यूजीसी कानून के विरोध में करणी सेना ने डीएम कार्यालय पर हल्ला बोल
Orai News - उरई में करणी सेना भारत ने यूजीसी कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा और कानून को वापस लेने की मांग की। जिलाध्यक्ष कृष्ण सिंह चौहान ने कहा कि यह कानून शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के हितों के खिलाफ है। आंदोलन को तेज करने की चेतावनी दी गई।
उरई। केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए यूजीसी कानून के विरोध में करणी सेना भारत के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने बुधवार को जोरदार प्रदर्शनकर। कानून को वापस लिए जाने की मांग करते हुए नारेबाजी की और डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। बुधवार को पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार द्वारा यूजीसी कानून लागू किए जाने से नाराज करणी सेवा भारत ने जुलूस निकालकर डीएम कार्यालय पर हल्ला बोला। करणी सेना भारत के जिलाध्यक्ष कृष्ण सिंह चौहान ने कहा कि यूजीसी कानून शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के हितों के खिलाफ है। यह कानून उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता को प्रभावित करता है तथा इससे शिक्षकों और छात्रों के अधिकारों का हनन हो रहा है।
उन्होंने कहा कि करणी सेवा इस कानून को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेगी। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने यूजीसी कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनभावनाओं की अनदेखी की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस दौरान गजेंद्र सिंह, गोविंद शर्मा, आकाश जादौन, भारत प्रताप सिंह,रमन सिंह, शिवम सिंह,भूपेंद्र सिंह,विनय प्रताप,जितेंद्र भदोरिया, बृजपाल सिंह, राजू सिंह, वीरसिंह, शिवम दुबे,संतोष सिंह, धर्मवीर सिंह,सत्यम चौहान, अमित सिंह,लाल बहादुर, शैलेंद्र सिंह,मनीष तिवारी आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे। -- बोले जिलाध्यक्ष यूजीसी कानून ने शिक्षा व्यवस्था को झकझोर दिया है। यह कानून न केवल छात्रों और शिक्षकों के अधिकारों का उल्लंघन कर रहा है, बल्कि यह उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता को भी प्रभावित करता है। करणी सेना इस कानून के खिलाफ है और हम सरकार से इस कानून को तुरंत वापस लेने की मांग करते हैं।यदि हमारी मांग को नजरअंदाज किया गया तो हम आंदोलन को और तेज करेंगे। -कृष्ण सिंह चौहान,जिलाध्यक्ष, करणी सेना भारत ----- बोले प्रदेश उपाध्यक्ष हम इस कानून को लेकर पूरी तरह से एकजुट हैं और इसका विरोध करते हैं। यह कानून छात्रों के भविष्य से खेलता है और शिक्षा के अधिकार को सीमित करता है। हम सभी ने मिलकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा है और हम उम्मीद करते हैं कि सरकार हमारी आवाज सुनेगी और इसे वापस लेगी। - ठा सुरेंद्र पाल सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




