
नई संसद की तरह यूपी में बनेगी नई विधानसभा, लखनऊ के इस इलाके की जमीन चिह्नित
संक्षेप: दिल्ली में नई संसद की तरह यूपी की राजधान लखनऊ में नई विधानसभा बनाई जाएगी। इसके लिए जमीन की तलाश पूरी हो गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही सीएम योगी इस पर मुहर लगा देंगे। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने जमीन का सर्वे का नापी करा ली है।
देश की राजधानी दिल्ली में नई संसद की तरह अब यूपी की राजधानी लखनऊ में नई विधानसभा बनाने की तैयारी हो रही है। इसके लिए स्थान भी अधिकारियों ने तलाश कर ली है। सरकार की निगाह गोमती नगर एक्सटेंशन में स्थित सहारा शहर की 245 एकड़ जमीन पर है। इसे सबसे उपयुक्त विकल्प माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जल्द इस संबंध में अंतिम निर्णय ले सकते हैं।

शासन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार ने सहारा समूह को लीज पर दिए गए सहारा शहर की भूमि का पूर्ण कब्ज़ा ले लिया है और इसे नए विधानसभा परिसर के लिए संभावित स्थल के रूप में गंभीरता से विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से लिया जाएगा।
सरकारी निर्देश पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने हाल ही में इस 245 एकड़ जमीन का विस्तृत सर्वेक्षण और माप पूरा कर लिया गया है। यह जमीन पहले सहारा इंडिया को लीज पर दी गई थी। एलडीए ने दस दिनों में पूरी प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। रिपोर्ट के अनुसार कुल भूमि में से 130 एकड़ लायसेंस समझौते के तहत 40 एकड़ हरित पट्टी के रूप में और 75 एकड़ हरित उपयोग के लिए चह्निति है।
अधिकारियों के मुताबिक यह भूमि स्थानिक दृष्टि से अत्यंत उपयुक्त है। यह मुख्यमंत्री आवास, गोमती नगर स्थित विधायकों के आवास परिसर और हज़रतगंज के प्रशासनिक केंद्र से लगभग समान दूरी पर स्थित है। यह क्षेत्र सीधे शहीद पथ और हजरतगंज से जुड़ा है। इसके साथ ही मेट्रो स्टेशन और एयरपोर्ट से महज 15-20 मिनट की दूरी पर है। माना जा रहा है कि यहां नया विधानसभा भवन बनने से सत्रों के दौरान यातायात का दबाव भी काफी कम होगा।
नई विधानसभा भवन की योजना को गति 2023 में नए संसद भवन के उद्घाटन के बाद मिली। इसके बाद राज्य सरकार ने अहमदाबाद स्थित एचसीपी डिज़ाइन, प्लानिंग एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड (जिसने नया संसद भवन तैयार किया था) को संभावित स्थलों के सुझाव के लिए नियुक्त किया था।
वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार ने इस परियोजना के लिए 50 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान भी किया था, लेकिन भूमि तय न होने के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका। शहर के बाहरी इलाकों में प्रस्तावित स्थलों को दूरी और प्रशासनिक असुविधा के कारण खारिज कर दिया गया था। नई इमारत की आवश्यकता मौजूदा विधान भवन में जगह की भारी कमी के कारण महसूस की जा रही है। सन् 1928 में बने मौजूदा विधान भवन उत्तर प्रदेश की स्थापत्य विरासत का अद्भुत नमूना है।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
और पढ़ें



