कालपी में बंदरों का आतंक, मकानों की छतों के साथ सड़को पर भी बंदरों का हुड़दंग

Jan 01, 2026 10:12 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, उरई
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Orai News - कालपी में बन्दरों की बढ़ती संख्या से नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पहले छतों तक सीमित रहने वाले ये बन्दर अब सड़कों पर भी सक्रिय हो गए हैं, जिससे लोगों को बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। नगर पालिका और वन विभाग से कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

कालपी में बंदरों का आतंक, मकानों की छतों के साथ सड़को पर भी बंदरों का हुड़दंग

कालपी। संवाददाता। बन्दरों की बढ़ती संख्या अब नगर की जनता के लिए मुसीबत बन गयी है। छतो पर पहुंचना पहले से ही खतरे से खाली नहीं था अब उनका आतंक सड़क तक आ गया है जिससे राह निकलना मुश्किल हो रहा है। वैसे तो नगर में बन्दरो की मौजूदगी दशको पुरानी है लेकिन यह कुछ विशेष क्षेत्रों तक ही सीमित थी जिससे लोगों को अधिक परेशानी नही थी लेकिन विगत एक दशक के लगभग से इनकी पहुँच नगर के ज्यादातर हिस्सो तक पहुँच गयी है। आलम यह है कि अब तो रेलवे स्टेशन, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, टरननगंज बाजार,रावगंज, गणेशगंज, मनीगंज,रामचबूतरा आदि मुहल्ले इनके स्थाई ठिकाने बन गए है जिसकी वजह से लोगों की परेशानी‌ बढ़ गयी है।

आलम यह है कि घरो के दरवाजे खुले नहीं रह सकते तो बाजार में दुकानदारों की दुकानो से सामान पलक झपकते ही गायब हो जाता है इसके अलावा लोगों को अपनी छतो पर पहुँचना मुश्किल हो गया है। रामचबूतरा निवासी आशीष चतुर्वेदी,राजू कोष्ठा, राकेश मिश्रा, ज्ञानवती,अवध तिवारी, टरननगंज निवासी सत्येंद्र सिंह, विवेक तिवारी, अमरदीप पाण्डेय, धर्मेन्द्र सिंह, रावगंज निवासी विनोद यादव, शरद शुक्ला, प्रमोद वाजपेई,प्रेम कुमार गुप्ता, कुलदीप शुक्ला आदि लोगो की माने तो बन्दरो की बढ़ती आबादी की वजह से छतो पर उनका कोई भी सामान सुरक्षित नहीं है न ही उनका छतो पर जाना खतरे से खाली नहीं है इसलिए वह लोग छतो को भूल गए है लेकिन जनता की इस परेशानी से जिम्मेदारो को कोई वास्ता नहीं है जबकि वह कई बार इस परेशानी से बचाने के लिए नगर पालिका परिषद व वन विभाग से फरियाद कर चुके है लेकिन समस्या का हल नहीं निकला है जिसकी वजह से समस्या दिन प्रतिदिन और गम्भीर हो रही है। आलम यह है कि अभी तक उनका आतंक घरो की छत तक ही सीमित था लेकिन अब वह सड़क पर आ गए हैं जिसकी वजह से उनके न‌ जाने तक रास्ते भी बाधित हो जाते है और लोगों को उनकी वजह से इंतजार या फिर रास्ता ही बदलना पड़ता है। उमाकांत तिवारी, दिव्य गोपाल, राकेश पुरवार अर्पित, गोपाल आदि लोगों की माने तो अगर समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो लोगों का घरो से निकलना मुश्किल हो सकता था। नगर से निकलकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचा बन्दरो का आतंक कालपी। अभी तक बन्दरो का आतंक महज नगर सीमा तक ही सीमित था ग्रामीण क्षेत्रों में तो यह महज मनोरंजन का साधन थे लेकिन उनकी बढ़ती संख्या के कारण उनका आतंक अब ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच गया है। आलम यह है कि जोल्हूपुर, छौंक, उसरगांव, बैरई, महेवा, पड़ोसी जनपद के दौलतपुर, सहित कई गाँव में उनकी उपस्थिति से लोग परेशान हो रहे है।

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