अब कोटेदार भी बनाएंगे आयुष्मान गोल्डन कार्ड, लोगों को चक्कर काटने से मिलेगी राहत
अब कोटेदार भी आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनाएंगे। लोगों को अस्पताल या कार्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे। घर के निकट कोटेदार भी आयुष्मान कार्ड बना सकेंगे। इसके लिए कोटेदारों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

अब आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए लोगों को अस्पताल या कार्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे। घर के निकट कोटेदार भी आयुष्मान कार्ड बना सकेंगे। इसके लिए कोटेदारों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रत्येक कार्ड बनाने के एवज में कोटेदारों को पांच रुपये दिए जाएंगे। कोटेदारों को आईडी पासवर्ड जारी किया जा रहा है। कोटेदार के आयुष्मान कार्ड बनाने से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड बनाने में एएनएम, आशा बहू, पंचायत सहायक के साथ कोटेदार भी सहयोगी होंगे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोटेदारों को आईडी जारी किए जाने के लिए जिला पूर्ति अधिकारी की तरफ से सभी कोटेदारों का विवरण उपलब्ध कराया जा चुका है। ताकि सभी कोटेदारों का आईडी पासवर्ड जारी किए जा सके।
आईडी पासवर्ड जारी किए जाने के बाद कोटेदार बनाना शुरू करेंगे कार्ड
राशन कार्ड में छह या उससे अधिक सदस्य और 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों का आयुष्मान कार्ड बनाएं जाएंगे। पात्र परिवारों को पांच लाख रुपये तक सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त इलाज मुहैया कराया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की तरफ आईडी पासवर्ड जारी किए जाने के बाद कोटेदार आयुष्मान कार्ड बनाने का कार्य शुरू कर सकेंगे। नोडल अफसर डॉ. विनय मिश्रा ने बताया कि आयुष्मान योजना में जो नए पात्र जुड़े हैं या जिनका किसी कारणवश आयुष्मान कार्ड नहीं बन सका है। उनकी सूची कोटेदारों को मुहैया कराई जा रही है। जिसकी मदद से वे अपने क्षेत्र के लाभार्थी से संपर्क कर उनका कार्ड बना सकेंगे।
लेखक के बारे में
Deep Pandeyदीप नरायन पांडेय लाइव हिन्दुस्तान में पिछले आठ सालों से यूपी टीम में हैं। दीप का डिजिटल, टीवी और प्रिंट जर्नलिज्म में 15 साल से अधिक का अनुभव है। यूपी के लखनऊ और वाराणसी समेत कई जिलों में पत्रकारिता कर चुके हैं। यूपी की राजनीति के साथ क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ है। सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और हेल्थ पर भी लिखने का शौक है। मास कम्युनिकेशन में बीए और एमए हैं। सरल भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाते हैं। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने-लिखने में भी रुचि रखते हैं।
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