
सज्जनों की संगति है मोक्ष का द्वार : आचार्य अभिषेक
Muzaffar-nagar News - गांव लुहसाना के सीताराम मन्दिर में आचार्य अभिषेक शुक्ल ने श्रीराम कथा के दूसरे दिन सद्गुणों और परोपकार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट आचरण और नीतिज्ञ व्यक्ति ही समाज में सम्मानित...
गांव लुहसाना के सीताराम मन्दिर में आयोजित श्रीराम कथा के द्वितीय दिवस पर आचार्य अभिषेक शुक्ल ने कहा कि बुद्धिमान व्यक्ति को निरन्तर स्वसंतान को सद्गुणों, सद्व्यवहारों, उत्कृष्ट आचरणों से समन्वित करना चाहिए। क्योंकि शीलसम्पन्न तथा नीतिज्ञ मानव ही सर्वत्र सम्मानित होते हैं। उत्तम चरित्र के मानव का सर्वत्र समादर होता है और परोपकार सर्वोत्तम सद्गुण है। परहित या परोपकार के सन्दर्भ में विचारणीय यह है कि दूसरों के अनैतिक या अनुचित स्वार्थों का साधन बनना अथवा पूर्ति करना परोपकार नहीं कहा जाएगा। वह धर्म न होकर के अधर्म होगा,जैसे परीक्षाकक्ष में परीक्षार्थी के द्वारा अनुकरण (नकल) करना अनुचित है। यदि कोई वहां पर उसे अनुकरण की ओर प्रवृत्त करे या उसके अनुकरण का साधन बने यह परीक्षार्थी का हित या उपकार नहीं है।

अपितु उसका अहित तथा अधर्म है। परोपकारी पुरुष या महिला को दूसरे का धर्मानुकूल हित या उपकार करना चाहिए। किन्तु उसके पापपूर्ण स्वार्थों का साधक नहीं बनना चाहिए और कहा भगवान् श्रीराम विश्वात्मा हैं तथा उनका चरित सभी के लिए कल्याणकारी है। वे किसी एक वर्ण, धर्म, संस्कृति, समाज, वर्ग या संप्रदाय से संबद्ध नहीं है। उनकी भक्ति तथा उनके लोककल्याणकारी चरित से सभी का सर्वविध कल्याण होता है।

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