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12 अगस्त, 2020|12:53|IST

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गुड़ खाकर1600 किलोमीटर के सफर पर साइकिल से निकले मजदूर

गुड़ खाकर1600 किलोमीटर के सफर पर साइकिल से निकले मजदूर

कोरोनावायरस की मार जेल रहे मजदूरों का बुरा हाल है। बिहार के 1 दर्जन से अधिक मजदूर मजदूरी की तलाश में पंजाब पहुंचे थे। तभी देश में लॉक डाउन लागू हो गया। मजदूर डेढ़ माह से पंजाब में फसे पड़े रहे। मजदूरी नहीं मिलने पर मजदूर वापस अपने घरों के लिए लगातार लौट रहे हैं।

बिहार प्रदेश के बेतिया जनपद के 1 दर्जन से अधिक मजदूर अपने घर के लिए पानीपत खटीमा राजमार्ग से होते हुए जा रहे हैं थे। इस दौरान जब इन मजदूरों से बात हुई तो उन्होंने बताया कि 14 मार्च को मजदूरी के लिए पंजाब के मोहाली में गए थे। तभी देश में लॉक डाउन लागू हो गया और सभी मजदूर फस गए। मजदूर सुमित पंडित, कविंदर महतो, कमल पंडित, रामू, किरणपाल, सनोज पंडित आदि ने बताया कि 4 दिन पूर्व थोड़ा सा गुड़ खाकर सभी मजदूर वहीं से पुरानी साइकिल खरीद कर अपने घर बिहार के लिए निकल पड़े थे। उन्होंने बताया कि पिछले 4 दिनों से भूखे पेट ही सफर कर रहे हैं। मजदूरों का आरोप है कि पंजाब सरकार ने उनकी कोई मदद नहीं की। 300 , 400 मजदूर जहां पर भी पड़े थे। उनमें से 2= 4 मजदूरों को चावल मिल जाते थे बाकी सब भूखे पेट ही रहते थे। जो मिल गया उसी को खा कर सो गए। मजदूरों ने बताया कि करीब 1600 किलोमीटर का सफर तय करना है। पता नहीं सही सलामत घर भी पहुंच पाएंगे या नहीं--रोजेदार हाजी अब्दुल सलाम ने मजदूरों को चने व पेठा मिठाई भेंट की फोटो 117जानसठ। पानीपत खटीमा राजमार्ग पर सड़क किनारे खड़े बिहार निवासी मजदूर अपना हाल कुछ लोगों को बता रहे थे और भूख प्यास के बारे में अपनी व्यथा सुना रहे थे।

तभी वहां से गुजर रहे कस्बे के ही हाजी अब्दुल सलाम ने भी यह बात सुन ली और पास में ही स्थित वह अपने घर पहुंचे और एक 1 किलो चने एवं पेठा की मिठाई मजदूरों को लाकर भेंट की तथा एक अन्य व्यक्ति को दवाई भी दिलवाई और पूछा की यदि किसी अन्य सामान की आवश्यकता हो तो वह भी बता दो। भूखे प्यासे मजदूरों को जब चने और पेठे की मिठाई हाजी अब्दुल सलाम ने भेंट की तो उनकी आंखें भर आई। इस दौरान वहीं से गुजर रहे समाजसेवी मास्टर सुभाष उपाध्याय ने उक्त मजदूरों को मास्क वितरित किए।

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  • Web Title:Laborers came out on a cycle after eating jaggery for 1600 km