
आधी रात: रैन बसेरा पड़ताल : साहब! तीन से ज्यादा होने पर जमीन पर सोते हैं
Orai News - उरई में नगर पालिका और अस्पताल प्रशासन ने सर्दी से निपटने के लिए रैन बसेरे खोले हैं, लेकिन तैयारी अधूरी है। महिला अस्पताल में केवल तीन बेड हैं, जबकि अन्य स्थानों पर सुविधाएं भी कम हैं। लोग जमीन पर सोने को मजबूर हैं। रेलवे स्टेशन पर अस्थाई रैन बसेरे में भी केवल एक लाइट की व्यवस्था है।
उरई। सर्दी से निपटने के लिए शहर में नगर पालिका व अस्पताल प्रशासन ने आधी अधूरी तैयारियों के बीच रैन बसेरे खोल दिए हैं। हाल यह है कि कहीं पर गिने चुने बेड डाले गए तो कहीं पर पानी तक के इंतजाम नहीं किए। महिला अस्पताल के रैन बसेरे में तो गिनती के तीन बेड रैन बसेरे में डाल दिए। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान की आधी रात की पड़ताल में अफसरों का सच सामने आ गया। लोगों ने संवाद कर बताया, जब रात को ज्यादा लोग आ जाते हैं तो जमीन पर ही दरी बिछाकर काम चलाना पड़ता है। कंपकपाते हुए रात बीतती है।

प्रस्तुति से उरई से महावीर यागिक की रिपोर्ट। रेलवे स्टेशन, समय रात: 10.02 मिनट महिला बेड कम, रोशनी के नहीं इतजाम उरई। रेलवे स्टेशन के सामने पालिका के अस्थाई रैन बसेरे में व्यवस्थाएं तो ठीक मिली। कमी तो सिर्फ महिला बेडों के साथ रोशनी की थी। रोशनी के नाम पर महिला व पुरुष गेट पर एक एक लाइट लगी थी। इससे अंदर की तरफ अंधेरा था। हालांकि रजाई, गददे के साथ पानी और मेडिकल बाक्स भी मौके पर मिला। मौके पर 34 बेड मिले। केयरटेकर मौके पर मिला। उसने बताया पांच दिनों से संख्या पचास के आसपास हो रही है। पांच को 27, छह को 45, सात को 45, 8 को 41 लोग ठहरे। 9 दिसंबर की रात दस बजे पड़ताल में 25 लोग मिले। इसमें पुरुषों के साथ महिलाएं भी शामिल रहीं।

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