श्रीमद्भागवत कथा में महात्म्य और राजा परीक्षित के जन्म प्रसंग का वर्णन
Orai News - जालौन, संवाददाता। औरैया रोड स्थित सतीशचंद्र मिश्रा के आवास पर आयोजित साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा

जालौन, संवाददाता। औरैया रोड स्थित सतीशचंद्र मिश्रा के आवास पर आयोजित साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास अनिल त्रिपाठी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के महात्म्य और राजा परीक्षित के जन्म प्रसंग का वर्णन किया। दूसरे दिन कथा व्यास अनिल त्रिपाठी महाराज ने भागवत कथा का महात्म्य बताते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान है। भागवत कथा मनुष्य को धर्म, सत्य, करुणा और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ भागवत कथा का श्रवण करता है, उसके जीवन के अनेक कष्ट स्वतः ही दूर होने लगते हैं और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति का अंतर्मन शुद्ध होता है और उसे ईश्वर के निकट होने का अनुभव प्राप्त होता है। राजा परीक्षित के जन्म की कथा का वर्णन कर बताया कि राजा परीक्षित का जन्म महाभारत युद्ध के बाद हुआ था। अश्वत्थामा द्वारा छोड़े गए ब्रह्मास्त्र से गर्भ में स्थित शिशु को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं गर्भ में प्रवेश कर बालक की रक्षा की। इसी कारण बालक का नाम परीक्षित पड़ा, क्योंकि वह जन्म से ही भगवान का साक्षात दर्शन कर चुका था। राजा परीक्षित की कथा हमें यह सिखाती है कि ईश्वर अपने भक्तों की हर परिस्थिति में रक्षा करते हैं और सच्चे भक्त को कभी निराश नहीं करते। इस मौके पर पारीक्षित सतीशचंद्र मिश्रा, प्रभा देवी, अरविंद मिश्रा, ऊषा देवी, शरद मिश्रा, नारायण मिश्रा, शिवम मिश्रा, पारष मिश्रा, आशा देवी, प्रीति, नारायण मिश्रा, सुरूचि देवी, अंकित कुमार, कंचन देवी, शिवम मिश्रा आदि थे।
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