Hindi NewsUP NewsOne gets pardon and other gets punishment for same mistake High Court angry at BSA discriminatory order
एक ही गलती पर एक को माफी, दूसरे को सजा, बीएसए के भेदभावपूर्ण आदेश पर हाईकोर्ट नाराज

एक ही गलती पर एक को माफी, दूसरे को सजा, बीएसए के भेदभावपूर्ण आदेश पर हाईकोर्ट नाराज

संक्षेप:

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो शिक्षकों के खिलाफ एक ही गलती की शिकायत पर एक को निलंबित करने और दूसरे को माफ करने के बीएसए इटावा के निर्णय पर नाराजगी जताई है।  

Sep 12, 2025 09:52 pm ISTDinesh Rathour प्रयागराज, विधि संवाददाता
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो शिक्षकों के खिलाफ एक ही गलती की शिकायत पर एक को निलंबित करने और दूसरे को माफ करने के बीएसए इटावा के निर्णय पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि बीएसए का रवैया उनकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। यह प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग है। साथ ही अगली सुनवाई पर बीएसए इटावा को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने इटावा के प्रबल प्रताप सिंह की याचिका पर उसके अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी को सुनकर दिया है।

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एडवोकेट अग्निहोत्री त्रिपाठी का कहना था कि याची और ज्योति राव के खिलाफ सहयोगियों से दुर्व्यवहार करने की शिकायत की गई थी, जिस पर बीएसए ने याची को निलंबित कर दिया। उसके खिलाफ जांच शुरू करते हुए आरोप पत्र दे दिया गया जबकि ज्योति राव के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। बीएसए का यह आदेश भेदभावपूर्ण है क्योंकि याची ने जो स्पष्टीकरण दिया उसे बीएसए ने स्वीकार नहीं किया जबकि उसी मामले में ज्योति राव का स्पष्टीकरण स्वीकार कर लिया गया और उसके खिलाफ समस्त कार्यवाही समाप्त कर दी गई।

कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड देखने से पता चलता है कि दोनों अध्यापकों ने स्पष्टीकरण दिया था लेकिन बिना कोई कारण बताए मनमाने तरीके से याची के स्पष्टीकरण को असंतोषजनक करार दे दिया गया जबकि दूसरे अध्यापक का स्पष्टीकरण स्वीकार कर लिया गया और उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई। यह गंभीर चिंता और स्पष्ट भेदभाव का मामला है। कोर्ट ने कहा कि दोनों के खिलाफ शिकायत होने के बावजूद सिर्फ एक के खिलाफ कार्रवाई की गई जबकि दूसरे के खिलाफ न तो कोई जांच हुई, न कोई कार्रवाई की गई। यह रवैया अधिकारियों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

कोर्ट ने कहा कि पहले भी ऐसे मामले आए हैं, जहां बीएसए ने किसी एक पर तो कार्रवाई की लेकिन उसी मामले में दूसरे पर कार्रवाई नहीं की। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की भेदभावपूर्ण कार्रवाई जांच प्रक्रिया की शुचिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करती है। इससे प्रशासनिक शक्ति के दुरुपयोग का पता चलता है। कोर्ट ने बीएसए इटावा को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का निर्देश दिया है।

Dinesh Rathour

लेखक के बारे में

Dinesh Rathour
दिनेश राठौर लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। कानपुर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। डिजिटल और प्रिंट जर्नलिज्म में 13 साल से अधिक का अनुभव है। लंबे समय तक प्रिन्ट में डेस्क पर रहे हैं। यूपी के कानपुर, बरेली, मुरादाबाद और राजस्थान के सीकर जिले में पत्रकारिता कर चुके हैं। भारतीय राजनीति के साथ सोशल और अन्य बीट पर काम करने का अनुभव। इसके साथ ही वायरल वीडियो पर बेहतर काम करने की समझ है। और पढ़ें
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