अब गंगा एक्सप्रेसवे पर धंसी पुलिया, सड़क पर बना गड्ढा, अधिकारियों ने बैरियर लगाकर एक लेन किया बंद
यूपी में नए नवेले लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर दर्जनों गड्ढों के बाद अब गंगा एक्सप्रेसवे पर गड्ढा हो गया है। पुलिया धंसने के कारण यह हुआ है। पुलिस ने बैरियर लगाकर एक लेन पर ट्रैफिक रोक दिया है।

यूपी में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के बाद अब गंगा एक्सप्रेसवे पर गड्ढा हो गया है। अमरोहा में गारवपुर गांव के पास पुलिया धंसने से सड़क पर गड्ढा बना है। वाहन चालकों की सूचना पर यूपीडा के अफसर मौके पर पहुंचे और एहतियातन संबंधित लेन को बंद कराकर मरम्मत शुरू करा दी। पुलिया और सड़क की मरम्मत के बाद डामर भी डाल दिया गया, लेकिन रविवार शाम तक लेन पर वाहनों का आवागमन शुरू नहीं किया गया था। नई बनी सड़क पर बैरियर लगाकर वाहनों को रोका गया है। मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का शुभारंभ 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।
स्थानीय तहसील क्षेत्र के 28 गांवों से होकर गुजर रहे एक्सप्रेसवे की जिले में लंबाई 23.60 किलोमीटर है। शुक्रवार शाम गारवपुर गांव के पास पुलिया के धंसने से एक्सप्रेसवे पर गड्ढा बन गया। वाहन चालकों ने इसकी सूचना मंगरौला टोल प्लाजा पर दी। वहां से यूपीडा के अफसरों को जानकारी दी गई।
सूचना मिलते ही यूपीडा के अफसर जेसीबी लेकर मौके पर पहुंचे और संबंधित लेन को बंद करा दिया। इसके बाद क्षतिग्रस्त पुलिया और सड़क की मरम्मत शुरू कराई गई। आसपास के गांवों के लोगों ने एक्सप्रेसवे पर पहुंचकर स्थिति जानने की कोशिश की, लेकिन उन्हें वहां जाने से रोक दिया गया। मरम्मत के बाद सड़क पर दोबारा डामर डाल दिया गया। हालांकि, रविवार शाम तक संबंधित लेन पर यातायात शुरू नहीं किया गया था।
यूपीडा के एक्सईएन राकेश कुमार मोगा ने बताया कि पुलिया मामूली रूप से धंस गई थी। खामी को दुरुस्त करा दिया गया है। लेन को जल्द चालू किया जाएगा। उनके मुताबिक, इससे यातायात प्रभावित नहीं हुआ है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे पर फिर दो जगह सड़क धंसी
उधर, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे की चमक पर निर्माण की खामियां भारी पड़ रही हैं। दो दिन की हल्की बारिश में ही एक्सप्रेस-वे पर दो स्थानों पर सड़क धंस गई। रविवार को 59 किलोमीटर पर करीब 50 मीटर सड़क बैठ गई। जबकि शनिवार को 62 किलोमीटर पर धंसी सड़क के करीब 70 हिस्से को उखाड़कर दोबारा बनाने का काम चल रहा है। बारिश से मरम्मत कार्य कई बार रोकना पड़ा।
रविवार को 59 किलोमीटर पर सड़क धंसने की सूचना मिलते ही पीएनसी के अधिकारी मौके पर पहुंचे। निरीक्षण के बाद प्रभावित हिस्से में बेरिकेडिंग कराई गई। डामर उखाड़कर करीब 30 मीटर हिस्से को दोबारा बनाने का काम शुरू किया गया। 62 किलोमीटर पर भी बारिश से काम प्रभावित रहा। यहां रविवार को नए सिरे से बनाने के लिए करीब 70 मीटर सड़क उखाड़ने का काम कई बार रोकना पड़ा।
उद्घाटन के तीन सप्ताह में ही मशीनों के बीच सफर
13 जुलाई को यातायात के लिए खोले गए करीब 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस वे पर रफ्तार और सुगम सफर का वादा किया गया था, लेकिन उद्घाटन के कुछ ही सप्ताह बाद यात्रियों को रोड रोलर, खुदाई मशीनों, बेरिकेडिंग और सड़क उखाड़कर दोबारा बनाने के काम के बीच से गुजरना पड़ रहा है। शनिवार और रविवार को मरम्मत का सिलसिला जारी रहा।
हल्की बारिश में साइड लेन में भरा पानी
28.9 और 31.2 किलोमीटर पर जलभराव की समस्या भी सामने आई। हल्की बारिश में ही साइड लेन पानी से लबालब दिखाई दी। कई जगह क्रैश बैरियर ने नालियों को बाधित कर दिया, जिससे पानी की निकासी प्रभावित हुई। 59 और 62 किलोमीटर पर खोदी गई सड़क में बारिश का पानी जमा दिखाई दिया। जानकारों के मुताबिक पानी की निकासी ठीक नहीं होने पर सड़क के किनारे की पट्टियां प्रभावित हो सकती हैं। पानी नीचे पहुंचने से मिट्टी कमजोर होने और इसका असर डामर की ऊपरी सतह पर पड़ने की आशंका रहती है।
किनारों की मिट्टी भी दे रही खतरे का संकेत
एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में मिट्टी के ढलान कटे हुए मिले। बारिश के कारण मिट्टी बहने से किनारों की संरचना को दोबारा भरने की जरूरत पड़ रही है। यानी समस्या सिर्फ डामर की सतह तक सीमित नहीं है, बल्कि जल निकासी, सड़क के किनारे और मिट्टी की मजबूती से भी जुड़ी दिखाई दे रही है।
गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवाल
करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे पर उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सड़क धंसने और सतह खराब होने की घटनाओं ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं। इससे पहले भी सड़क के अलग-अलग हिस्सों में धंसाव, सीपेज और अन्य खामियां सामने आ चुकी हैं। एनएचएआई ने खराब हिस्सों की मरम्मत और पुनर्निर्माण को लेकर सख्ती दिखाई है। लेकिन, पीएनसी इन्फ्राटेक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं।


