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1 जून, 2020|5:19|IST

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मुजफ्फरनगर की सड़कों पर दिखाई देते हैं उत्तराखंड की ओर लौटते श्रमिक

मुजफ्फरनगर की सड़कों पर दिखाई देते हैं उत्तराखंड की ओर लौटते श्रमिक

कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए किए गए 21 दिन के लॉक डाउन लॉकडाउन होने के बाद से पलायन कर दूसरे राज्यों से अपने घर लौट रहे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड रहा है। वहीं मुजफ्फरनगर की सड़कों पर उत्तराखंड की ओर पैदल जाते हुए श्रमिकों के ग्रुप भी दिखाई दे जाते हैं। बड़ी संख्या में उत्तराखंड के श्रमिक यहां बसों व प्राइवेट वाहनों से भी पहुंचे।

सिर पर बोझ, मुंह पर मास्क, लगाकर मीलों का सफर तय करने के बाद घर वापस लौट रहे लोगों के चेहरे पर संक्रमण से ज्यादा भूख का भय देखने को मिला है।लॉकडाउन होने के बाद कामकाज बंद होने के बाद से दूसरे राज्यों में रहने वाले लोगों के सामने परिवार के लिए परेशानी बढ़ी तो वो अपने घरों की ओर दौड़ पड़े हैं। कोई साधन न होने पर सड़कों पर पैदल ही निकल पड़े। रास्ते में वाहन दिखते ही कुछ उम्मीद जगती है लेकिन जब वो नहीं रोकता है तो फिर मायूस हो जाते है। मुजफ्फरनगर में शनिवार की देर सायं से रविवार की शाम तक लगातार उत्तराखंड की ओर जाने वाले देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, जिलों के साथ ही बिजनौर रोड की ओर पौड़ी व कोटद्वार के श्रमिकों का आवागमन बना रहा। कुछ गाजियाबाद प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई बसों से मुजफ्फरनगर उतरकर पैदल ही आगे की ओर बढ़ गए। उत्तराखंड की सीमा जिले से 30 किलोमीटर दूर है। इन लोगों का कहना है कि यह तीन चार घंटे में उत्तराखंड की सीमा में पहुंच जाएंगे और वहां के प्रशासन से संपर्क कर अपने घरों को लौटेंगे। दिल्ली की ओर से पैदल आने वाले लोगों खतौली में हिन्दुस्तान टीम ने बात की तो उन्होने बताया कि कोरोना से अधिक परिवार के भूखों मरने की चिंता होने लगी है। भूखे मरने से बेहतर है कि अपने परिवार के साथ गांव में जाकर मरे। लॉकडाउन होने के बाद बंद हुए कामकाज के बाद बेरोजगार होने पर लोगों ने अपने घर जाने का निर्णय लिया। सैकड़ों मील का सफर तय करने के बाद जब घर पहुंच रहे है तो ग्रामीण अधिक परेशान करने की बात भी सामने आई है। ग्रामीणों में इतना भय बना हुआ है कि अपने ही गांव के रहने वाले उन लोगों पर नजर गड़ाए हुए हैं, जो दूसरे राज्य से आए हैं।

प्रशासन, व्यापारी कर रहे भूख से बिलख रहे श्रमिकों की मदद। दूसरे राज्य से आने लोगों की प्रशासन व व्यापारी मदद कर रहे है। भूखों को खाना खिलाने में लगे हुए है। गांव जाने के लिए कोई साधन नहीं होता है तो उनको ट्रक या ट्रैक्टर में बैठाकर भेजा जा रहा है। पैदल चलने वालों के लिए किसान भी काफी मददगार हो रहे है। मिल में गन्ना डालकर घर वापस लौट रहे किसान सडकों पर पैदल चल रहे लोगों को ट्रैक्टर से उनके घर तक पहुंचाने में लगे हुए हैं। रविवार को व्यापारियों ने स्टेशन, सड़क व पैदल चलने वाले सैकडों लोगों को खाना खिलाकर उनकी मदद की।

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  • Web Title:Workers returning to Uttarakhand are seen on the streets of Muzaffarnagar