यूपी की इस फरार महिला बीएसए और क्लर्क पर कसा शिकंजा, खास प्रधान सहायक भी रडार पर

Mar 09, 2026 07:08 am ISTAjay Singh वरिष्ठ संवाददाता, गोरखपुर
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पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें सस्पेंड BSA शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह की तलाश में चार जिलों में लगातार दबिश दे रही हैं। शिक्षक सुसाइड केस में दोनों पर नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग और लगातार उत्पीड़न करने के आरोप लगे हैं। पुलिस संजीव सिंह के करीबियों से पूछताछ कर रही है।

यूपी की इस फरार महिला बीएसए और क्लर्क पर कसा शिकंजा, खास प्रधान सहायक भी रडार पर

UP News: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के गुलरिहा में रहने के दौरान शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी प्रकरण में देवरिया की फरार बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और क्लर्क संजीत सिंह पर शिकंजा कसता जा रहा है। पुलिस, फरार क्लर्क के चचेरे भाई और साले को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस उनकी मदद से फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है। खबर है कि फरार बीएसए औ लिपिक स्टे को हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। सोमवार को सुनवाई की तारीख पड़ी है। उधर, इस मामले में निलंबित हुआ देवरिया बीएसए ऑफिस का प्रधान सहायक भी जांच टीमों के रडार पर है। बताया जा रहा है कि निलंबित प्रधान सहायक बीएसए के खास लोगों में शामिल रहा है।

गुलरिहा पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह की तलाश में चार जिलों में लगातार दबिश दे रही हैं। सुसाइड नोट में दोनों पर नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग और लगातार उत्पीड़न करने के गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फरार चल रहे संजीव सिंह के ठिकानों के बारे में चचेरे भाई और साले से जानकारी जुटाई जा रही है।

इससे पहले पुलिस ने बीएसए शालिनी व लिपिक संजीव के परिजनों से भी पूछताछ की थी, लेकिन तब कोई ठोस सुराग नहीं मिला था। मुख्य आरोपित लिपिक संजीव सिंह मूल रूप से बलिया जिले का रहने वाला है और देवरिया में भी मकान बनवा लिया है। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव भी बलिया जिले की निवासी हैं। पुलिस की 4 टीमें बलिया, देवरिया, लखनऊ व प्रयागराज में छापेमारी कर रही हैं।

बीएसए का खास

निलंबित हुआ प्रधान सहायक तनुज श्रीवास्तव विधिक कार्यों में काफी माहिर रहा है। कोर्ट से जुड़े कामों की अधिक जानकारी होने के कारण वह कार्यालय में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव के सबसे खास लोगों में एक रहा है। चर्चा है कि पटल पर संजीव सिंह के रहने के बाद भी कई जटिल प्रकरणों को तनुज द्वारा ही देखा जा रहा था।

शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने क्यों की आत्महत्या?

देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 2011 में चार तो 2016 में तीन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। 9 जुलाई 2021 को एसटीएफ गोरखपुर ने तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी समेत 17 लोगों के विरुद्ध सदर कोतवाली में केस दर्ज कराया। जांच की आंच बीएसए कार्यालय तक पहुंची और 2016 में मदरसन में जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी उनको भी बर्खास्त कर दिया गया। जिसमें कृष्ण मोहन सिंह भी शामिल थे। विद्यालय में तैनात शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह, ओंकार सिंह व अर्पणा के मुकदमे में फरवरी 2025 को हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को शिक्षकों का प्रकरण सुनकर निस्तारित करने का आदेश दिया था। लेकिन एक वर्ष बाद भी उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन बीएसए द्वारा नहीं किया गया।

16-16 लाख लेने का आरोप लगा लगाई फांसी

इस बीच कृष्ण मोहन सिंह ने तीनों शिक्षकों से 16-16 लाख रुपये लेने और बीएसए शालिनी श्रीवास्तव व लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए 20 फरवरी की रात को गोरखपुर के गुलरिहां क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में फांसी लगाकर जान दे दी। आत्महत्या से पूर्व कृष्ण मोहन ने सुसाइट नोट व वीडियो भी जारी किए थे। इस मामले में शिक्षक की पत्नी की तहरीर पर बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और एक अन्य के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। जिसके बाद शासन स्तर व जिला स्तर पर गठित समिति ने मामले की जांच की थी, जिसमें दोषी मिलीं बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को 27 फरवरी को निलंबित कर दिया गया था, जबकि लिपिक संजीव सिंह पहले ही निलंबित कर दिए गए थे। शासन स्तर की समिति द्वारा जांच में यह भी सामने आया कि लिपिक संजीव सिंह जिस पटल पर कार्यरत था, उस पटल की जिम्मेदारी उससे पहले प्रधान सहासक तनुज श्रीवास्तव के पास थी। उस दौरान तनुज ने फाइल को निस्तारण के लिए प्रस्तुत नहीं किया, उसने इसमें लापरवाही बरती थी। जांच में तनुज की लापरवाही सामने आने पर रविवार की शाम को बेसिक शिक्षा सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने निलंबित कर दिया। तनुज के विरूद्ध कार्रवाई होने के बाद चर्चाओं का बाजार फिर से तेज हो गया।

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अजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।

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