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मिट्टी का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को देगा खाद्य सुरक्षा

मिट्टी का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को देगा खाद्य सुरक्षा

संक्षेप:

Orai News - उरई में कृषि विज्ञान केंद्र में विश्व मृदा दिवस के अवसर पर मिट्टी की बिगड़ती सेहत पर चिंता व्यक्त की गई। किसानों को रसायनों के विवेकपूर्ण उपयोग की सलाह दी गई ताकि आने वाली पीढ़ियों को खाद्य सुरक्षा मिल सके। मुख्य अतिथि एसके उत्तम ने मिट्टी संरक्षण के महत्व पर जोर दिया।

Dec 05, 2025 09:15 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, उरई
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उरई। कृषि विज्ञान केंद्र में विश्व मृदा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में मिट्टी की बिगड़ती सेहत पर चिंता व्यक्त की गई। इस दौरान किसानों को रसायनों के विवेकपूर्ण उपयोग की सलाह दी गई जिससे आने वाली पीढ़ियों को खाद्य सुरक्षा मिल सके। कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष मो मुस्तफा के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में सभी वैज्ञानिकों एवं स्टाफ की सक्रिय उपस्थिति रही वहीं लगभग 50 किसानों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए मिट्टी संरक्षण एवं सतत कृषि के महत्व पर जानकारी प्राप्त की। मुख्य अतिथि उप कृषि निदेशक एसके उत्तम ने कहा कि मिट्टी हमारे जीवन और कृषि उत्पादन की आधारशिला है इसलिए इसकी रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है।

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उन्होंने स्थानीय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देने, गांव व शहरी क्षेत्रों में मिट्टी संरक्षण के उपायों को अपनाने तथा वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से टिकाऊ खेती सुनिश्चित करने पर जोर दिया। डॉ मो. मुस्तफा ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व की लगभग 33 प्रतिशत मिट्टी क्षरण, प्रदूषण, रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग तथा अनुचित कृषि पद्धतियों के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी है। मिट्टी की जैव-उर्वरता में कमी, सूक्ष्मजीवों के जीवन पर संकट और खाद्य सुरक्षा पर बढ़ते खतरे मानव जीवन तथा पर्यावरण के लिए चुनौती बन रहे हैं। इसी महत्वपूर्ण उद्देश्य से हर वर्ष 5 दिसंबर को विश्व मृदा दिवस मनाया जाता है। कृषि अधिकारी श्री गौरव यादव ने बताया कि इस वर्ष की थीम हेल्दी सॉइल फॉर हेल्दी सिटी रखी गई जो दर्शाती है कि स्वस्थ मिट्टी केवल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ही नहीं बल्कि तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों की स्थिरता, पर्यावरणीय संतुलन और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। केंद्र के वैज्ञानिकों ने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के विभिन्न वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उपायों पर विस्तृत जानकारी दी जिसमें रासायनिक खादों का संतुलित एवं आवश्यकता-आधारित प्रयोग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, कम्पोस्टिंग और हरित खाद का उपयोग, फसल चक्र का पालन, भूमि कटाव रोकने के लिए पेड़-पौधों का रोपण तथा नियमित मृदा परीक्षण प्रमुख रहे। किसानों को यह भी बताया गया कि मिट्टी का संरक्षण एक दीर्घकालिक निवेश है जो आने वाली पीढ़ियों की खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण की स्थिरता सुनिश्चित करता है। जिला मृदा परीक्षण प्रयोगशाला अध्यक्ष रमन ने किसानों को मिट्टी स्वास्थ्य संरक्षण के लिए वैज्ञानिक सलाह का पालन करने, रसायनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा मृदा संरक्षण एवं मृदा परीक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का संदेश दिया।