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20 सितम्बर, 2020|3:32|IST

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वापसी करने की चाह में मायूस बिहार के श्रमिक

वापसी करने की चाह में मायूस बिहार के श्रमिक

लॉकडाउन में जब रोजगार छिना तो घर वापसी के लिए कदम बढा दिए ताकि परिवार के बीच रह सके। श्रमिकों की यह सोच पीलीभीत आकर ऐसी धूमिल हुई कि न तो उनको घर मिल सका और न ही परिवार का साथ। घर जाने में अब उनकी कोई सुनने वाला नहीं हैं। गिन गिन कर मझोला में फंसे 53 श्रमिक घर जाने की आस लगाए हुए हैं।

लालकुआं में काफी संख्या में बिहार के लोग मजदूरी करते हैं। लाॅकडाउन में सब कुछ बंद होने के बाद उनका रोजगार भी छिन गया और रहने का ठिकाना नहीं रह गया तो लोग पैदल ही अपने गांव की दूरी तय करने के लिए निकल पड़े थे। लंबा सफर तय करने के बाद जब वह पीलीभीत की सीमा में पहुंचे तो यहां पर रोक लिया गया। जांच के बाद उनको शेल्टर हाउस मझोला में रोक दिया गया। नियमानुसार 14 दिनों के बाद उनको घर भेजा जाना था कि लेकिन विहार में इंट्री न होने से उनको घर भेजने में कोई निर्णय नहीं हो सका। इसके चलते सभी 53 श्रमिकों को मझोला में ही घर की याद में एक एक दिन काटना पड़ रहा। हालांकि रहने और खाने की अच्छी व्यवस्था है फिर उनका एक एक दिन एक साल के समान कट रहा। शेल्टर में आने वाले हर एक अधिकारी से उनकी गुहार तो लगती है लेकिन अधिकारी भी आखिर उनको कब घर भेजा जाएगा कोई जबाब नहीं दे पा रहे हें।

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  • Web Title:Desperate Bihar workers wishing to return