Hindi NewsUP NewsPilibhit Tiger Reserve sent 11 tiger tigresses to Lucknow Kanpur Gorakhpur Zoo in 11 years as rescue life imprisonment
इस टाइगर रिजर्व में 11 साल में 11 बाघ और बाघिन को दे दी गई ‘उम्रकैद’ की सजा

इस टाइगर रिजर्व में 11 साल में 11 बाघ और बाघिन को दे दी गई ‘उम्रकैद’ की सजा

संक्षेप:

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में पिछले 11 सालों में 11 बाघ-बाघिनों को ‘उम्रकैद’ की सजा देकर लखनऊ, कानपुर और गोरखपुर के चिड़ियाघर भेज दिया गया।

Jan 06, 2026 01:57 pm ISTRitesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, वरिष्ठ संवाददाता, पीलीभीत
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) आज सिर्फ रुहेलखंड ही नहीं, बल्कि दुनिया में बाघों के दर्शन और पर्यटन के लिए अलग पहचान बना चुका है। यहां आने वाले सैलानियों के लिए बाघ का दीदार लगभग तय माना जाता है। इस रिजर्व से जुड़ा एक और पहलू है, जो बहुत कम लोगों को पता है। यहां के कुछ बाघ ऐसे हैं, जिन्हें जंगल से रेस्क्यू के बाद दोबारा आजादी नहीं मिल सकी और उन्हें चिड़ियाघरों में ‘उम्रकैद’ की जिंदगी गुजारनी पड़ी।

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पीटीआर के बाघों का मिजाज अन्य टाइगर रिजर्व से कुछ अलग बताया जाता है। कई बाघ ऐसे हैं जो आबादी के नजदीक रहने के बावजूद इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचाते। लेकिन कुछ मामलों में जंगल में अनाधिकृत रूप से घुसने वालों पर हमले की घटनाएं भी सामने आईं। ऐसे मामलों में वन विभाग को बाघों को रेस्क्यू कर जंगल से बाहर करना पड़ा। यही वजह है कि बीते 11 वर्षों में यहां के 11 बाघ-बाघिनों को जंगल से बाहर जू भेजना पड़ा, जिसे वन विभाग की भाषा में ‘उम्रकैद’ कहा जा रहा है।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व के आंकड़ों के अनुसार रिजर्व घोषित होने के बाद वर्ष 2014 से अब तक कुल 26 रेस्क्यू ऑपरेशन किए गए। इन अभियानों में पांच शावकों समेत कुल 23 बाघ-बाघिनों को पकड़ा गया। इसके अलावा छह तेंदुओं को भी पकड़ा गया। रेस्क्यू बाघों में 12 को निगरानी और जांच के बाद दोबारा जंगल में छोड़ दिया गया। लेकिन, अन्य 11 बाघ-बाघिन की जंगल में वापसी नहीं हो सकी। ये ‘उम्रकैद’ काटने विभिन्न चिड़ियाघरों में भेज दिए गए।

कानपुर, गोरखपुर और लखनऊ के चिड़ियाघरों में भेजे गए बाघ

पकड़े जाने के बाद 11 बाघ-बाघिनों को लखनऊ, गोरखपुर और कानपुर के चिड़ियाघरों में भेजा गया। ये सभी अब वहां मजबूत जाल और चहारदीवारी के पीछे जीवन बिता रहे हैं। गोरखपुर भेजे गए पीटीआर के चर्चित केसरी बाघ की बीमारी के चलते मौत हो चुकी है। हाल ही में कानपुर भेजा गया एक बाघ इन दिनों वहां के दर्शकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

कानपुर में लोगों को आकर्षित कर रहा ‘बघीरा’

पीटीआर से कानपुर चिड़ियाघर भेजे गए एक बाघ को ‘बघीरा’ नाम दिया गया है। बताया जाता है कि बघीरा खुले तौर पर सामने आता है। उसकी चाल-ढाल व अदाएं सैलानियों को खासा प्रभावित करती हैं। चिड़ियाघर में आने वाले पर्यटक सबसे पहले बघीरा को देखने की इच्छा जताते हैं।

Ritesh Verma

लेखक के बारे में

Ritesh Verma
रीतेश वर्मा लगभग ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। बिहार में दैनिक जागरण से करियर की शुरुआत करने के बाद दिल्ली-एनसीआर में विराट वैभव, दैनिक भास्कर, आज समाज, बीबीसी हिन्दी, स्टार न्यूज, सहारा समय और इंडिया न्यूज के लिए अलग-अलग भूमिका में काम कर चुके हैं। और पढ़ें
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