तीसरे बच्चे के लिए 12 सप्ताह के मातृत्व अवकाश की हकदार है याची, हाईकोर्ट ने रद्द किया बीएसए का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीसरे बच्चे के जन्म पर मातृत्व अवकाश देने से इनकार करने के आदेशों को रद्द कर दिया है और मामले में दोबारा विचार के लिए संबंधित अधिकारी के पास भेज दिया है।

Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीसरे बच्चे के जन्म पर मातृत्व अवकाश देने से इनकार करने के आदेशों को रद्द कर दिया है और मामले में दोबारा विचार के लिए संबंधित अधिकारी के पास भेज दिया है। न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने गीता चौधरी की याचिका पर उनके अधिवक्ता मिथिलेश कुमार तिवारी व दूसरे पक्ष के वकील को सुनकर दिया है।
याची गीता चौधरी ने याचिका दाखिल कर गत 16 व 25 जुलाई के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें उसके तीसरे मातृत्व अवकाश के आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया था। दोनों आदेश हापुड़ के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व अन्य अधिकारी ने किए थे। याची के अधिवक्ता मिथिलेश कुमार तिवारी ने तर्क दिया कि मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम 2017 की धारा 3 में हुए संशोधन के अनुसार याची तीसरे बच्चे के लिए 12 सप्ताह के मातृत्व अवकाश की हकदार है।
बच्चों की संख्या पर कोई सीमा या रोक नहीं
एडवोकेट तिवारी ने इस तर्क के समर्थन में स्मृति अनुपम यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व के उमादेवी बनाम तमिलनाडु सरकार में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने के उमादेवी मामले की ओर कोर्ट का ध्यान आकृष्ट कराया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दो या दो से अधिक जीवित बच्चों वाली महिला कर्मचारी को मातृत्व लाभ से पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता, बल्कि ऐसी स्थिति में अवकाश की अवधि 26 सप्ताह से घटाकर 12 सप्ताह कर दी जाती है। बच्चों की संख्या पर कोई सीमा या रोक नहीं है।
कोर्ट ने रद्द किए विवादित आदेश
विपक्षी की अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि मामले को वापस भेजा जा सकता है ताकि 2017 के संशोधन और सुप्रीम कोर्ट की उपरोक्त टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए संबंधित प्राधिकारी नए सिरे से आदेश करे। सुनवाई के बाद कोर्ट ने ने दोनों पक्षों की सहमति से याचिका का निस्तारण करते हुए विवादित आदेशों को रद्द कर दिया। साथ ही मामले को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हापुड़ के पास वापस भेजते हुए निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत होने की तारीख से दो माह के भीतर कानून के अनुसार शीघ्रता से नया आदेश किया जाए।


