न दूल्हा न बारात, यूपी में दुल्हन बनी चार युवतियों ने की अनोखी शादी, किसे पहनाया वरमाला?
शादियां तो आपने बहुत देखी होंगी, लेकिन यूपी के झांसी में शादी लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गई। इस शादी में चार दुल्हन थीं, लेकिन दूल्हा नहीं था। चारों दुल्हन ने वरमाला भी डाली लेकिन बारात नहीं थी।

शादियां तो आपने बहुत देखी होंगी, लेकिन यूपी के झांसी में शादी लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गई। इस शादी में चार दुल्हन थीं, लेकिन दूल्हा नहीं था। चारों दुल्हन ने वरमाला भी डाली लेकिन बारात नहीं थी। इस अनोखी शादी को देखकर हर कोई हैरान रह गया। दरअसल प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के बैनर तले गांधीगंज मोहल्ला स्थित विश्व शांति भवन आश्रम में एक अनुष्ठान हुआ। जिसमें आश्रम में रह रही चार युवतियों हमेशा-हमेशा के लिए शिवजी की हो गईं। उन्होंने आजीवन सेवा का संकल्प लिया और भगवान भोलेनाथ से विवाह रचाया। दूल्हा बने शिवलिंग को वर-मालाएं पहनाई।
अनुष्ठान के बड़ी संख्या में लोग गवाह बने। मऊरानीपुर आश्रम से रेखा, वर्दानी दीदी शिवजी को समर्पित हुई। वहीं गुरसरांय आश्रम से कल्याणी भी शिवजी की हो गई। कल्याण 12वीं में गुरसरांय मे टॉप रही थीं। बरुआसागर से आरती ने भी शिवजी से विवाह रचाया। इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत शिव भोलेनाथ और शिव शक्तियों की शोभा यात्रा से की गई। शिवलिंग को दूल्हा बनाया गया। उनके सिर पर सेहरा सजाया गया। चारों ने शिव भोलेनाथ को वरमाला पहनकर उनके सात फेरे लेकर अपना जीवन समर्पित किया। सात फेरों के सात वचन लिए कि जीवन में सदा उनके ही बन के रहेगी।
हर एक बुराई से अपने आप को बचा कर रखेगी। बीके भगवान् भाईजी ने बताया कि समर्पित अर्थात तन-मन, श्वास संकल्प से समर्पित समर्पित है। अर्थात शिव भोलेनाथ जहां बैठाएं, खिलाएं। उसी हाल में खुश रहना होगा। इन लोगों ने पूरा जीवन उनको समर्पित किया है। इस दौरान भाजपा जिलाअध्यक्ष प्रदीप पटेल, राधा अग्रवाल महिला व्यापार अध्यक्ष, शिखा आर्य, प्रमोद चतुर्वेदी, मुकेश पटेल, कैप्टन मूलचंद बाबूजी, ग्यासी भाई, आलोक, दीपक सहित अन्य मौजूद रहे।
बोली, संचालिका
मऊरानीपुर केंद्र प्रभारी चित्रा दीदी ने कहा बहुत खुशी है कि चार बहनें विश्व सेवा के लिए समर्पित हुए हैं। उन्होंने कहा ये कन्याएं सदा आगे बढ़ें। खूब सेवा कर अपने भाग्य को श्रेष्ठ बनाएं। गुरसरांय केंद्र प्रभारी कविता दीदी ने चारों बहनो को बधाईया दीं। बरुआसागर केंद्र प्रभारी उमा दीदी ने कहा कि वह माता-पिता भी कितने भाग्य शाली हैं। जिन्होंने अपना दामाद जगत नियंता परमपिता परमात्मा को चुना है। नगर पालिका अध्यक्ष शशि श्रीवास ने कहा कि ये बहनें ही सच्ची देवियां हैं। जो जीवन जीने की कला सिखाती हैं। जीवन को खुशहाल बनाती हैं।
शुरू से थी गहरी आस्था
मऊरानीपुर, गुरसरांय, बरुआसागर स्थित प्रजापिता ब्रह्मकुमारी आश्रम से रेखा, वरदानी, कल्याणी और आरती शुरू से ही रहकर अध्यात्म सीख रही थीं। इन्होंने पढ़ाई की। रेखा को छोड़कर तीन ग्रेजुएट कर चुकी हैं। काफी समय से भगवान के प्रति गहरा आस्था जता रही थीं। अपना इच्छा केंद्र संचालिका को बताई। पिछले दिनों अनुष्ठान हुए। उसमें रीति-रिवाज से उनका विवाह कराया गया। मऊरानीपुर प्रजापिता ब्रह्मकमारी आश्रम की संचालक चित्रा बहन ने बताया कि चारों बेटियों ने भगवान शिव से शादी की है। इन बच्चियों में शुरू से शिवजी के प्रति गहरी आस्था थी।
पूरा जीवन शिव का समर्पित
मध्य प्रदेश के नौगांव की रहने वाली बीके रेखा ने बताया कि यह जीवन सफल हो गया है। स्वयं शादी परमपिता परमात्मा के साथ की है। यह निर्णय पवित्र जीवन जीने, सुख, शांति और प्रेम और सेवा भाव के लिए लिया गया है। अब पूरा जीवन उन्हीं को समर्पित रहेगा। एक जन्म भगवान के लिए कर देंगे। इससे पूरे जीवन का उद्धार होगा। माता-पिता का भी उद्धार होगा। माता-पिता की अनुमति से ही शिवजी को भी जीवन समर्पित किया है।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
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पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
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उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


