Hindi NewsUP NewsPCS Alankar Agnihotri was busy organizing the Brahmin community, meetings were held in the City Magistrate's office
ब्राह्मण समाज को संगठित करने में जुटे थे पीसीएस अलंकार अग्निहोत्री, सिटी मजिस्ट्रेट दफ्तर में ही बैठकें

ब्राह्मण समाज को संगठित करने में जुटे थे पीसीएस अलंकार अग्निहोत्री, सिटी मजिस्ट्रेट दफ्तर में ही बैठकें

संक्षेप:

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के ब्राह्मण बटुकों के साथ दुर्व्यवहार और यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ इस्तीफा देने वाले पीसीएस अलंकार अग्निहोत्री ने अचानक फैसला नहीं लिया है। वह लंबे समय से ब्राह्मण समाज को एकजुट करने में लगे थे। यहां तक की दफ्तर में ही इसे लेकर बैठकें भी होती थीं।

Jan 28, 2026 08:06 am ISTYogesh Yadav बरेली
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बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। अलंकार लंबे समय से ब्राह्मण समाज को एकजुट करने की दिशा में सक्रिय थे। बताया जा रहा है कि बरेली में तैनाती के बाद से ही उन्होंने इस दिशा में प्रयास शुरू कर दिए थे, लेकिन इस गतिविधि की भनक स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) को नहीं लग सकी। सिटी मजिस्ट्रेट रहते हुए अलंकार अग्निहोत्री अपने कार्यालय में ही ब्राह्मण समाज से जुड़े नेताओं और युवाओं के साथ बैठकें करते थे। सरकारी सेवाओं में कार्यरत कई ब्राह्मण अधिकारी भी उनके संपर्क में बताए जा रहे हैं। इन बैठकों में ब्राह्मण समाज के उत्थान और संगठन को लेकर लंबी चर्चाएं होती थीं।

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बताया जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों में अलंकार ने ब्राह्मण समाज को जोड़ने के उद्देश्य से कई व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाए थे। हाल ही में मालवीय जयंती के अवसर पर जीआईसी ऑडिटोरियम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के बाद उनकी स्वीकार्यता ब्राह्मण समाज में और बढ़ गई। इसके बाद उन्हें एक तरह से “ब्राह्मण हीरो” के रूप में देखा जाने लगा।

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पांच महीने पहले भी इस्तीफे पर हुई थी चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, अलंकार अग्निहोत्री ने करीब पांच महीने पहले ही अपने करीबी मित्रों के बीच इस्तीफा देने की बात रखी थी। हालांकि उस समय उन्होंने किसी कारणवश यह कदम नहीं उठाया। दिसंबर महीने में भी इस्तीफे को लेकर चर्चा हुई थी। बताया जा रहा है कि बाद में उन्होंने 26 जनवरी को इस्तीफा देने का दिन तय किया।

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इंटेलिजेंस फेल्योर पर उठे सवाल

इस पूरे प्रकरण में इंटेलिजेंस इनपुट न मिलने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि सिटी मजिस्ट्रेट होने के नाते एलआईयू के अधिकारी नियमित रूप से उनके संपर्क में रहते थे, इसके बावजूद उनके इस गतिविधि की जानकारी सामने नहीं आ सकी। इस्तीफे के बाद यूजीसी के नए नियम को लेकर देशभर में छिड़ी बहस और डैमेज कंट्रोल न हो पाने के चलते अब खुफिया तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। माना जा रहा है कि इस इंटेलिजेंस फेल्योर को लेकर उच्च स्तर पर जिम्मेदारी तय की जा सकती है और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की गाज भी गिर सकती है।