
शैक्षिक रिकॉर्ड में बदला जाए लिंग परिवर्तन कराने वाले का नाम और लिंग, हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में लिंग परिवर्तन कराने वाले के शैक्षिक अभिलेखों में उसका नाम और लिंग बदलने का आदेश दिया है। याची शरद रोशन सिंह की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में लिंग परिवर्तन कराने वाले के शैक्षिक अभिलेखों में उसका नाम और लिंग बदलने का आदेश दिया है। याची शरद रोशन सिंह की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने दिया है। कोर्ट ने यूपी बोर्ड के बरेली क्षेत्रीय कार्यालय के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें याची के दस्तावेजों में नाम और लिंग परिवर्तन करने से मना कर दिया गया था। कोर्ट ने इस आदेश को गैरकानूनी माना है।
याची को लिंग परिवर्तन सर्जरी (महिला से पुरुष) के बाद जिला मजिस्ट्रेट ने पहचान और जेंडर परिवर्तन प्रमाणपत्र जारी किया था। इसके बाद उन्होंने अपने शैक्षिक अभिलेखों में नाम और लिंग परिवर्तन के लिए क्षेत्रीय कार्यालय में आवेदन किया था। वहां से यह कहते हुए आवेदन निरस्त कर दिया गया कि देर से नाम सुधारने की कोई प्रक्रिया नहीं है और ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019 इस पर लागू नहीं होता। याची ने इसे याचिका में चुनौती दी थी।
याची के अधिवक्ता अश्वनी कुमार शर्मा एवं आकाश कुमार शर्मा का कहना था कि याची का उनके दस्तावेज में नाम न बदलना ट्रांसजेंडर अधिनियम का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारियों ने अधिनियम 2019 की धारा 20 की अवहेलना की है, जो विशेष कानून है और अन्य सभी कानूनों पर वरीयता रखता है। साथ ही अधिनियम के नियम 5(3) और उसके अनुलग्नक-1 के तहत ट्रांसजेंडर व्यक्ति को शैक्षिक प्रमाणपत्रों सहित सभी आधिकारिक दस्तावेजों में नाम, लिंग व फोटो बदलने का अधिकार प्राप्त है। कोर्ट ने जेन कौशिक बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले का हवाला देते हुए कहा कि सरकार की निष्क्रियता से ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के समानता, गरिमा और गैर-भेदभाव के संवैधानिक अधिकारों का हनन होता है। कोर्ट ने गत आठ अप्रैल के आदेश को रद्द करते हुए आठ सप्ताह के भीतर याची के शैक्षिक दस्तावेजों में आवश्यक संशोधन कर नए प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया है।





