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3 अगस्त, 2020|6:50|IST

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संस्मरण 1992 : कांग्रेस का पद भी गंवा दिया राम मंदिर के लिए

संस्मरण 1992 : कांग्रेस का पद भी गंवा दिया राम मंदिर के लिए

1 / 2जिनका नाम ही हरिओम हो, वह कैसे श्रीराम के अनुराग के बंधन को तोड़कर किसी राजनीतिक दल की विचारधारा के बंधन में बंधा रह सकता है। यह बात ही 90 के दशक में सिद्ध करके दिखाई थी तत्कालीन कांग्रेस सेवादल के...

संस्मरण 1992 : कांग्रेस का पद भी गंवा दिया राम मंदिर के लिए

2 / 2जिनका नाम ही हरिओम हो, वह कैसे श्रीराम के अनुराग के बंधन को तोड़कर किसी राजनीतिक दल की विचारधारा के बंधन में बंधा रह सकता है। यह बात ही 90 के दशक में सिद्ध करके दिखाई थी तत्कालीन कांग्रेस सेवादल के...

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जिनका नाम ही हरिओम हो, वह कैसे श्रीराम के अनुराग के बंधन को तोड़कर किसी राजनीतिक दल की विचारधारा के बंधन में बंधा रह सकता है। यह बात ही 90 के दशक में सिद्ध करके दिखाई थी तत्कालीन कांग्रेस सेवादल के जिला संयोजक हरिओम वाजपेई ने। उन्होंने पार्टी के पद की परवाह न करते हुए खुलकर श्रीराम मंदिर आंदोलन में प्रतिभाग किया। भले ही उन्हें पार्टी का पद गंवाना पड़ा। वे कहते हैं-श्रीराम हमारे धार्मिक महत्व से जुड़े हैं। मेरा कांग्रेस में होना अलग बात थी और राम मंदिर का मामला अलग। मैंने श्रीराम को ही सर्वोपरि रखा। आज उनका मन हर्षित हो रहा है।

डोरीलाल फाटक के नजदीक रहने वाले हरिओम वाजपेई कांग्रेस सेवादल के जिलाध्यक्ष हुआ करते थे। तब राम जन्मभूमि आंदोलन ने उनके मन मस्तिष्क पर कुछ ऐसा प्रभाव डाला कि वे आंदोलन से जुड़ गए। तब उन्होंने सुबह चार बजे से आठ बजे तक प्रभातफेरी निकालने का बीड़ा उठा लिया। इसमें लोगों की जुटान ऐसी होने लगी कि कारवां बनता गया। तत्कालीन डीएम से कुछ कहासुनी भी हो गई।

रामजन्मभूमि से जुड़े इस अहम मोड़ में अपने सेवा दल के जिला संयोजक का नाम आने पर कांग्रेस असहज हो उठी थी। हरिओम वाजपेई को तत्काल पद से हटा दिया गया। उनकी श्रीराम के प्रति अगाध श्रद्धा बनी रही। इसके बाद बजरंग दल ने उन्हें जिला प्रभारी बनाया। पर मन कांग्रेसी होने के चलते वे ज्यादा दिनों तक नहीं टिके और कांग्रेस में वापसी कर ली। उन्हें युवक कांग्रेस में स्टेट जनरल सेक्रेटरी बनाया गया। बाद में उन्होंने इस पद को भी छोड़ दिया और पुन: कांग्रेस सेवा दल के जिला संयोजक बने। हरिओम बताते हैं कि श्रीराम धुन हमारे धार्मिक महत्व से जुड़ा है। मेरा कांग्रेस में होना अलग बात थी। तब पूर्व विधायक बीके गुप्ता, मुन्नू प्रधान, रामचंद्र वर्मा, किशनलाल, पूर्व सांसद डॉ.परशुराम, विधायक रामसरन वर्मा आदि का सानिध्य भी खूब प्राप्त रहा। तब हमने 375 घरों में रामायण वितरित कीं थीं। इसके बाद 108 रामायण पाठ व प्रभात फेरी का आयोजन किया, हजारों लोग जुटते थे। आज वो पल आ रहे हैं तो मन हर्षित हो रहा है।

एसओ की पत्नी से ले आए थे धनराशि

हरिओम वाजपेई ने अयोध्या से आई राम ज्योति को भी शहर में घुमाया था। तब हर कोई शख्स राम ज्योति का दर्शन कर कुछ चढावा अर्पित करता था। इस दौरान सुनगढ़ी एसओ रहे राजेश शर्मा की पत्नी से भी हरिओम वाजपेई सौ रुपये की धनराशि राम ज्योति के लिए लेकर आए थे। यह काफी चर्चा में रहा था।

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  • Web Title:Memoir 1992 Congress also lost office for Ram temple