जिविनि दफ्तर में बाबू की तैनाती, जीजीआईसी में दे रहे ड्यूटी
Pilibhit News - पीलीभीत में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के बाबू अजय कुमार पर कार्रवाई की तैयारी है। वह जीजीआईसी में काम कर रहे हैं जबकि उनकी तैनाती अन्य जगह पर है। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और सरकारी आदेशों का उल्लंघन उजागर हुआ है। पुलिस द्वारा धनराशि प्रकरण की जांच जारी है, लेकिन चपरासी के कमरे को अभी तक सील नहीं किया गया है।

पीलीभीत। जिला विद्यालय निरीक्षक दफ्तर में बाबू की तैनाती है, लेकिन कार्यस्थल पर ड्यूटी ना देकर जीजीआईसी में काम कर रहा है। इसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग कतरा रहा है। जनता टेक्निकल इंटर कॉलेज बीसलपुर के चपरासी इल्हाम उर रहमान शम्शी के प्रकरण के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के कारनामे दिन ब दिन उजागर होते जा रहे हैं। पहले एक करोड़ से अधिक की धनराशि को पत्नी के खाते में ट्रांसफर करने का प्रकरण सामने आया। इस मामले में पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि मुख्य आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
शासन के आदेश है कि कोई भी कर्मचारी किसी दफ्तर में अटैच नही हो सकता है। मगर जिला विद्यालय निरीक्षक दफ्तर के बाबू अजय कुमार पिछले कई सालों से राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बरखेड़ा में तैनात हैं, जबकि उनका वेतन पीलीभीत से निकलता है। विभागीय अधिकारियों ने मौखिक रूप से संबंद्ध कर रखा है। इस बाबू के जीजीआईसी में संबंद्ध होने की खबर सार्वजनिक होने पर माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारी साफ जवाब नहीं दे पा रहे हैं। वह गोल-गोल ढंग से कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं। इस बाबू का नाम जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में दर्ज है, लेकिन किसी प्रकार का कोई पटल नहीं दिया गया है। ऐसे में विभागीय अधिकारी सरकार के आदेशों का उल्लघन कर रहे है। जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार ने बताया कि दफ्तर के एक बाबू के जीजीआईसी बरखेड़ा में सम्बद्ध होने की जानकारी मिली है। इस बारे में कार्रवाई की जाएगी। अगर बाबू डीआईओएस दफ्तर में तैनात है तो वहां पर काम लिया जाएगा। अभी तक कमरे को नहीं किया गया है सील जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की धनराशि प्रकरण की जांच पुलिस कर रही है। पिछले दिनों पुलिस ने डीआईओएस दफ्तर के चपरासी के कमरे से विभिन्न साक्ष्य लिए थे। उसके बाद ताला डाल दिया गया था। मगर चपरासी के कमरे को अभी तक सील नहीं किया गया है। जबकि किसी प्रकरण की जांच पूरी होने तक कमरे को सील किया जाना चाहिए। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारी कमरे को सील करने के पक्ष में नजर नही आते है।
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