मकर संक्रांति: लाई और तिलकुट की सजीं दुकानें
Orai News - उरई में 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर्व मनाया जाएगा। त्योहार की खरीदारी के लिए बाजार में भीड़ बढ़ गई है, विशेष रूप से गुड़ और तिल के उत्पादों की मांग है। पतंग उड़ाने का चलन भी है, और रंग-बिरंगी पतंगों की बिक्री हो रही है। श्रद्धालु यमुना में डुबकी लगाने के लिए भी पहुंच रहे हैं।
उरई। दो दिन यानि 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर्व मनाया जाएगा। इसको देखते हुए शहर के बाजारों में धूप खिलने के साथ ही भीड़ भी बढ़ गई है। त्योहार की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है। सबसे ज्यादा मांग गुड़ और तिल से बने उत्पादों की है साथ ही सकरकंद भी खूब बिक रही है। वहीं मंकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने का भी चलन है। इससे दुकानों रंग-बिरंगी पतंगे भी आई हुई हैं। हर कोई लाई, तिल, गुड़, चूड़ा की खरीदने के लिए पहुंच रहा है। इससे दुकानों में दिन भर लोगों का तांता लगा रहा। कड़ाके की सर्दी की वजह से कई दिनों से बाजार में सन्नाटा था।
वहीं अब धूप निकलने से बाजार में चहल कदमी बढ़ गई है। हिन्दू समाज में मकर संक्रांति मनाने का विशेष महत्व है। इस मौके पर श्रद्धालु जालौन जिले के जगम्मनपुर स्थित पचनद, कालपी की यमुना में डुबकी लगाने जाते हैं। वहीं, घरों में भी लोग तिल चटकने के साथ पूजा अर्चना की जाती है। इस वजह से शहर के घंटाघर स्थित लाई, पट्टी की दुकानों पर रंगबिरंगी तिल, लाई के अलावा उसके बने लड्डू लोगों को लुभावते रहे। विक्रेता अयान, शहीद व नासिर ने बताया कि दो तीन दिनों से त्योहार की धूम है। पर्व पर तिल के लडडुओं की विशेष मांग है। लिहाजा करीब एक दर्जन तरह के छोटे बडे़ लडडुओं के पैकेट लाए गए है। इसमें लड्डू सेव 160, लइया 80, तिल लड्डू 180 रुपये किलो है। ------ पतंगों का जबरजस्त क्रेज, बच्चे उत्साहित उरई। इस बार मकर संक्रांति पर विभिन्न तरह के थीमों पर रंग बिरंगी पतंग बाजार में आई है। बजरिया स्थित चूड़ी मार्केट पर सजी पतंग दुकान के विक्रेता अरमान ने बताया कि 5से लेकर 50रुपये तक की पतंग और धागा 500 रुपये तक आया है। कई पतंग ऐसी हैं, इसमें आपरेशन सिंदूर के साथ मोदी थीम दी गई है। ------ अब तो केवल त्योहार पर आती पतंगों की याद उरई। पतंग कारोबार से जुडे़ बजरिया के आमिर ने बताया कि वर्ष 2014 तक पतंगों का क्रेज रहा। लोगों में बच्चों से लेकर बडे़, युवा, महिलाओं में पतंग उड़ाने को लेकर रुचि रहती थी। पर 2014के बाद से धीरे धीरे ग्राफ गिरता चला गया। आज स्थिति यह है कि केवल तीज त्योहार खासकर मकर संक्रांति पर ही लोग दिखाई देते है। उस पर भी केवल परम्परा निभाई जाती है।

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