नोएडा में रची गई थी खतरनाक साजिश, पकड़े गए 66 में से 45 की जांच में चौंकाने वाला खुलासा
नोएडा में श्रमिक आंदोलन की आड़ में औद्योगिक शांति भंग करने की एक बड़ी साजिश का यूपी पुलिस और एसटीएफ ने पर्दाफाश किया है। जांच में खुलासा हुआ कि गिरफ्तार किए गए 66 लोगों में से 45 वास्तविक श्रमिक नहीं थे।

उत्तर प्रदेश के नोएडा में श्रमिक आंदोलन की आड़ में अराजकता फैलाने की साजिश को योगी सरकार ने कुछ ही घंटों में सख्ती और सूझबूझ के साथ नाकाम कर दिया। एसटीएफ और पुलिस की जांच में यह मामला श्रमिक असंतोष का नहीं, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें कुछ संदिग्ध राजनीतिक विचारधारा के दलों की भूमिका सामने आई है। उच्च स्तरीय सूत्रों के मुताबिक, जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कुल 66 गिरफ्तारियों में से 45 लोग ऐसे हैं, जो वास्तविक श्रमिक नहीं थे। आगजनी की घटना में चिन्हित 17 में से 11 को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 8 गैर-श्रमिक हैं।
वहीं भड़काने के आरोप में 32 लोगों की पहचान हुई, जिनमें से 19 को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 34 ऐसे लोगों को भी पकड़ा गया है, जो श्रमिक नहीं होते हुए भी कथित आंदोलन में शामिल होकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे थे। साजिश रचने के आरोप में 4 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है, जिनके कथित तौर पर कुछ संगठित नेटवर्क से जुड़े होने की बात सामने आई है। अब तक गिरफ्तार हुए लोग संदिग्ध विचारधारा वाले राजनीतिक संगठनों से जुड़े बताए जा रहे हैं।
उच्च स्तरीय सूत्रों ने बताया कि नोएडा के आर्थिक ढांचे को बर्बाद करने की एक घिनौनी, सुनियोजित और बड़े पैमाने की साजिश रची गई थी, जिसमें कुछ राजनीतिक दलों का पूरा इकोसिस्टम खुलकर शामिल था। ये पार्टियां मिलकर यूपी की प्रगति को कुचलने और नोएडा जैसे आर्थिक हब को आग में झोंकने की कुटिल चाल चल रही थीं।
सूत्रों ने बताया कि आंदोलन के झूठे मुखौटे के पीछे छिपे चार दर्जन से ज्यादा यादव और मुस्लिम व्यक्ति पकड़े गए हैं, जो कुछ राजनीतिक दलों के एजेंडे के तहत अराजकता फैलाने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पूरे इलाके को आर्थिक रूप से लूटने की तैयारी में थे। ये तत्व न सिर्फ नोएडा की विकास यात्रा को रोकना चाहते थे, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी से उतारकर सत्ता के खेल में अपना स्वार्थ साधना चाहते थे।
उच्चस्तरीय सूत्रों ने बताया कि इतना ही नहीं, बंगाल, बिहार, यूपी समेत देश के अलग-अलग कोनों से आईं कुछ महिलाएं भी इस साजिश में सक्रिय रूप से शामिल पाई गई हैं, जिनकी भूमिका बेहद संदिग्ध और खतरनाक है। ये हिंसक प्रदर्शन में शामिल लोगों की मदद कर रही थीं। इनका मकसद अराजकता भड़का कर नोएडा को आग के हवाले कर देना था। यह पूरा खेल न सिर्फ एक राजनीतिक साजिश था, बल्कि देश की आर्थिक रीढ़ को तोड़ने का देशद्रोही षड्यंत्र था, जिसे पुलिस ने समय रहते नाकाम कर दिया।
संदिग्ध सोशल मीडिया हैंडल्स की भूमिका
उच्च स्तरीय सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम में कुछ संदिग्ध सोशल मीडिया हैंडल्स और बाहरी राज्यों से आए तत्वों की भी भूमिका जांच के दायरे में है। सोशल मीडिया पर इस पूरे मामले को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत कर माहौल को भड़काने का प्रयास किया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रित किया। श्रमिकों के हित में वेतन वृद्धि की घोषणा के बाद मजदूरों और फैक्ट्री मालिकों ने सहयोग किया, जिसके परिणामस्वरूप नोएडा में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से सामान्य हो गई हैं और तमाम फैक्ट्रियों में कामकाज सामान्य तरीके से संचालित हो रहा है।
सरकार की त्वरित कार्रवाई का असर यह रहा कि जहां अन्य राज्यों में ऐसे विवादों के कारण उद्योग प्रभावित हुए हैं, वहीं उत्तर प्रदेश में स्थिति शीघ्र सामान्य हो गई। योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि राज्य सरकार न केवल श्रमिकों के हितों के प्रति संवेदनशील है, बल्कि औद्योगिक माहौल को बिगाड़ने वाली किसी भी साजिश को विफल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।


