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पीलीभीतहोटल-रेस्टोरेंट में किराया और पगार तक निकालना भारी

हिन्दुस्तान टीम,पीलीभीतPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 03:30 AM
एक तो आऊट ऑफ ट्रैक जिला ऊपर से कोरोना की मार। पिछली बार की तंगहाली से ही नहीं उबर पाए थे कि इस बार कोरोना की दूसरी लहर तो हालत यह कर दी है कि होटल...
1 / 3एक तो आऊट ऑफ ट्रैक जिला ऊपर से कोरोना की मार। पिछली बार की तंगहाली से ही नहीं उबर पाए थे कि इस बार कोरोना की दूसरी लहर तो हालत यह कर दी है कि होटल...
एक तो आऊट ऑफ ट्रैक जिला ऊपर से कोरोना की मार। पिछली बार की तंगहाली से ही नहीं उबर पाए थे कि इस बार कोरोना की दूसरी लहर तो हालत यह कर दी है कि होटल...
2 / 3एक तो आऊट ऑफ ट्रैक जिला ऊपर से कोरोना की मार। पिछली बार की तंगहाली से ही नहीं उबर पाए थे कि इस बार कोरोना की दूसरी लहर तो हालत यह कर दी है कि होटल...
एक तो आऊट ऑफ ट्रैक जिला ऊपर से कोरोना की मार। पिछली बार की तंगहाली से ही नहीं उबर पाए थे कि इस बार कोरोना की दूसरी लहर तो हालत यह कर दी है कि होटल...
3 / 3एक तो आऊट ऑफ ट्रैक जिला ऊपर से कोरोना की मार। पिछली बार की तंगहाली से ही नहीं उबर पाए थे कि इस बार कोरोना की दूसरी लहर तो हालत यह कर दी है कि होटल...

पीलीभीत। वरिष्ठ संवाददाता

एक तो आऊट ऑफ ट्रैक जिला ऊपर से कोरोना की मार। पिछली बार की तंगहाली से ही नहीं उबर पाए थे कि इस बार कोरोना की दूसरी लहर तो हालत यह कर दी है कि होटल और रेस्टोरेंट संचालक किराए से लेकर स्टाफ तक की सैलरी नहीं निकाल पा रहे। नए शासनादेश में ऑनलाइन डिलीवरी की सुविधा जरूर दी गई है पर जिले की तासीर टैक्नोसेवी न होने से कुछ खास फायदा होते नजर नहीं आ रहा है।

कोरोना की दूसरी लहर में धार्मिक, सामाजिक और पारिवारिक आयोजन बंद होने के कारण यह सेक्टर पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। होटल-रेस्टोरेंट बिजली का बिल, पालिका के टैक्स, बैंक ईएमआई, परिसर के किराए आदि के बोझ तले दबे जा रहे हैं। अब तीसरी लहर की आशंका से होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री और भी सहमी हुई है। लगभग तीन महीने की कड़ी तालाबंदी के बाद अनलॉक हुआ। उसके बाद भी इस सेक्टर को राहत नहीं मिली। इस वर्ष जनवरी-फरवरी से हालात में आंशिक सुधार होना शुरू हुआ था कि फिर कोरोना फैल गया। इस समय होटल और रेस्टोरेंट पूरी तरह बन्द हैं। लोग न तो बाहर खाने जा रहे हैं और न ही बाहर का खाना मंगवा रहे हैं। आमदनी नहीं होने के कारण होटल वाले खर्च कम करने में जुटे हैं। अधिकतर स्टाफ की छुट्टी कर दी गई है। गिनती के स्टाफ को भी वेतन देने के लाले पड़ रहे हैं। तमाम कारोबारी अपने बिजली के कनेक्शन को सरेंडर करने तक की तैयारी कर चुके हैं।

बन्द होने की कगार पर कई रेस्टोरेंट

पिछले वर्ष कोरोना काल में ही काफी रेस्टोरेंट तंगहाली में आ गए थे। इस बार भी रेस्टोरेंट बन्द होने की कगार पर है। होटल इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने बताया कि कुछ तो ऐसे हैं जिनका नया नया बिजनेस शुरू ही हुआ था कि कोरोना ने पांव पसार लिए।

इस काम धंधे का तो अब भगवान मालिक

होटल रेस्टोरेंट के काम की तो कमर ही टूट गई है। पिछली बार की लहर से ही होटल कारोबारी तबाह हो गए थे। रही सही कसर अब पूरी हो गई। आमदनी है नहीं। खर्च के रूप में बिजली का बिल, टैक्स, कर्मचारियों का वेतन, बैंक की किस्त आदि निकालना मुश्किल हैं। - अनिल अग्रवाल, एमडी निर्मल होटल।

बेपटरी हो गई होटल इंडस्ट्री

इस वर्ष होटल इंडस्ट्री पटरी पर आते-आते फिर बेपटरी हो गई। सभी बुकिंग कैंसिल हो गई। कोरोना कर्फ्यू में लोग घरों से निकल ही नहीं रहे। खुद होटल कारोबारी भी डरे हुए हैं। - संजीव जायसवाल, एमडी संतोष होटल।

आंकड़े

- एक वर्ष के टैक्स माफी की मांग कर रहे होटल स्वामी

- 50 फीसदी तक कम किया जाए बिजली का बिल

-12 महीने आगे तक के सभी तरह के टैक्स पर भी हो छूट।

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