पिता की हत्या में बेटे ने दी गवाही, मां और उसके प्रेमी की बताई करतूत, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा
पिता की हत्या में नौ साल के बेटे ने मां के खिलाफ गवाही दी, जिसे महत्वपूर्ण मानते हुए एडीजे प्रथम प्रतिभा सक्सेना की अदालत ने दोषी मां व उसके प्रेमी ममेरे भाई को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

अलीगढ़ के इगलास क्षेत्र में 11 साल पहले संपत्ति व प्रेम प्रसंगों के लिए निर्मम तरीके से की गई एक व्यक्ति की हत्या के मामले में सोमवार को फैसला आ गया। पिता की हत्या में नौ साल के बेटे ने मां के खिलाफ गवाही दी, जिसे महत्वपूर्ण मानते हुए एडीजे प्रथम प्रतिभा सक्सेना की अदालत ने दोषी मां व उसके प्रेमी ममेरे भाई को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर 35-35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। एडीजीसी मेपे सिंह ने बताया कि मामले में बुलंदशहर के सिकंदराबाद क्षेत्र के गांव तालबपुर उर्फ कनकपुर निवासी सुरेश ने मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें कहा था कि 28 दिसंबर 2014 की सुबह उनके छोटे भाई रविंद्र उर्फ रबली की पत्नी लतेश के मामा का बेटा संदीप निवासी मोहल्ला शिवपुरी, इगलास आया था।
संदीप के कहने पर दोपहर करीब तीन बजे रविंद्र घर से एक लाख रुपये लेकर अपनी पत्नी व बच्चों के साथ इगलास के लिए निकल गया। तभी गांव के रेशमपाल भी पीछे चल दिया। चारों लोगों को चोला पुलिस चौकी से खुर्जा के लिए एक ही बस सवार होते हुए देखा गया था। 29 दिसंबर 2014 को लतेश दोनों बच्चों के साथ गांव लौट आई। रविंद्र के बारे में पूछा तो पत्नी ने कहा कि वह एक-दो दिन में आ जाएंगे। किसी काम से रुक गए है। एक जनवरी 2015 तक जब रविंद्र लौटकर नहीं आया तो उन्होंने गांव के रेशमपाल को ढूंढा। लेकिन, उसका भी कोई भी पता नहीं चला।
उन्होंने आशंका जताई कि रेशमपाल व संदीप ने लतेश के साथ मिलकर एक लाख रुपये छीनते हुए रविंद्र की हत्या कर दी है और शव को कहीं छिपा दिया है। शक के आधार पर पुलिस ने संदीप व लतेश को गिरफ्तार करके पूछताछ की तो दोनों ने जुर्म कबूल लिया। उनकी निशानदेही पर तीन दिसंबर 2014 की शाम को पुलिस ने इगलास में सब्जी मंडी के पीछे नाले में रविंद्र का शव बरामद किया। पुलिस ने लतेश व संदीप को गिरफ्तार करके जेल भेजा। दोनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी करार देते हुए फैसला सुनाया है।
भाई-बहन के रिश्ते को भी किया शर्मसार
इस घटना ने भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को भी शर्मसार कर दिया था। पूछताछ में लतेश ने बताया कि उसके संदीप से प्रेम संबंध थे, जो उसके मामा का बेटा है। इसके चलते दोनों ने रविंद्र को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। हत्या के बाद दोनों ने शव को बोरे में बंद करके छिपा दिया था। संदीप घटना के बाद से ही जेल में है। जबकि महिला को जमानत मिल गई थी। सोमवार को सजा होने के बाद उसे फिर से जेल भेज दिया गया।
गर्दन काटकर की थी हत्या
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाया गया कि धारदार हथियार से गर्दन काटकर रविंद्र की हत्या की गई थी। मुल्जिमों ने लोहे के गेंदारे (सरिया) से प्रहार किए थे। शरीर पर कई जगह चोट के निशान थे।
मम्मी ने पापा के शरीर में मारी ईंट
घटना के बाद रविंद्र के बच्चे ताऊ के पास रह रहे हैं। प्रकरण में कुल छह गवाह कराए गए, जिसमें रविंद्र के नौ साल के बेटे की गवाही महत्वपूर्ण साबित हुई। उसने गवाही में कहा कि वह बड़ी के साथ इगलास में मामा के पास किराये पर रहते थे। बगल में ही संदीप मामा झोंपड़ी में रहते थे। मेरे पापा को गेंदारा से मारा। संदीप के हाथ में गेंदारा था। मेरी मम्मी ने पूरे शरीर में ईंट मारी। संदीप ने ये भी कहा था कि चुप-चाप सो जा। तुम्हें भी मार देंगे। बाद में कुछ नकाबपोश आए और शव को ले गए।
पत्नी के नाम पर खरीदा था प्लॉट
रवेंद्र की शादी 14 साल पहले हुई थी। उसके चार बच्चे थे। पत्नी दोनों बच्चों को लेकर ननिहाल में किराए पर रहती थी। ससुराल कभी-कभार आती जाती थी। वादी सुरेश ने गवाही दी कि दोनों भाईयों के हिस्से में गांव में 33 बीघा जमीन थी। इसमें रवेंद्र की भूमि सरकारी अधिगृहण में चली गई, जिसके एवज में उसे 30 लाख रुपये मिले थे। कुछ जमीन और भी थी। वहीं, रुपयों से रविंद्र ने पत्नी के कहने पर उसके नाम पर इगलास में एक प्लाट खरीद लिया था। उसने गवाही दी कि लतेश के संदीप से संबंध थे। उन्हीं संबंधों व सुरेश को मिली रकम व जमीन हड़पने के लिए हत्या की गई। एडीजीसी मेपे सिंह ने बताया, जघन्य हत्याकांड में मजबूत तरीके से पैरवी की गई। इसमें मृतक के नौ साल के बेटे की गवाही महत्वपूर्ण साबित हुई। इस आधार पर महिला व उसके प्रेमी को सजा सुनाई गई है।

लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पिछले आठ सालों से काम कर रहे हैं। वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। कानपुर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। पत्रकारिता में 13 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश की डिजिटल मीडिया और प्रिंट जर्नलिज्म में अलग पहचान है। इससे पहले लंबे समय तक प्रिंट में डेस्क पर भी काम किया है। कुछ सालों तक ब्यूरो में भी रहे हैं। यूपी और राजस्थान के सीकर जिले में भी पत्रकारिता कर चुके हैं। यूपी की राजनीति के साथ सोशल, क्राइम की खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं। वायरल वीडियो की फैक्ट चेकिंग में दिनेश को महारत हासिल है।
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