
यूपी के इस जिले में 52 हजार से अधिक जन्म प्रमाण पत्र हो रहे रद्द, बांग्लादेशी घुसपैठिए से खुला खेल
इस रैकेट का पहला खुलासा 2024 में हुआ, जब NIA ने बेंगलुरु से एक अवैध बांग्लादेशी प्रवासी जाकिर को गिरफ्तार किया। जाकिर के पास से सलोन ब्लॉक के एक गांव से संबंधित एक जाली जन्म प्रमाण पत्र बरामद हुआ। अधिकारी ने कहा, ‘जैसे-जैसे NIA ने जांच का दायरा बढ़ाया, वैसे-वैसे और भी फर्जी प्रमाण पत्र सामने आए।’
रायबरेली जिला प्रशासन ने सलोन विकास खंड की 12 ग्राम पंचायतों में कथित तौर पर जारी किए गए 52,846 फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों को रद्द करने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है। पिछले साल राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों और रोहिंग्या घुसपैठियों की जांच के दौरान क्षेत्र में अनियमितताओं की आशंका जताए जाने के बाद बड़े पैमाने पर दस्तावेज़ धोखाधड़ी का मामला सामने आया। जुलाई 2024 में एनआईए ने बेंगलुरु से एक अवैध बांग्लादेशी प्रवासी जाकिर को गिरफ्तार किया था। उसके पास से सलोन ब्लॉक के एक गांव से संबंधित एक जाली जन्म प्रमाण पत्र बरामद हुआ था। इसके बाद एनआईए ने इस मामले की गहनता से जांच की तो फर्जी प्रमाण पत्रों का बड़ा खेल सामने आया।
रायबरेली में शुरू हुई यह कार्रवाई राज्य के चल रहे सत्यापन अभियान में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका लक्ष्य कई जिलों में सक्रिय अवैध विदेशी नागरिकों और पहचान धोखाधड़ी नेटवर्क को निशाना बनाना है। रायबरेली की मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अंजुलता ने पुष्टि की कि रद्द करने की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है और पिछले तीन दिनों में 878 से अधिक फर्जी प्रमाण पत्र रद्द किए गए हैं। रायबरेली जिला प्रशासन ने सलोन विकास खंड की 12 ग्राम पंचायतों में कथित तौर पर जारी किए गए 52,846 जाली जन्म प्रमाण पत्रों को रद्द करने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया है। पिछले साल राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों और रोहिंग्या घुसपैठियों की जांच के दौरान क्षेत्र में अनियमितताओं की आशंका जताए जाने के बाद बड़े पैमाने पर दस्तावेज़ धोखाधड़ी का मामला सामने आया। यह कार्रवाई राज्य में चल रहे सत्यापन अभियान में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका लक्ष्य कई जिलों में सक्रिय अवैध विदेशी नागरिकों और पहचान धोखाधड़ी नेटवर्क को निशाना बनाना है।
रायबरेली की मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अंजुलता ने पुष्टि की कि रद्द करने की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है और पिछले तीन दिनों में 878 से अधिक जाली प्रमाण पत्र रद्द किए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘एक विशेष टीम का गठन किया गया है और यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी जब तक सभी जाली प्रमाण पत्र रद्द नहीं हो जाते।’ सीडीओ के अनुसार, जिला पंचायती राज अधिकारी (डीपीआरओ) सौम्या शील सिंह ने अप्रैल 2025 में जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के माध्यम से महानिदेशक (जनगणना) को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी, और इस सप्ताह के प्रारंभ में निरस्तीकरण की अंतिम स्वीकृति प्राप्त हुई।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस रैकेट का पहला खुलासा जुलाई 2024 में हुआ, जब एनआईए ने बेंगलुरु से एक अवैध बांग्लादेशी प्रवासी जाकिर को गिरफ्तार किया। उसके पास से सलोन ब्लॉक के एक गांव से संबंधित एक जाली जन्म प्रमाण पत्र बरामद हुआ। अधिकारी ने कहा, ‘जैसे-जैसे एनआईए ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाया और केरल और कर्नाटक में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल संदिग्धों को गिरफ्तार किया, वैसे-वैसे और भी फर्जी प्रमाण पत्र सामने आए। इनमें से कई प्रमाण पत्र रायबरेली के गांवों के उसी समूह से संबंधित थे।’ उन्होंने आगे बताया कि उत्तर प्रदेश आतंकवाद-विरोधी दस्ते (एटीएस) और रायबरेली पुलिस द्वारा की गई जांच में पुष्टि हुई कि 12 पंचायतों ने मिलकर 52,846 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किए थे। इनमें से कई फर्जी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल अवैध विदेशी नागरिकों द्वारा भारतीय पहचान प्राप्त करने, संदिग्ध अंतरराज्यीय गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों और सरकारी योजनाओं का धोखाधड़ी से लाभ उठाने की कोशिश करने वाले लोगों द्वारा किया गया था।
अधिकारी ने कहा कि इस धोखाधड़ी का व्यापक पैमाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। रायबरेली के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विकास भवन में 10 सदस्यीय सत्यापन दल तैनात किया गया है, जहां एक विशेष केंद्र में प्रमाणपत्र रद्द करने का काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि जाकिर के नाम पर जारी प्रमाणपत्रों सहित 878 से अधिक प्रमाणपत्र पहले ही रद्द किए जा चुके हैं, जबकि शेष 52,000 से अधिक प्रमाणपत्रों को अमान्य करने की प्रक्रिया जारी है और इसमें कई दिन लगने की उम्मीद है। डीपीआरओ सौम्या शील सिंह ने पहले बताया था कि प्रभावित गांवों में दलहेपुर, नूरुद्दीनपुर, पृथ्वीपुर, सांडा सैदान, माधोपुर नानिया, लाहुरेपुर, सिरसिरा, गड़ी इस्लाम नगर, औनानीश, गोपाल अनंतपुर और दुभान शामिल हैं। अकेले दलहेपुर में 13,707 फर्जी प्रमाणपत्र मिले, इसके बाद नूरुद्दीनपुर (10,151) और पृथ्वीपुर (9,393) का नंबर आता है।
उन्होंने बताया कि ग्राम विकास अधिकारी विजय यादव, उनके सहयोगी और जन सुविधा केंद्र संचालक जीशान, जीशान के बेटे रियाज की गिरफ्तारी के बाद इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ। और एक नाबालिग के खिलाफ 16 जुलाई, 2024 को सलोन पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज होने के बाद जांच में पता चला कि आरोपियों ने उचित सत्यापन या वैध आवासीय विवरण के बिना बड़ी संख्या में प्रविष्टियां करने के लिए नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस) पोर्टल के लॉगिन क्रेडेंशियल का दुरुपयोग किया। जांच के दौरान 11 जन सुविधा केंद्र संचालकों सहित कुल 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। सिंह ने बताया कि 54 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट लगाया गया है। जांचकर्ताओं ने यह भी पाया कि यह गिरोह फर्जी जाति प्रमाण पत्र, ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र और अन्य पहचान पत्र बनाकर सरकारी योजनाओं का धोखाधड़ी से लाभ उठा रहा था। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इस घोटाले के बाद उत्तर प्रदेश के सभी जिला प्रशासनों ने पुराने रिकॉर्ड की समीक्षा की, सीआरएस पोर्टल तक पहुंच को सख्त किया गया और जन्म/मृत्यु पंजीकरण के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं।





