जूनियर इंजीनियर पद पर सिर्फ डिप्लोमाधारी का दावा, सुप्रीम कोर्ट में ग्रेजुएट इंजीनियर का दावा खारिज
जूनियर इंजीनियर पद पर सिर्फ डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों का ही दावा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए ग्रेजुएट इंजीनियरों का दावा खारिज कर दिया है।डिग्रीधारियों द्वारा याचिका में 13 अभियंत्रण विभागों की सेवा नियमावली को चुनौती दी गई थी।

सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने उत्तर प्रदेश में जूनियर इंजीनियर (जेई) भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने 'ग्रेजुएट इंजीनियरिंग स्टूडेंट वेलफेयर एसोसिएशन' की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर विस्तृत सुनवाई करने के बाद उसे पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने इस फैसले के जरिए जूनियर इंजीनियर के पदों पर केवल डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों के विशेष अधिकार और दावे को सही ठहराया है। अदालत के इस कड़े रुख के साथ ही उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) की लखनऊ खंडपीठ के पुराने फैसले पर भी अंतिम मुहर लग गई है। इस बड़े फैसले के बाद अब भर्ती परीक्षा में शामिल हुए हजारों डिग्रीधारी (बी.टेक/ग्रेजुएट) इंजीनियरों के चयन का रास्ता हमेशा के लिए बंद हो गया है।
क्या था पूरा विवाद? क्यों आमने-सामने आए डिग्री और डिप्लोमाधारी?
उत्तर प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय अध्यक्ष एनडी द्विवेदी ने इस पूरे कानूनी विवाद की पृष्ठभूमि की जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में जूनियर इंजीनियर के कुल 4,612 (संशोधित 4,616) पदों पर सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था। इस विज्ञापन की सेवा नियमावली के तहत आयोग ने सिर्फ तीन वर्षीय तकनीकी डिप्लोमा रखने वाले अभ्यर्थियों को ही आवेदन के लिए पूरी तरह पात्र माना था।
सरकार के इस नियम को चुनौती देते हुए और खुद को उच्च योग्यताधारी बताते हुए बी.टेक/डिग्री धारक अभ्यर्थियों ने विज्ञापन के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिकाएं दाखिल कर दी थीं। डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने डिग्री धारकों की इस याचिका का अदालत में पुरजोर विरोध किया था। इसके बाद 20 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया था कि डिग्रीधारी इंजीनियर्स को डिप्लोमाधारियों के समान नहीं माना जा सकता, क्योंकि दोनों का कार्यक्षेत्र और नियमावली अलग है।
सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई को सुनाया फैसला, डिप्लोमा महासंघ में जश्न का माहौल
हाईकोर्ट के इसी फैसले को चुनौती देते हुए ग्रेजुएट इंजीनियर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। महासंघ की ओर से अधिकृत किए गए प्रांतीय अध्यक्ष एन.डी. द्विवेदी ने देश के शीर्ष और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में डिप्लोमाधारियों का पक्ष बेहद मजबूती से रखा। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 29 मई 2026 को ग्रेजुएट इंजीनियर्स की विशेष अनुमति याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
इस बड़े फैसले के बाद यूपी डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष एच.एन. मिश्र समेत तमाम पदाधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खुशी जताई है और इसे डिप्लोमा छात्रों के साथ सच्चा न्याय बताया है। गौर करने वाली बात यह है कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग इस भर्ती के लिए 3 मई 2026 को ही लिखित परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित करा चुका है। अब इस कानूनी फैसले के बाद आयोग बिना किसी अड़चन के केवल डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट और परीक्षा परिणाम जारी करने की तैयारी में जुट गया है।
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Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।


