सुधीर सिंह से लेकर राजन तिवारी तक…हाईकोर्ट ने पुलिस से पूछा- बाहुबलियों के पास कौन-कौन से हथियार?
लाइसेंसी असलहों को लेकर हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन से चिह्नित माफिया और बाहुबलियों का विस्तृत ब्योरा तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि इन बाहुबलियों के पास कौन-कौन से लाइसेंसी हथियार हैं और उनके लाइसेंस की स्थिति क्या है।

UP News: लाइसेंसी असलहों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन से चिह्नित माफिया और बाहुबलियों का विस्तृत ब्योरा तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि इन बाहुबलियों के पास कौन-कौन से लाइसेंसी हथियार हैं और उनके लाइसेंस की स्थिति क्या है। हाईकोर्ट को जवाब देने के लिए पुलिस प्रशासन ने प्रदेशभर के बाहुबलियों और माफिया की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है।
सूची में गोरखपुर जोन के अलावा लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, नोएडा, मेरठ, बरेली और प्रयागराज जोन के बाहुबलियों-माफिया के नाम हैं। इनमें से गोरखपुर जोन के सात चर्चित माफिया और बाहुबली राजन तिवारी, विनोद उपाध्याय, संजीव उर्फ रामू द्विवेदी, सुधीर सिंह, राकेश यादव, रिजवान और देवेन्द्र सिंह के नाम शामिल हैं। विनोद उपाध्याय दो साल पहले एसटीएफ से मुठभेड़ में मारा जा चुका है, जबकि सुधीर सिंह और राकेश यादव को अवैध असलहा रखने के मामलों में अदालत से सजा मिल चुकी है। वर्तमान में सभी जमानत पर बाहर हैं।
सुधीर सिंह पर 38 मुकदमे दर्ज
पिपरौली के पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुधीर कुमार सिंह पर गोरखपुर जोन में हत्या, हत्या के प्रयास समेत 38 मुकदमे दर्ज हैं। वह 2022 विधानसभा चुनाव में सहजनवा सीट से बसपा प्रत्याशी भी रहा था। सुधीर सिंह पर चार बार गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई हो चुकी है। पहली कार्रवाई 2009 में शाहपुर थाने से, दूसरी 2010 में शाहपुर से, तीसरी 2011 में कैंट थाने से और चौथी 2017 में कैंट थाने से हुई थी। गैंगस्टर एक्ट के तहत उसकी करोड़ों रुपये की संपत्ति भी जब्त की जा चुकी है।
राजन तिवारी पर यूपी और बिहार में आपराधिक मुकदमे
गगहा क्षेत्र के सोहगौरा गांव निवासी राजन तिवारी पर यूपी और बिहार में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। गोरखपुर जोन में उस पर 11 मुकदमे हैं। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले की गोविंदगंज विधानसभा सीट से वह विधायक भी रह चुका है। 80 के दशक के कुख्यात माफिया डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला के संपर्क में आने के बाद राजन तिवारी का नाम कई बड़े अपराधों में सामने आया। माफिया सूची में शामिल होने के बाद पुलिस ने उसे गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में गिरफ्तार किया था।
राकेश यादव को हो चुकी पांच साल कारावास की सजा
राकेश यादव को अवैध रायफल और कारतूस रखने के मामले में सीजेएम कोर्ट गोरखपुर ने पांच साल के कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया था। 16 दिसंबर 2019 को चेकिंग के दौरान उसके पास से फैक्ट्री मेड .315 बोर की एक अवैध रायफल और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। अदालत ने उसे आयुध अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी।
42 से अधिक केस दर्ज
गुलरिहा क्षेत्र के झुंगिया बाजार निवासी राकेश यादव पर 42 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। हालांकि, अधिकांश मामलों में वह बरी हो चुका है। वर्ष 2019 में चिलुआताल थाने में दर्ज हत्या के प्रयास और साजिश के मुकदमे में जमानत मिलने के बाद उसने कोर्ट में सरेंडर किया था और तब से जेल में है। राकेश यादव पर भी गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई हुई थी। जीडीए ने उसका मकान ध्वस्त किया और जेल में रहने के दौरान उसे कई मामलों में सजा भी मिली।
रिजवान जहीर पर 17 केस
बलरामपुर जिले के तुलसीपुर थाना क्षेत्र निवासी रिजवान जहीर पर 17 केस दर्ज हैं। पांच मामलों में गैंगस्टर के तहत 25 करोड़ से ज्यादा की सम्पत्ति जब्त की जा चुकी है, जबकि आठ करोड़ से ज्यादा की सम्पत्ति ध्वस्त की गई है।
रामफल सिंह पर 59 केस
बहराइच जिले के पयागपुर थाना क्षेत्र के महापुरवा निवासी गब्बर सिंह उर्फ देवेन्द्र सिंह पुत्र रामपाल उर्फ रामफल सिंह पर सर्वाधिक 59 केस दर्ज हैं। पांच मामलों में गैंगस्टर की कार्रवाई करते हुए 100 करोड़ से ज्यादा की सम्पत्ति जब्त की गई है।
रामू का नाम भी लिस्ट में शामिल
पूर्व एमएलसी और बसपा नेता संजीव उर्फ रामू द्विवेदी पर देवरिया और लखनऊ में मुकदमे दर्ज हुए थे। पुलिस मुख्यालय ने निगरानी के लिए डोजियर भी तैयार कराया है। देवरिया कोतवाली में उसके खिलाफ दो मुकदमे दर्ज हुए थे, जबकि अन्य मामले लखनऊ में दर्ज बताए जा रहे हैं। देवरिया कोतवाली में दर्ज दोनों केस दाखिल दफ्तर हो चुका है। वर्तमान में कोई केस लम्बित नहीं है। शासन स्तर से बनाई गई माफियाओं की सूची में नाम शामिल होने के वजह से रामू का इस लिस्ट में नाम है।
विनोद उपाध्याय पर दर्ज थे 31 मुकदमे
गोरखपुर के चर्चित अपराधी विनोद उपाध्याय पर रंगदारी, वसूली और हत्या के प्रयास समेत 31 मुकदमे दर्ज थे। 5 जनवरी 2024 को एसटीएफ ने उसे अयोध्या में मुठभेड़ में मार गिराया था। मुठभेड़ से पहले एडीजी गोरखपुर ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। गुलरिहा इलाके में स्थित उसकी कई संपत्तियों पर कार्रवाई हुई थी। जीडीए ने उसका मकान ध्वस्त किया था और करोड़ों की संपत्ति जब्त की गई थी।
सुधीर सिंह को मिली थी दो साल कारावास की सजा
सुधीर सिंह को गैर लाइसेंसी असलहा रखने के मामले में दो साल की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया था। मामला 8 अक्तूबर 2011 का था, जब रेलवे स्टेशन रोड पर चेकिंग के दौरान पुलिस ने उसकी स्कॉर्पियो से 12 बोर की बंदूक बरामद की थी। सुधीर ने बंदूक का लाइसेंस अपने ससुर नरसिंह के नाम बताया था। पुलिस ने दोनों के खिलाफ आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज किया था। कोर्ट ने नरसिंह को भी शस्त्र अधिनियम के उल्लंघन में तीन महीने की सजा सुनाई थी।


