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भगवान शिव की कृपा में धतूरे की महिमा बड़ी निराली

भगवान शिव की कृपा में धतूरे की महिमा बड़ी निराली

सावन भगवान शिव भक्ति का पावन महीना है। इस महीने शिवभक्त अपने भोले को प्रशन्न करने और उनकी कृपा पाने को हर जतन करते हैं। इसमें पूजा और जलाभिषेक सर्वोपरि है। पूजा में भगवान शिव को चढ़ने वाली वस्तुओं में फूलों की बड़ी महिमा बताई गई है। पुराणों के अनुसार भगवान शिव को एक धतूरा चढ़ाने का महत्व तरह-तरह के हजारों फूलों और सोने-चांदी को चढ़ाने से कई गुना अधिक है।

भगवान शिव को चढ़ने वाले फूलों और धतूरे के महत्व के बारे में पुराणों में बताया गया है। पुराणों के अनुसार भगवान शिव को फूल चढ़ाना सोना चढ़ाने के समान ही है। भोले नाथ को हजार आक (अकौआ) के फूल चढ़ाने से जो फल मिलता है वह एक लाल कनेर के फूल चढ़ाने से मिल जाता है। इसी तरह भोलेनाथ को हजार कनेर के फूल चढ़ाना एक बेलपत्र चढ़ाने के बराबर है। हजार बेलपत्र चढ़ाना एक गूमा का फूल चढ़ाने के बराबर माना गया है। हजार गूमा के फूलों का महत्व एक चिड़चिड़ा के फूल के बराबर बताया गया है।

हजार चिड़चिड़ा के फूलों का महत्व कुश के एक फूल के बराबर बताया गया है। कुश के हजार फूल चढ़ाना एक शमि पत्र चढ़ाने के समान है। हजार शमि पत्र चढ़ाना दुर्लभ माने जाने वाले एक नील कमल के समान है। भगवान शिव को हजार नील कमल चढ़ाने को जो महत्व है वह एक धतूरा चढ़ाने के समान है। इसीलिए धतूरा भगवान शिव को सबसे प्रिय माना गया है। शहर के ही प.नारायण स्वरूप शर्मा ने बताया कि भगवान शिव की पूजा के बारे में पुराणों में विस्तार से बताया गया है। इसमें फूलों का यह महत्व बताया गया है। इन फूलों के अलावा भगवान शिव को बेला, धतूरा, कटैया, नाग चंपा, सर्पगंधा, गुलाब आदि भी चढ़ाने योग्य बताए गए हैं।

इन फूलों को चढ़ाना है निषेध

भगवान शिव की पूजा में भले ही फूलों का बड़ा महत्व हो पर कुछ फूल ऐसे भी जिन्हें चढ़ाना पुराणों में ही निषेध बताया गया है। इनमें कदंब, केवड़ा, शिरिष, मौलश्री, कपास, सेमल, अनार, जूही, दोपहरिया के फूल शामिल हैं।

पूजा में फूल चढ़ाने का भी है तरीका

भगवान शिव को फूल चढ़ाने का भी तरीका है। सही तरीके से चढ़ाए गए फूल ही पूजा में स्वीकार्य माने गए हैं। पं. नारायण स्वरूप शास्त्री बताते हैं कि फूलों को ऊपर की ओर मुख किए हुए चढ़ाना चाहिए। चढ़े हुए फूलों को अंगूठे और तर्जनी से उतारना चाहिए।

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  • Web Title:Daturae's greatness in the grace of Lord Shiva is very different