयं को निर्दोष बताया। कहा कि खाद्य निरीक्षक से उसकी कहासुनी हो गई थी। इसलिए उसे झूठा फसाया गया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुंदर पाल ने आरोपी को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
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