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निलंबित डाक्टर की नौ साल में विभाग से कमाई 50 लाख

निलंबित डाक्टर की नौ साल में विभाग से कमाई 50 लाख

सरकारी नौकरी में निलंबन की सजा से एक डाक्टर की झोली भर रही है। नौ साल पहले निलंबित हुआ यह डाक्टर अब तक विभाग से बिना काम के ही 50 लाख की कमाई कर चुका है। शासन के साथ ही विभागीय उच्चाधिकारियों की मेहरबानी निलंबित डाक्टर की मौज ही मौज है। सीएमओ कार्यालय से इस डाक्टर के प्रकरण को निस्तारित करने की सूचना शासन को लगातार जा रही है पर शासन है कि इस पर कुंडली मार कर बैठा हुआ है। निलंबन के बाद से अब तक विभाग से 50 लाख कमा चुके डाक्टर की यह कमाई उसे मिल रहे 75 प्रतिशत वेतन से हुई है। सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बेहद संजीदा होने का संदेश देती है।

सरकरी सुविधाओं के नाम पर सरकार बजट भी खूब खर्च करती है। यह बजट पुराने अस्पतालों में सुविधा बढ़ाने के वजाय नए निर्माण में खर्च किया जाता है। करोड़ों की लागत से होने वाले यह निर्माण कार्य जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, ठेकेदारों के लिए फायदेमंद रहते हैं पर जनता को इनसे कोई लाभ नहीं मिल पाता है। जन सुविधा के नाम पर जिला अस्पताल में करोड़ों की लागत से बन कर तैयार हुए मैटरनिटी विंग, बर्न युनिट और ट्रामा सेंटर भवन इसकी बानगी भर हैं। यहां पुरुष और महिला अस्पताल में ही डाक्टरों की भारी कमी है। सरकार यहां डाक्टर उपलब्ध नहीं करा पा रही है, ऐसे में मैटरनिटी विंग, बर्न युनिट और ट्रामा सेंटर में स्टाफ की तैनाती के कोई आसार नहीं हैं। डाक्टरों की कमी से जिले के स्वास्थ्य केन्द्रों पर लोगों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

विभाग से गायब डाक्टरों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होने से कार्यरत डाक्टरों पर काम का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। विभाग से इसकी सूचना शासन को भेजी भी जाती है पर वहां से काई समाधान नहीं हो रहा है। नो साल पहले निलंबित डाक्टर का मामला इसका उदाहरण भर है।

प्रमुख सचिव के हाथों निलंबित हुआ था 50 लाख कमाने वाला डाक्टर

वर्ष 2009 में बसपा शासन काल में प्रमुख सचिव वित्त एवं संस्थागत जिले के नोडल अधिकारी थे। तब वह सात से नौ जुलाई तक जिले के निरीक्षण दौरे पर आए थे। इस दौरान उन्होंने गजरौला में न्यू पीएचसी का निरीक्षण किया था। वहां उन्हें डाक्टर दिनेश कुमार गायब मिले। उन्हें डाक्टर के खिलाफ मरीजों से वसूली, उनसे गलत व्यवहार करने की शिकायतें मिली थी।

उनकी निरीक्षण रिपोर्ट पर ही डा. दिनेश कुमार 31 जुलाई 2009 को निलंबित हो गए थे। इसके बाद इस मामले की जांच भी हुई और 24 जनवरी 2011 को विभाग से शासन को जांच रिपोर्ट भी भेज दी गई। इसके बाद भी अभी तक निलंबित डाक्टर के मामले का निस्तारण नहीं हुआ है। इसको लेकर विभाग से समय-सयम पर शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है। इसके बाद भी शासन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। निलंबित डाक्टर को तब से वेतन का 75 प्रतिशत भुगतान हो रहा है। यह भुगतान 23 फरवरी 2017 तक 35 लाख हो चुका था। तब से उसे वेतन भुगतान का एक साल का वक्त और भी बीत गया।

बिना काम के उसे मिल रही यह रकम अब 50 लाख तक पहुंचने की बात कही जा रही है। इस संबंध में सीएमओ डा. ओपी सिंह ने बताया कि उनकी ओर से निलंबित डाक्टर के मामले को निस्तारित करने के लिए लगातार सूचना शासन को भेजी जा रही है पर अभी तक कुछ हुआ नहीं है। प्राइवेट मेडिकल कालेज में नौकरी करने का आरोपलंबे अरसे निलंबित डाक्टर पर लखनऊ में एक प्राइवेट मेडिकल कालेज में नौकरी करने का भी आरोप है। इसकी भनक विभाग को भी है। निलंबित डाक्टर को बिना काम के मिल रहा वेतन और उसके प्राइवेट मेडिकल कालेज में नौकरी कर हो रही दोहरी कमाई के पीछे विभाग के उच्चाधिकारियों की मेहरबान मानी जा रही है।

वर्षों से गायब 23 डाक्टर भी बनने परेशानी का सबब

स्वास्थ्य विभाग में 99 डाक्टरों के पद हैं। इनमें से कागजों में 78 की तैनाती है। इनमें से भी तीन डाक्टर तो विभागीय परमिशन से उच्च शिक्षा के लिए गए हैं और 24 डाक्टर वर्षों से गायब हैं। इन डाक्टरों के बारे में विभाग को कोई खबर नहीं है। विभाग इनकी सूचना हर महीने शासन को भेजता है पर वहां से भी इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा है। जिले में डाक्टरों के 99 पदों में से वर्तमान में 51 डाक्टर ही कार्यरत हैं।

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  • Web Title:Earning 50 million from the department in nine years of suspended doctor