अपर्णा यादव समर्थकों पर KGMU बवाल में एक्शन नहीं, मेडिकल स्टाफ में आक्रोश
केजीएमयू बवाल को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन और पुलिस के बीच खींचतान बढ़ती दिख रही है। ताजा विवाद राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई न होने को लेकर है, जिससे मेडिकल स्टाफ में भारी नाराजगी है।

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में यौन शोषण और धर्मांतरण के आरोपी डॉक्टर रमीज के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। एक तरफ जहां जांच एजेंसियां रमीज के अंतरराष्ट्रीय और अंतर्राज्यीय संपर्कों को खंगाल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ केजीएमयू प्रशासन और पुलिस के बीच खींचतान बढ़ती दिख रही है। ताजा विवाद राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई न होने को लेकर है, जिससे मेडिकल स्टाफ में भारी नाराजगी है।
चीफ प्रॉक्टर की तहरीर पर पुलिस की सुस्ती से नाराजगी
KGMU के चीफ प्रॉक्टर डॉक्टर आरएएस कुशवाहा ने पिछले दिनों हुए हंगामे के बाद चौक कोतवाली में अपर्णा यादव के समर्थकों के खिलाफ लिखित तहरीर दी थी। आरोप था कि समर्थकों ने परिसर में अमर्यादित व्यवहार किया और कार्य में बाधा डाली। हालांकि, कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अब तक कोई ठोस एक्शन नहीं लिया है। इस ढुलमुल रवैये से केजीएमयू के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ में गहरा रोष है। इस बाबत इंस्पेक्टर चौक नागेश उपाध्याय का कहना है कि मामला जांच के अधीन है और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी।
एजेंसियों की रडार पर रमीज का 'दायां हाथ'
केजीएमयू का एक सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर अब जांच एजेंसियों के मुख्य निशाने पर है। बताया जा रहा है कि यह रेजिडेंट डॉक्टर रमीज का सबसे करीबी था और उसी के इशारे पर काम करता था। जांच में खुलासा हुआ है कि रमीज के कहने पर ही उसने दो हिंदू महिला मेडिकल स्टाफ से नजदीकियां बढ़ाई थीं। जब रमीज पर मुकदमा दर्ज हुआ, तब उसने अपनी रणनीति बदलते हुए लड़कियों से दूरी बना ली। एजेंसियों ने दोनों महिला स्टाफ की काउंसिलिंग की है और उनसे रमीज व उसके करीबी के खिलाफ कई अहम राज उगलवाए हैं।
आगरा से बस्ती तक फैला नेटवर्क
पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब केवल केजीएमयू तक सीमित नहीं हैं। डॉक्टर रमीज से जुड़े उन लोगों का ब्योरा जुटाया जा रहा है जो आगरा और बस्ती मेडिकल कॉलेज में तैनात हैं। जांच इस दिशा में है कि क्या यह कोई संगठित सिंडिकेट था जो मेडिकल कॉलेजों में सक्रिय था। इसके अलावा, आगरा की महिला डॉक्टर का निकाह कराने वाले पीलीभीत के फरार काजी और गवाह की तलाश में पुलिस की दो टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
वायरल वीडियो और पुराने छात्र की कुंडली
सोशल मीडिया पर भाजपा नेता अभिजात मिश्रा द्वारा शेयर किए गए वीडियो ने भी विवाद खड़ा कर दिया है। 'ब्राउन हॉल' में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों के इकट्ठा होने और 'तकरीर' के दावों की वैज्ञानिक जांच शुरू हो गई है।
साथ ही, सुरक्षा एजेंसियां वर्ष 2006 बैच के अंडमान निकोबार निवासी एक पूर्व छात्र की सरगर्मी से तलाश कर रही हैं। वह छात्र 2010 तक केजीएमयू हॉस्टल में रहकर तकरीर करने और अपना समूह बनाने के लिए कुख्यात था। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या रमीज का संबंध उसी पुराने नेटवर्क से है।
प्रशासनिक रिपोर्ट की मांग
डीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने आश्वस्त किया है कि इलेक्ट्रॉनिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों का संकलन किया जा रहा है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, अपर्णा यादव के समर्थकों पर कार्रवाई न होना फिलहाल संस्थान के भीतर एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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