मौत के सिरप सिंडिकेट पर और कसा शिकंजा, सरगना शुभम के खास अमित-दिवेश समेत 5 गिरफ्तार
बोगस फर्म खोलकर शुभम के पिता की फर्म शैली ट्रेडर्स से 25 लाख शीशी से अधिक कफ सिरप की खरीद कागजों पर की। इसके जरिये 40 करोड़ रुपये का हवाला कारोबार किया। इसमें से 8 करोड़ का लाभ अमित, दिवेश, अंकुश, घनश्याम और अभिनव ने कमाए। कोतवाली में 15 नवंबर को केस दर्ज होने के बाद ही पांचों आरोपी फरार थे।

यूपी के कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी में सरगना शुभम जायसवाल के सिंडीकेट के प्रमुख तीन सदस्यों समेत पांच आरोपियों को मिर्जापुर के भोरसर लिंक रोड से गिरफ्तार किया गया है। डीसीपी काशी जोन गौरव बंसवाल ने कोतवाली परिसर स्थित कार्यालय में रविवार को इसकी जानकारी दी। आरोपियों में अमित जायसवाल, दिवेश जायसवाल, अंकुश सिंह पर 25-25 हजार का इनाम भी घोषित था। पांचों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी था। सभी नेपाल भागने के फिराक में थे।
गिरफ्तार आरोपियों में सोनिया के काजीपुरा खुर्द निवासी अमित जायसवाल, खोजवां निवासी दिवेश जायसवाल, अंकुश सिंह, घनश्याम मौर्या, भेलूपुर के नवाबगंज का अभिनव यादव हैं। आरोपियों ने बोगस फर्म खोलकर शुभम के पिता की फर्म शैली ट्रेडर्स से 25 लाख शीशी से अधिक कफ सिरप की खरीद कागजों पर की। इसके जरिये 40 करोड़ रुपये का हवाला कारोबार किया। इसमें से आठ करोड़ का लाभ अमित, दिवेश, अंकुश, घनश्याम और अभिनव ने कमाए। डीसीपी ने बताया कि कोतवाली में 15 नवंबर को केस दर्ज होने के बाद ही पांचों आरोपी फरार थे। इस दौरान एसीपी विजय प्रताप सिंह भी मौजूद थे।
दो दिनों बाद होनी थी जमानत पर सुनवाई, उससे पहले धरा गया दिवेश
दिवेश जायसवाल ने अधिवक्ता के जरिये इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत की अर्जी दी है। इस पर दो दिन बाद सुनवाई होनी थी। दिवेश ने सोचा था कि अगर हाईकोर्ट से जमानत मिल जाती है तो वह प्रयागराज या फिर वाराणसी में रुककर शुभम के सहयोग के लिए काम करेगा।
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद सभी हिमाचल प्रदेश चले गए थे। वहां इधर-उधर छिपकर रह रहे थे। मंदिरों में दर्शन-पूजन के साथ ही ठिकाना बदलते रहे। मीडिया तथा अपने लोगों के माध्यम से वाराणसी में चल रही पुलिसिया गतिविधि की जानकारी लेते रहे। हिमाचल प्रदेश के बाद सभी मध्यप्रदेश पहुंचे थे। वहीं से मिर्जापुर में पहुंचे थे। यहां भोरसर लिंक रोड के पास सभी जमा थे। यहां कुछ दिन रुककर नेपाल भागने के फिराक में थे।
नेपाली, थाई मुद्रा समेत दिरहम बरामद
पांचों आरोपी नेपाल, थाईलैंड भागने के फिराक में थे। वहां से ये दुबई निकल जाते। इनके पास से 1300 नेपाली मुद्रा (भारतीय मुद्रा में₹ 812 रुपये), 18890 थाइलैंड मुद्रा (भारतीय मुद्रा में ₹54020 रुपये), 5 दिरहम यूनाइटेड अरब अमीरात की मुद्रा (भारतीय मुद्रा में 123 रुपये) थे। ये आरोपी एक्सचेंज के जरिये विदेशी मुद्रा जुटा रहे थे, ताकि विदेश भागने में सहायता मिले।
गिरफ्तार आरोपियों के फर्म और कारोबार
अमित जायसवाल की फर्म श्री हरि फार्मा ऐंड सर्जिकल एजेंसी है, इसके जरिये शैली ट्रेडर्स से 6.41 लाख शीशी कफ सिरप की अवैध खरीद हुई। दिवेश जायसवाल की फर्म का नाम डीएसए फार्मा है, इसके जरिये 5.97 लाख शीशी, अभिनव यादव की खाटू फार्मा से 2.26 लाख शीशी, घनश्याम मौर्य की श्रीराम फार्मा से 3.09 लाख शीशी, अंकुश सिंह के महाकाल मेडिकल स्टोर से 5.21 लाख शीशी की अवैध खरीद-फरोख्त हुई।
सिरप पकड़ी गई तो शुभम बोला, फर्जी ई-वे बिल बनवा दो
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि कुछ माल बांग्लादेश सीमा पर पश्चिम बंगाल, बिहार एवं त्रिपुरा में पकड़ा गया था। इसके संबंध में शुभम समेत अन्य सभी को नोटिस मिला था। इस पर शुभम जायसवाल ने कहा था कि फर्जी ई वे बिल बनाकर नोटिस का जवाब भेज दो, बाकी वह देख लेगा।
केबीएन प्लाजा में मीटिंग करते थे
महमूरगंज स्थित शुभम जायसवाल के केबीएन प्लाजा में सभी आरोपी मीटिंग करते थे। यहीं पर तय होता था कि न्यू फैन्सिडिल कफ सिरप की तस्करी कैसे की जानी है। पैसा आदि कैसे बैंक में जमा कराना है, फर्म वालों को नगद किस तरह देना है। बैठक में शुभम जायसवाल, प्रशान्त उपाध्याय, अमित सिंह ‘टाटा’, विकास सिंह नरवे, मनोज यादव उर्फ सिंडीकेट, प्रतीक कुमार गुजराती, धर्मेन्द्र अग्रवाल, आकाश पाठक, प्रतीक कुमार आदि भी शामिल रहते थे।
नगद और आरटीजीएस से जमा कराते थे रुपये
आरोपियों ने बताया कि सिंडीकेट में शामिल फर्मों पर माल बहुत कम आता है। शेष माल की तस्करी होती थी। दिवेश, अमित, अंकुश आदि की ओर से लोगों के नाम से बोगस फर्म खुलवाए गए। शुभम जायसवाल और प्रशान्त उपाध्याय उन फर्मों में दिनेश यादव, आशीष यादव, स्वप्निल केसरी और अन्य लोग के जरिए नगद और आरटीजीएस के माध्यम से पैसा जमा कराते थे। जो ऑनलाइन ट्राजेक्शन के माध्यम से अन्य फर्मों में होते हुए शुभम जायसावल के खाते में पहुंच जाते।
लेखक के बारे में
Ajay Singhअजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।
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