न डीजे, न डांस; बैलगाड़ी में विदा होकर ससुराल पहुंची दुल्हन, हमीरपुर में पुराने दौर वाली शादी
हमीरपुर के मुस्करा कस्बे में सजी-धजी बैलगाड़ियों के साथ निकली अनोखी बारात चर्चा का विषय बन गई। किसान मंगल सिंह यादव के बेटे की शादी में दूल्हा-दुल्हन बैलगाड़ी से पहुंचे और दुल्हन की विदाई भी उसी से हुई। करीब पांच किलोमीटर तक निकली इस पारंपरिक बारात को देखने के लिए लोग रास्ते में रुकते रहे।

हमीरपुर जिले के मुस्करा कस्बे में शनिवार रात एक अनोखी बारात लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। आधुनिक दौर में जहां ज्यादातर शादियों में लग्जरी कारों और बैंड-बाजे का इस्तेमाल होता है, वहीं इस शादी में पारंपरिक अंदाज देखने को मिला। सजी-धजी बैलगाड़ियों के साथ निकली बारात को देखने के लिए लोग रास्ते में रुकते नजर आए। इतना ही नहीं, रविवार सुबह दुल्हन की विदाई भी बैलगाड़ी से ही कराई गई, जिसने पूरे आयोजन को खास बना दिया।
चर्चा में हमीरपुर की शादी
मुस्करा क्षेत्र की ग्राम पंचायत शिवनी डेरा निवासी मंगल सिंह यादव पेशे से किसान हैं। उनके पुत्र बालेंद्र कुमार का विवाह सरीला तहसील के पहरा गांव निवासी राजू की पुत्री पूनम के साथ तय हुआ था। शनिवार की रात दोनों का विवाह पूरे रीति-रिवाज और पारंपरिक रस्मों के साथ संपन्न हुआ। हालांकि इस शादी की सबसे खास बात बारात का अनोखा अंदाज रहा, जिसने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
सजी-धजी बैलगाड़ियों से आई बारात
जब बारात मुस्करा कस्बे के आरआर गार्डन पहुंची तो वहां सजी-धजी बैलगाड़ियों की कतार देखकर लोग हैरान रह गए। बैलगाड़ियों को विशेष रूप से सजाया गया था। बैलों को लाल रंग के झूल पहनाए गए थे और बैलगाड़ी के ऊपर छाता लगाया गया था। बैलों के गले में बंधी घंटियों की मधुर आवाज़ और उनकी झूमती चाल ने माहौल को और भी आकर्षक बना दिया। बारात के गार्डन पहुंचते ही आसपास के लोग, रिश्तेदार और राहगीर इस अनोखी बारात को देखने के लिए रुक गए।
कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन से फोटो और वीडियो भी बनाए। खासकर बुजुर्गों ने इस दृश्य को देखकर पुराने समय की पारंपरिक बारातों को याद किया। उनका कहना था कि पहले गांवों में इसी तरह बैलगाड़ियों से बारातें जाया करती थीं और यह दृश्य उन्हें पुराने दिनों की याद दिला रहा है।
बैलगाड़ी में ससुराल पहुंची दुल्हन
रात में विवाह की सभी रस्में पूरे उत्साह के साथ संपन्न हुईं। इसके बाद रविवार सुबह दुल्हन की विदाई का दृश्य भी बेहद खास रहा। नवविवाहित दुल्हन जब सजी हुई बैलगाड़ी पर बैठकर ससुराल के लिए रवाना हुई तो वहां मौजूद लोगों के लिए यह पल यादगार बन गया। बारात की व्यवस्था भी अलग अंदाज में की गई थी।दूल्हा-दुल्हन सजी हुई बैलगाड़ी में बैठे थे। उनके पीछे अन्य बारातियों की बैलगाड़ियां और सबसे अंत में चारपहिया वाहन चल रहे थे।
5 किमी निकली बारात
कार्यक्रम स्थल से करीब पांच किलोमीटर दूर शिवनी डेरा तक यह अनोखी बारात निकाली गई। रास्ते में लोग रुक-रुक कर इस पारंपरिक बारात को देखते रहे और फोटो-वीडियो बनाते रहे। बैलगाड़ियों से निकली इस अनोखी बारात ने पूरे क्षेत्र में लोगों का ध्यान खींचा और ग्रामीण परंपराओं की झलक भी दिखाई।


