
साहब! सुबह होते ही बंद हो जाते हैं रैन बसेरे
Orai News - उरई। सर्दी से निपटने के लिए शहर में संचालित रैन बसेरों की आपके अपने साहब! सुबह होते ही बंद हो जाते हैं रैन बसेरे
उरई। सर्दी से निपटने के लिए शहर में संचालित रैन बसेरों की आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने पड़ताल की तो लोग सर्दी में कंपकपाते मिले। मंगलवार को दिन में सर्द हवाओं के साथ गलन होने के बाद भी नपा के रैन बसेरे ताले में बंद मिले। प्रमुख स्थानों पर अलाव बुझे थे। बेड भी पर्याप्त डले नहीं मिले। इससे आसपास के लोगों ने बताया कि जब रात को संख्या ज्यादा हो जाती है तो लोग जमीन पर लेटते है। मौसम को देखते हुए रात के साथ दिन में भी रैन बसेरे खोले जाए। मुख्यमंत्री ने सर्दी से बचाने के लिए सख्त निर्देश दिए थे, पर नगर पालिका के जिम्मेदार ठीक से पालन नहीं कर रहे है।
मंगलवार दोपहर को एक बजे स्टेशन रोड स्थित रैन बसेरा बंद मिला। वैसे यहां 30 से 35 बेड हैं। जब लोग ज्यादा आ जाते हैं तो रजाई, गददे जमीन पर बिछाए जाते हैं। दिन में ताला पड़ा होने से बसेरे के बाहर व स्टेशन परिसर के बरामदे में साधु, संत के साथ लोग ठिठुर रहे थे। इनमें से श्याम सुंदर व गोपाल ने बताया, रैन बसेरे में व्यवस्थाएं तो ठीक हैं, पर बेड कम हैं। इस वजह से रात को जब लेटने आते तो बेड फुल हो जाते है। इससे जमीन में सोने पर रात भर कंपकपी छूटती रहती है। नींद कम, करवटों में ज्यादा समय निकल जाता है। बेडों की संख्या बढ़ जाए तो कुछ राहत मिलेगी। इसी तरह रामलला व संतोष ठिठुरते हुए बोले, अब तो गलन शुरू हो गई है। अगर कुछ दिनों के लिए दिन में भी रैन बसेरे खुलवाने के साथ अलाव जलवाए जाए तो बहुत सहूलियत मिलेगी। ठीक ऐसा ही हाल रोडवेज बस स्टैंड पर देखा गया। वहां पर दिन में रैन बसेरे का ताला तो खुला था, पर कर्मचारी रजाई, गददे ठीक करने आए थे। पूछने पर बताया गया कि शाम छह बजे के बाद चालू होता है। वैसे यहां रैन बसेरे में 30 बेड मिले। इसमें महिला व पुरुष दोनों शामिल है।

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