
फर्म के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने को एनएसए ने दी तहरीर
Muzaffar-nagar News - पालिका में आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों के ईपीएफ और ईएसआई अंशदान में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। अलर्ट सिक्योरिटास प्रा. लि. ने केवल 69,494 रुपये जमा कराए, लेकिन रसीद में 17,04,357 रुपये दिखाए गए। जांच में पाया गया कि कई महीनों से कोई अंशदान नहीं किया गया। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पालिका में आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों के ईपीएफ और ईएसआई अंशदान का पैसा जमा करने को लेकर सेवा प्रदाता फर्म अलर्ट सिक्योरिटास प्रा. लि. के द्वारा बडा फर्जीवाडा किया गया है। ईओ के आदेश पर नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. अजय प्रताप शाही ने फर्म के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए शहर कोतवाली पुलिस को तहरीर दी है। सिटी कोतवाल ने एसएसपी से स्वीकृति मिलने पर रिपोर्ट दर्ज करने की बात कही है। उधर पालिका प्रशासन ने उक्त फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। पालिका में ठेके पर कार्यरत कर्मचारियों की शिकायत पर ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने मामले की जांच एक स्वतंत्र एजेंसी अजय प्लानर्स एंड कंसलटेंट्स से कराई।
जांच रिपोर्ट 2 जनवरी 2026 को जैसे ही सामने आई, फर्जीवाड़े की पूरी परत खुल गई। जांच एजेंसी अजय प्लानर्स एंड कंसलटेंट्स के प्रोपराइटर लैबर लॉ अधिवक्ता अभय गोयल ने अपनी जांच में पाया कि सेवा प्रदाता फर्म अलर्ट सिक्योरिटास प्रा. लि. ने अक्टूबर 2025 में ईपीएफ विभाग में महज 69,494 रुपये जमा कराए। जिसमें 454 रुपये की विलंब शुल्क भी शामिल था, लेकिन नगर पालिका को दी गई रसीद में तकनीकी छेड़छाड़ कर यह करीब 70 हजार रुपये के अंशदान की जमा राशि 17,04,357 रुपये दर्शाई गई है। स्वतंत्र एजेंसी ने ईपीएफ विभाग से प्राप्त वास्तविक डेटा और बदली गई फर्जी रसीदें पालिका को उपलब्ध कराते हुए पूरे मामले में एक कूटरचित दस्तावेजों और साजिश के आधार पर नगरपालिका प्रशासन से की गई गंभीर धोखाधड़ी की पुष्टि की। ईओ के अनुसार जांच में यह भी पता चला कि मार्च 2025 से नवंबर 2025 तक फर्म ने एक भी अंशदान जमा नहीं कराया, जबकि नगरपालिका को हर माह चालान प्रस्तुत किया जाता रहा। ईपीएफ विभाग द्वारा जारी सी-6 प्रतियों ने फर्म के लंबे समय से चल रहे घोटाले की पोल खोल दी। सफाई कर्मियों की आउटसोर्स सेवा प्रदान करने वाली दूसरी फर्म आरवाई सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेन्स प्रा.लि. ने अक्टूबर 2025 का अंशदान सही जमा किया, लेकिन उसके पुराने महीनों के रिकॉर्ड भी संदिग्ध पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2025 तक ही राशि जमा की गई थी, इसके बाद महीनों तक कोई भुगतान नहीं हुआ। ईओ के अनुसार जांच रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वेतन भुगतान से पूर्व चालान सत्यापन नगर स्वास्थ्य अधिकारी (एनएसए) डॉ. अजय प्रताप शाही के स्तर से होना चाहिए था, परंतु गंभीर लापरवाही के चलते फर्जी चालान बिना जांच के स्वीकार होते रहे। ईओ ने बताया कि इस मामले में विभागीय जांच भी कार्रवाई जा रही है। दोषी अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

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