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बारिश और ओलावृष्टि से फसलें हुई बर्बाद

बरसात होने से लोगों को कुछ देर तक गर्मी से राहत तो मिली लेकिन तेज आंधी और ओलावृष्टि से किसानों की बासमती और चैनी धान की बालियां टूट गई। हवाओं के चलने से धान की फसल खेतों में चटाई की तरह बिछ गई। ओलों की मार से गन्ने की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

नगर से सटे गांव सिमरिया में करीब 15 मिनट तक ओलावृष्टि हुई। इससे लोगों में हड़कंप मचा रहा। यहां खेतों में भारी क्षति होना बताया जाता है। मंगलवार सुबह धीमी गति से हवा चलने और हल्की बूंदाबांदी से लोगों को राहत मिली लेकिन कुछ ही देर में यह राहत कहर में बदल गई। तेज आंधी चलने के साथ झमाझम बारिश होने लगी। देखते ही देखते नगर समेत देहात क्षेत्र के कई गांव में जमकरर ओलावृष्टि भी हुई।

नगर से सटे गांव सिमरिया में करीब 15 मिनट तक ओले गिरे। इससे जगह जगह पर ओले के ढेर लग गए। तेज हावाओं और बारिश के साथ ओले गिरने से बांसमती और चैनी धान की बालियां टूट गई। गन्ने की पत्तियां टूटने से इस फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है।कुछ किसानों का कहना है कि आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से बांसमती, चैनी धान, गन्ना, उर्द, मूंग आदि फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है।

कुदरत ने किसानों की मेहनत पर एक बार फिर से पानी फेर दिया है। इससे किसानों के चेहरे पर मायूसी देखी जा रही है। ओले गिरने से उनकी 15 एकड़ बासमती की तैयार फसल की बालियां टूट गई। अब धान की फसल को जोतना ही बाकी है। तेज हवाओं और बरसात से फसल चटाई की तरह खेत में बिछ गई है। गन्ने की नई फसल को भी भारी नुकसान हुआ है। गुरमंगद सिंह, फार्मर

मई माह के आखिरी सप्ताह से गर्मी का तेबर बढ़ गया था। जेठ का यह माह भयंकर गर्मी के रूप में भी जाना जाता है। मंगलवार को झमाझम बारिश के साथ ओले गिरने से लोगों को गर्मी से राहत मिली। ओले गिरने से लोगों को सर्दी के मौसम की याद आ गई। कई लोगों ने ओलों को बोतलों और बर्तनों में भरकर रख लिया। कई बच्चों ने ओलों को हाथ पर लेकर इनका स्वाद भी लिया। चने के बराबर जमीन पर पड़े ओले लोगों के मन को काफी प्रफुल्लित कर रहे थे। सुबह को हुई बारिश और ओलावृष्टि से मंगलवार को पूरे दिन ठंडक महसूस की गई।

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  • Web Title:crop destryed in heavy rain fall