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होली के दिन जब होती है माधोटांडा में महिलाओं की सत्ता

होली के दिन जब होती है माधोटांडा में महिलाओं की सत्ता

पीलीभीत। होली की परंपराओं का महत्व जानना है तो गांव चलिए यहां विविधता के लिए संस्कृति अपने ही रंग में मस्त है। जहां देश में ब्रज बरसाने और अवध आदि की होली पूरी दुनिया में मशहूर है तो वहीं बरेली मंडल में पीलीभीत जिले के माधोटांडा की होली भी अपने आप में कुछ अलग है। माधोटांडा में महिलाओं की पिचकारी के डर से कस्बे के पुरुष दुबककर भाग जाते हैं कि कहीं महिलाओं के हत्थे न चढ़ जाए। अगर घेरे में आ गए तो उनका बुरा हश्र हो जाएगा। होली मनाने की यह अनूठी परंपरा आज भी बरकरार हैं

हर शहर की होली मनाने की परंपरा अलग-अलग है। रजवाड़े के गांव माधोटांडा में होली का पर्व बड़े ही अनोखे तरीके से मनाया जाता है। यहां दो दिन होली पर जमकर रंग की बौछार होती है। एक दिन यहां महिलाओं की पूर्ण सत्तात्मक सत्ता काबिज होती है। इस दिन यदि कोई पुरुष धोखे से भी इनकी सत्ता में दखलअंदाजी करता है तो उनकी शामत आ जाती है।

माधोटांडा में दो दिन होली खेले जाने की परंपरा बहुत प्राचीन परंपरा है। पहले दिन कस्बा में पुरुषों की टोलियां घर-घर जाकर होली खेलती हैं। दूसरे दिन कस्बा की महिलाएं ठाकुरद्वारा मंदिर माधव मुकंद महाराज मंदिर में एकत्र होकर रंग खेलने की शुरुआत करती हैं। उसके बाद घर-घर जाकर महिलाओं की टोलियां लोगों को रंगों में सराबोर कर देती हैं। अगर इस दिन कोई भी पुरुष धोखे से महिलाओं के हत्थे जाता है तो उसका बुरा हश्र हो जाता है। दूसरे दिन कस्बे के अधिकांश पुरुष गांव छोड़कर अन्य स्थानों पर चले जाते हैं। दो दिन होली की शुरुआत के पीछे कस्बा के बुजुर्गों का कहना है कि माधोटांडा रजवाड़े के शाही परिवारों के पुरुष पहले दिन आपस में होली खेलते थे और दूसरे दिन अपने लाव लश्कर के साथ जंगल में शिकार को रवाना हो जाते थे। पूरा गांव महिलाओं के लिए छोड़ दिया जाता था जिससे महिला जी भर कर होली खेल सके। आज भी हम लोग बुजुर्गों की बनाई इस परंपरा का पालन कर रहे हैं।

होली की कई दशकों पुरानी परंपरा आज भी रजवाड़ा माधोटांडा में मनाई जाती है। हालांकि थोड़ा परिवर्तन जरूर हुआ है अब उतना अधिक तो नहीं होता है किंतु महिलाएं अगले दिन मंदिर में एकत्र होकर होली अवश्य खेलती हैं।

श्रुति सिंह-

एक समय था जब महिलाएं जमकर कस्बा में होली खेलती थी और जो भी आज के दिन महिलाओं के हत्थे चढ़ जाता था तो उनका बुरा हश्र हो जाता था हम लोगों ने तो अपने जमाने में अंग्रेज़ अफसरों को भी रंग से सराबोर कर दिया था।

नरैनी देवी

माधोटांडा रजवाड़े के राज परिवारों से कस्बा में दो दिन होली खेले जाने की परंपरा बहुत ही पुरानी है। आज भी हम बुजुर्ग लोग इसे मना रहे हैं। अपनी पीढ़ी को भी इस परंपरा को मनाते रहे इसके लिए प्रेरित करते रहेंगे।

सोना सिंह

होली की कई दशकों पुरानी परंपरा आज भी रजवाड़ा माधोटांडा में मनाई जाती है हालाकि थोड़ा परिवर्तन जरूर हुआ है अब उतना अधिक तो नहीं होता है किंतु महिलाएं अगले दिन मंदिर में एकत्र होकर होली अवश्य खेलती हैं

रामवती कश्यप

हम लोग को होली की ऐसी अनूठी परंपरा मनाना अपने पूर्वजों से प्राप्त हुआ है जिस किसी ने भी इस परंपरा का शुरुआत किया उसने अवश्य कुछ ना कुछ सोचकर इस अनूठी परंपरा में महिलाओं को एक दिन तो जरूर आजादी का हक दिया और हम इस आजादी को इस परंपरा के द्वारा जरूर बरकरार रखेंगे।

रीताक्षी सिंह

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  • Web Title:IN Holi the power of women in Madhotanda