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यूपी, उड़ीसा और तमिलनाडु सहित दस राज्यों के लोगों को बनाया ठगी का शिकार

यूपी, उड़ीसा और तमिलनाडु सहित दस राज्यों के लोगों को बनाया ठगी का शिकार

संक्षेप:

Pilibhit News - यूपी, उड़ीसा और तमिलनाडु सहित दस राज्यों के लोगों को बनाया ठगी का शिकारयूपी, उड़ीसा और तमिलनाडु सहित दस राज्यों के लोगों को बनाया ठगी का शिकारयूपी, उड

Dec 07, 2025 01:40 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, पीलीभीत
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पूरनपुर/घुंघचाई(पीलीभीत), हिटी। पीलीभीत में फर्जी कॉल सेंटर के माध्यम से आरोपियों ने उत्तर प्रदेश सहित दस प्रदेशों के लोगों को ठगी का शिकार बनाया। गेमिंग एप से बीस हजार लोगों ने लगभग साढ़े पांच करोड़ की धनराशि निवेश की। पुलिस हड़पी गई धनराशि की जानकारी जुटा रही है। पहला खुलासा होने के बाद आरोपियों ने पुलिस से बचने के लिए लॉगिन आईडी और पासवर्ड ब्लॉक कर दिया। गैंग के तार दुबई और दिल्ली से भी जुड़े हुए हैं। पकड़ा गया एक आरोपी चक्र खड़का पुत्र गंगा सिंह खड़का मूल निवासी सानागांव जिला डोटी राज्य सुदूर पश्चिम नेपाल और हाल निवासी गाबा चौक रुद्रपुर (उत्तराखंड) का निवासी है।

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मोबाइल गेमिंग एप के जरिए लोगों से ठगी करने की पटकथा दुबई में लिखी गई थी। आरोपी अमृतपाल सिंह और मनजीत 2024 में दुबई गए थे दो। वहां उनकी मुलाकात विक्रांत उर्फ विक्की से हुई थी। विक्की ने अमृतपाल और मनजीत को कॉल सेंटर में नौकरी दिलवाई तो वहीं तीनों ने फर्जी गेमिंग एप के तरीके सीख लिए और वापस भारत लौट आए। यहां आकर तीनों ने गेमिंग एप का एक बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया। पीलीभीत में लोगों को मोबाइल गेम के जरिए जोड़ने के बाद इनका नेटवर्क बढ़ता चला गया। विक्रांत उर्फ विक्की पूरी गैंग का ट्रेनर था। उसके बाद इन लोगों ने अन्य लोगों को जोड़कर अपना साम्राज्य यूपी के अलावा ओडिशा, तमिलनाडु, बिहार, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा और राजस्थान के लोगों को फंसाना शुरू कर दिया। गेमिंग एप लॉगिन करने के बाद आरोपी डार्क बेव से उनके बैंक खातों की जानकारी जुटा लेते थे। ठग पीड़ितों के खातों को खाली करते थे और फिर नए ग्राहक की तलाश की जाती थी। इस तरह कई प्रदेशों में इन लोगों ने करीब 50 हजार लोगों से मोबाइल गेमिंग एप पर लोगों कराया। इनमें 20 हजार लोगों ने 5 करोड़ 54 लाख 40242 इन्वेस्टमेंट किए। अलग-अलग बैंक खातों में मंगाई गई इस धनराशि की पुलिस जांच पड़ताल कर रही है। ठगी का शिकार होने के बाद लोगों ने साइबर सेल की शिकायत की। जिसमें सैकड़ों खातों में होल्ड लगा दिया गया। दो दिन पहले अमृतपाल सिंह के पकड़े जाने के बाद इन आरोपियों ने गेमिंग एप की वेबसाइट की लॉगिन आईडी और पासवर्ड ब्लॉक कर दिया। इसके बावजूद आरोपी पुलिस की पकड़ से नहीं बच सके। सर्विलांस की मदद से पुलिस गैंग के सभी आरोपियों तक पहुंच गई और उन्हें गिरफ्तार कर गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया। हालांकि पुलिस का मानना है कि गैंग से जुड़े लोग दुबई और दिल्ली से इस गैंग को संचालित कर रहे हैं, पुलिस उनकी भी जांच कर रही है। साइबर ठगी के अपराधियों पर पर लगेगा अंकुश फर्जी गेमिंग के जरिए आरोपी अब तक हजारों लोगों को ठग चुके हैं। इसको लेकर आए दिन पुलिस के पास शिकायतें पहुंच रही है। पुलिस का मानना है कि गेमिंग एप के जरिए की जा रही इस ठगी का खुलासा बड़ी सफलता है। इस गिरोह का भंडाफोड़ कर आरोपियों को जेल भेजने के बाद साइबर ठगी के अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगेगा। दिल्ली भागने की फिराक में थे आरोपी दो दिन पहले घुंघचाई थाना पुलिस ने अमृत पाल सिंह, प्रियांशु धर्मेंद्र कुमार को जेल भेज दिया। इसकी जानकारी जब गिरोह के अन्य सदस्यों को लगी तो उनमें खलबली मच गई। शनिवार को पकड़े गए आरोपी पुलिस से बचने के लिए। माधोटांडा पहुंचे वहां से पूरा गिरोह दिल्ली भागने की फिराक में था। सूत्रों से जानकारी लगने के बाद पुलिस ने आरोपियों को भागने से पहले ही दबोच लिया। पकड़े गए आरोपी मनजीत सिंह उर्फ सोनू (31) निवासी बसंतपुर नौनेर माधोटांडा, पीलीभीत (यूपी) विक्रांत पंडित उर्फ विक्की (34) अलिंग चौराहा खम्भात जिला आनंद गुजरात हाल निवासी गाबा चौक रुद्रपुर (उत्तराखंड) चक्र खड़का सानागांव जिला डोटी राज्य सुदूर पश्चिम नेपाल और हाल निवासी गाबा चौक रुद्रपुर, उधमसिंह नगर (उत्तराखंड) कपिल मेहरा (25) कालका चौक रोशनपुरा अरेरा हिल्स भोपाल मप्र हाल निवासी गाबा चौक रुद्रपुर उधमसिंह नगर (उत्तराखंड) कुनाल (25)कालका चौक रोशनपुरा अरेरा हिल्स भोपाल मप्र हाल निवासी गाबा चौक रुद्रपुर उधमसिंह नगर (उत्तराखंड) प्रशांत (26) दनिशकुंज कोलार भोपाल हाल निवासी गाबा चौक रुद्रपुर उत्तराखंड। गिरफ्तार करने वाली टीम गिरफ्तार करने वाली टीम में घुंघचाई के प्रभारी निरीक्षक जयंशकर सिंह, एसओजी मय टीम अजय कुमार सिंह, विजयवीर सिंह, संदीप प्रताप, सन्नी आर्य, निशांत कुमार, सर्विलांस टीम के संजीव कुमार, शोभित कुमार, प्रवीण कुमार, चिराग बालियान और चालक योगेंद्र कुमार शामिल है। संचार साथी एप पर परखे नंबर आम जन के लिए एडवायजरी भी जारी की गई है कि जब सिम कार्ड खरीदे तो देख लें दो बार अंगूठा तो नहीं लगवाया गया है। इसके अलावा संचार साथी एप पर अपने आधार कार्ड का नंबर डाल कर देख लें कि कितने नंबर उनके कार्ड से एक्टिवेट हैं। ऑनलाइन किसी लालच में न आएं।