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2 दिसंबर, 2020|6:06|IST

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योग साधना के बाद विचार गोष्ठी आयोजित

योग साधना के बाद विचार गोष्ठी आयोजित

भारतीय योग संस्थान के तत्वावधान में संचालित नि:शुल्क योग साधना केंद्र पर योग साधना के बाद योग क्या विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता संस्थान के प्रान्तीय कार्यकारिणी सदस्य योगाचार्य सुरेन्द्र पाल सिंह आर्य ने की।

रविवार को जिला प्रधान राजसिंह पुण्डीर ने कहा कि योग का सीधा-सीधा अर्थ जोड़ से है अर्थात आत्मा का परमात्मा से जोड़ । महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र में योग को युज समाधो से परिभाषित किया है। केवल आसन और प्राणायाम करना योग नहीं है। यम,नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि योग के आठ अंग होते हैं। इस दौरान योग शिक्षक यज्ञ दत्त आर्य ने कहा कि आर्य समाज का प्रथम नियम सब सत्य विद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं उन सबका आदि मूल परमेश्वर है। योग हमें अपने स्वरूप का ज्ञान कराता है। योग एक सुखी जीवन जीने की कला है। योग से जीवन में आरोग्यता के साथ साथ अनुशासन, प्रेम, परोपकार सदाचार, निर्भयता, दया, करूणा , सहनशीलता आदि मानवीय गुणों का विकास होता है। इस अवसर पर सत्यवीर सिंह पंवार, राजपाल, वीरसिंह, कुलदीप अरोरा, क्षेत्रीय प्रधान राजीव रघुवंशी, राजकिशोर, अनीता चौधरी, कामेश मलिक व पूजा गर्ग आदि उपस्थित रहे।

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  • Web Title:Seminar organized after yoga practice