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16 जनवरी, 2021|3:05|IST

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बालिकाओं के विधिक अधिकार पर साक्षरता शिविर

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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं सिविल जज सलोनी रस्तोगी ने कहा कि भारतीय संविधान में महिलाओं, बालिकाओं को मौलिक अधिकार प्राप्त हैं लेकिन वह अपने अधिकारों को पूरी तरह से नही जान पाती है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से दीवानी न्यायालय परिसर में स्थित केन्द्रीय हाल में बालिकाओं के मौलिक व विधिक अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन में सचिव सलोनी रस्तौगी ने महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों के सम्बन्ध में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान में पुरूषों के समान ही महिलाओं को भी अधिकार प्राप्त है। बालिकाओं के कल्याण व सुरक्षा के सम्बन्ध में अनेक अधिनियम बनाये गये है। जैसे भारतीय दण्ड संहिता की धारा 354, 354ए, 354बी, 354सी, 376, 376ए, 376बी, 376सी, 376डी, 498ए, 304बी, बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006, घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम 2005, यौन हिंसा से बच्चों का संरक्षण अधिनियम 2012 आदि है। परन्तु बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिए आवश्यक है । परिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय, सभी स्तरों पर प्रयास किया जाये। उन्होंने कहा कि बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, आत्म रक्षा, सामाजिक सोच व विचारधारा, बालिकाओं को समय दे जिससे वे भावनात्मक रूप से सशक्त हो तथा अपराध का शिकार न हो सके। उन्होंने महिलाओं के सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा चलायी जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को कानून द्वारा अनेकों अधिकार दिये गये है। लेकिन जागरूकता की कमी है। महिलाओं को जागरूक करने का कार्य जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है। यदि कोई महिला मुकदमें की पैरवी आर्थिक स्थिति के कारण करने में असमर्थ है। तो उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में आवेदन देने पर नि:शुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जायेगा। शिविर में उपस्थित महिलाओं को कोविड-19 कोरोना वायरस के बारे में जानकारी देते हुए जागरूक किया गया। इस दौरान शिविर में मीनाक्षी शर्मा, पूजा शर्मा, अन्तिमा सिंह, बबली, ख्याति शर्मा, राबिया व धन प्रकाश आदि उपस्थित रहें।

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  • Web Title:Literacy camp on legal rights of girls