
मन को प्रभु के ध्यान में लगाना चाहिए : गोस्वामी
संक्षेप: Muzaffar-nagar News - शुकतीर्थ के हनुमत धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के दौरान आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी ने कहा कि निंदा में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। उन्होंने मन के महत्व पर जोर देते हुए अभिमान और आसक्ति को त्यागने की सलाह दी। ईश्वर पर भरोसा रखने की आवश्यकता पर भी उन्होंने प्रकाश डाला।
तीर्थ नगरी शुकतीर्थ स्थित हनुमत धाम में ब्रह्मलीन स्वामी रामधारी महाराज की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के छठे दिन अमृत ज्ञान की वर्षा करते हुए वृंदावन श्री धाम से पधारे विश्व विख्यात कथा व्यास भागवत रत्न आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी महाराज ने किसी की निंदा करने में समय को नष्ट नहीं करना चाहिए बल्कि मन को प्रभु के ध्यान में लगाना चाहिए। ठाकुर जी के चरणों में ही परम शांति और मुक्ति मिलती है। मन के बारे में महाराज ने बताया कि जैसे मछली को जल से निकाल दो तो वह जल के बिना छटपटाने लगती है, वैसे ही मन भी यदि श्री बिहारी जी के चरणों से हट जाये तो उनके लिये भी छटपटाहट होनी चाहिए।

जब वक्ता कथा कहने के लिए और भक्त कथा सुनने के लिए बैठता है तो कथा के दौरान कथा व्यास और श्रोतागण दोनों ही कृष्ण स्वरूप हो जाते हैं। अभिमान की व्याख्या करते हुए महाराज ने कहा कि कभी भी अभिमान अकेला नहीं चल सकता है, उसे चलने के लिये दो वैशाखियों की आवश्यकता होती है। वे वैशाखियां मैं और मेरा होती हैं । यही दो वैशाखियां अभिमान में की जननी होती हैं । इनको छोड़ दें तो अभिमान का अस्तित्व समूल नष्ट हो जाता है। काम, क्रोध, लोभ और मोह ये नरक के रास्ते हैं। इनमें आसक्ति नहीं होनी चाहिए। ईश्वर पर पूर्ण भरोसा होना चाहिए। हम संसारी जीवों जैसे चिकित्सक, बाल काटने वाले आदि पर तो भरोसा करते हैं, परंतु ईश्वर पर सहज भरोसा नहीं करते हैं। ईश्वर पर पूर्ण भरोसा होना चाहिए। कथा में हिताभिलाषणी शर्मा, कुसुम शर्मा, योगेश शर्मा, अशोक चतुर्वेदी, सत्येंद्र शर्मा मौजूद रहे।

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