Hello Aunty Mamta is speaking please send Neha to school - हैलो आन्टी, ममता बोल रही हूं प्लीज नेहा को स्कूल भेजिए DA Image
15 दिसंबर, 2019|6:42|IST

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हैलो आन्टी, ममता बोल रही हूं प्लीज नेहा को स्कूल भेजिए

हैलो आन्टी, ममता बोल रही हूं प्लीज नेहा को स्कूल भेजिए

हैलो आन्टी नमस्ते, ममता बोल रही हूं। आज नेहा स्कूल नहीं आई है। उसको भेजिए, नया अध्याय शुरू होने वाला है। नहीं तो वह एक पाठ से पीछे हो जाएगी। बच्चों की रोजाना छात्र संख्या बढ़ाने के लिए पूरनपुर के एक परिषदीय स्कूल के शिक्षक ने यह नया तरीका अपनाया है। स्कूल न आने वाले बच्चों को बुलाने के लिए उनको फोन कराते हैं। शिक्षक की इस नई पहल की ग्रामीण और अन्य शिक्षक सराहना कर रहे हैं।

थोड़ी सी मेहनत और मदद से स्कूल में शिक्षा गुणवत्ता मजबूत करने के साथ व्यवस्थाएं कैसे दुररूत की जाती हैं। इसका जीता जागता उदाहरण पूरनपुर के गांव अभयपुर माधौपुर के परिषदीय उच्च प्राथमिक स्कूल में देखने को मिला। वैसे तो बीआरसी क्षेत्र में 325 प्राथमिक और 142 उच्च प्राथमिक स्कूल संचालित हैं। इनमें कई स्कूलों के शिक्षक जिम्मेदारी निभाते हुए बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता भी मजबूत कर रहे हैं लेकिन घुंघचाई संकुल के अभयपुर माधौपुर स्थित परिषदीय स्कूल में तैनात शिक्षक वीरेंद्र प्रताप सिंह नए नए तरीकों से शिक्षण कार्य करा रहे हैं। स्कूल की छात्र संख्या बढ़ाने के लिए इस बार उन्होंने फिर नया तरीका अपनाया है। अभिभावक संपर्क पंजिका रजिस्टर बनाकर उसमें छात्र, माता पिता का नाम, मोबाइल नंबर आदि डाटा अंकित किया है। स्कूल के होनहार छात्र तरनजीत कौर, अमृतपाल सिंह और ममता से रोजाना स्कूल न आने वाले बच्चों के अभिभावकों को फोन कराया जाता है। अभिभावकों से बच्चे को स्कूल भेजने की अपील की जाती है। उस दिन कौन से अध्याय को पढ़ाया जाएगा इसके बारे में भी बताया जाता है। कहा जाता है कि अगर आपका बच्चा स्कूल नहीं आया तो वह इस अध्याय से पिछड़ जाएगा। शिक्षक की इस नई पहल की अन्य शिक्षकों में भी सराहना हो रही है।

अभिभावकों को दिया होम स्टडी प्लान

मास्साब वीरेंद्र प्रताप सिंह छात्रों की शिक्षा गुणवत्ता मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इस बार स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के होम स्टडी प्लान तैयार किया है। इसको सभी अभिभावकों को दिया। इस स्टडी प्लान के तहत बच्चे घर पर कार्य कर रहे हैं या नहीं। इसके बारे में वह जानकारी करते रहते हैं। शिक्षक ने बताया कि स्टडी प्लान में बच्चों के सुबह जागने, दैनिक क्रियाएं, किताब पढ़ना, याद करना, दो पेज सुलेख लिखना, स्कूल का समय, आराम, गृह कार्य, खेलना, खाना, मनोरंजन और सोने का समय दिया गया है।

शिक्षक ने अभिभावकों को भी सौंपी जिम्मेदारी

शिक्षक ने बच्चों को हुनरमंद और उनकी शिक्षा मजबूत करने के लिए अभिभावकों को भी जिम्मेदारी सौंपी है। इसके तहत अभिभावक सूचित करें यदि उनका बच्चा झूठ बोलता है। घर में चोरी करता है। कहना नहीं मानता है। खाना खाने से पहले हाथ नहीं धोता है। स्कूल जाने से मना करता है। रोजाना स्नान नहीं करता है। सुबह जल्दी नहीं उठता है। देर रात तक मोबाइल और टेलीविजन देखता है आदि।

अपनी जेब से रुपए खर्च कर सुधारी व्यवस्थाएं

वैसे तो परिषदीय स्कूलों की व्यवस्थाएं दुरूस्त करने के लिए बजट भी दिया जाता है लेकिन इस स्कूल के शिक्षक ने व्यवस्थाएं सुधारने के लिए अपनी जेब से भी रुपए खर्च किए हैं। उन्होंने बताया कि उनही पहली ज्वाइनिंग बस्ती में हुई थी। सितंबर 2016 में उनकी तैनाती इस स्कूल में हुई। यहां फर्नीचर टूटा था। बिजली भी नहीं थी। अन्य कई कमियां थीं जिनको दूर किया। स्कूल में प्रोजेक्टर लगवाया। इससे बच्चों की पढ़ाई कराई जाती है।

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