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पडरौना

पितृ पक्ष में क्या करने और क्या न करने से पितर होंगे सन्तुष्ट

हिन्दुस्तान टीम,पडरौनाPublished By: Newswrap
Mon, 20 Sep 2021 04:02 AM
पितृ पक्ष में क्या करने और क्या न करने से पितर होंगे सन्तुष्ट

पडरौना। निज संवाददाता

पितृपक्ष मंगलवार से प्रारंभ होगा। पितृ पक्ष में देवताओं की पूजा की जगह पितरों की पूजा करनी चाहिए।

महर्षि पराशर ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पं. राकेश पाण्डेय ने बताया कि पितृ पक्ष मंगलवार से आरम्भ होगा। इस दिन प्रातःकाल सूर्योदय से ही पितृपक्ष आरम्भ हो जाएगा तथा इसी दिन से पितृ तर्पण व पिण्डदान आदि कार्य आरम्भ हो जायेगा। पितृ विसर्जन 6 अक्टूबर दिन बुधवार को है। इस वर्ष पितृ पक्ष 16 दिन का है। मध्याह्ने श्राद्धम् समाचरेत अतः श्राद्ध कार्य कभी भी मध्याह्न में करना चाहिए। इस वर्ष तृतीया तिथि की वृद्धि है। पितृ पक्ष में बहुत से लोग इस बात से भ्रमित होते है कि इस वर्ष अपनी कन्या या पुत्र का विवाह आदि मांगलिक कार्य किया है तो इस वर्ष पितृ पक्ष में जल दान, अन्न दान व पिण्डदान नहीं करना चाहिए यह अशुभ है, लेकिन निर्णय सिंधुकार के मुताबिक सभी मांगलिक कार्यों में पितृ कार्य उत्तम व आवश्यक माना गया है। तभी तो हम जनेऊ, विवाह आदि मांगलिक कार्य से पूर्व नान्दीमुख श्राद्ध अवश्य करते है। इसका अभिप्राय यह है कि हमारे यहां होने वाले शुभ कार्य में किसी भी प्रकार का विघ्न न हो। इसके लिए पितृ पक्ष वर्ष में 1 बार आश्विन कृष्ण पक्ष में पितरों की पूजा के लिए होता है। कहा गया है कि देवताओं की की गयी पूजा में भूल होने पर देवता क्षमा कर देते है, लेकिन पितृ कार्य में न्यूनता व आलस्य प्रमाद करने से पितर असन्तुष्ट हो जाते हैं, जिससे हमें रोग, शोक आदि भोगने पड़ते हैं। शास्त्रों में मातृ देवो भव, पितृ देवो भव कहा गया है। अतः माता-पिता के समान कोई देवता नहीं, उनकी संतृप्ती व आशीर्वाद हमें जीवन में हर प्रकार का सुख देता है। अतः पितृ पर्व को हर्षोल्लास पूर्वक मनाना चाहिए। जिसमें नित्य जलदान व तिथि पर अन्न वस्त्र आदि दान करना चाहिए। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि प्रतिपदा श्राद्ध मंगलवार से प्रारंभ होकर अमावस्या बुधवार को है।

जिनके पिता के मृत्यु तिथि ज्ञात न हो वह श्राद्ध पितृविसर्जन को करें

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि सिर का मुण्डन पितृ पक्ष के भीतर या तिथि पर नहीं करना चाहिए, क्यों कि धर्मसिंधु में यह बात कही गयी है कि पितृ पक्ष में सिर के बाल जो भी गिरते है। वह पितरों के मुख में जाते हैं। अतः सिर के बाल पितृ पक्ष आरम्भ होने के एक दिन पूर्व बनवा लें या भूलबश नहीं बनवा पाते तो पितृ विसर्जन के दिन अपराह्न काल में बनवावें। ऐसा करने से पितर सन्तुष्ट होते है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे कुल की वृद्धि व यश, कीर्ति, लाभ, आरोग्यता व मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

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