
सर्वखाप महापंचायत में 36 बिरादरियों का महासंगम,सामाजिक कुरीतियों को दूर करने संदेश
संक्षेप: Muzaffar-nagar News - डेढ़ दशक बाद सोरम गांव में तीन दिवसीय सर्वजातीय सर्वखाप महापंचायत का आयोजन हुआ। इसमें 36 बिरादरियों के प्रतिनिधियों ने कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा और अन्य सामाजिक कुरीतियों पर रोक लगाने का संदेश दिया। महापंचायत में शिक्षा, तकनीक और महिलाओं के आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया गया।
करीब डेढ़ दशक बाद एक बार फिर से ऐतिहासिक गांव सोरम में तीन दिवसीय सर्वजातीय सर्वखाप महापंचायत का शुभारंभ हुआ। महापंचायत में जहां खाप चौधरियों का महासंगम देखने को मिला वहीं पूरे गांव में एक तरह से मेला लगा रहा। सर्वखाप महापंचायत आपसी एकता भाईचारा और सामाजिक चेतना का प्रतीक बन गया। महापंचायत में एक-दो नहीं बल्कि कई प्रदेशों के 36 बिरादरियों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की और अपने-अपने प्रस्ताव व विचारों के माध्यम से कन्या भ्रूण हत्या,दहेज प्रथा, मृत्यु भोज, लिव इन रिलेनशिप व नशाखोरी जैसे तमाम बुराईयों व कुरीतियों पर रोक लगाने का संदेश दिया। शाहपुर क्षेत्र के ऐतिहासिक सोरम गांव में आयोजित तीन दिवसीय महापंचायत में सैकड़ों की संख्या में खाप चौधरियों एवं मुजफ्फरनगर सहित वेस्ट यूपी के कई जिलों के ग्रामीणों ने भाग लिया और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।

परंपरागत पंचायत व्यवस्था की भावना को नए रूप में संजोते हुए वक्ताओं ने समाज में व्याप्त कुरीतियों को खत्म करने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि समाज की तरक्की तभी संभव है जब आपसी विवादों को संवाद और समझ से सुलझाया जाए। दहेज प्रथा, नशे की लत और जातीय भेदभाव जैसी बुराइयों पर रोक लगाने की अपील की गई। महापंचायत वेस्ट यूपी के कई जिलों के अलावा हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली सहित कई प्रदेश के खाप चौधरियों ने की शिरकत की। महापंचायत की अध्यक्षता हरियाणा के चौधरी हुकुम सिंह लाढोत व संचालन श्री शुकदेव आश्रम ट्रस्टी ओमदत्त आर्य देव ने किया। ---------------- शिक्षा, खेती में तकनीक व महिलाओं के आत्मनिर्भर बनाने पर जोर महापंचायत में वक्ताओं ने युवाओं को शिक्षा, किसानों को आधुनिक तकनीक, और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया गया। सभी ने एक मत से समाज में भाईचारा, समानता और सम्मान बनाए रखने का संकल्प लिया। महापंचायत स्थल पर सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था रही और प्रशासन की ओर से विशेष निगरानी रखी गई। ---- तालियों की गूंज से गूंज उठा महापंचायत , उत्साह व सम्मान की भावना से भर गया सोरम गांव में आयोजित ऐतिहासिक सर्वजातीय सर्वखाप महापंचायत में 36 बिरादरियों की विभिन्न खापों के चौधरियों का पारंपरिक रीति से जोरदार स्वागत किया गया। मंच पर पहुंचे खाप चौधरियों को सम्मान स्वरूप पीली पगड़ी पहनाई गई और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया गया। इतना ही नहीं महापंचायत स्थल तालियों की गूंज से गूंज उठा और समूचाा वातावरण उत्साह और सम्मान की भावना से भर गया। बालियान खाप के चौधरी एवं भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने बताया कि खाप चौधरियों ने हमेशा समाज में एकता, न्याय और भाईचारे को मजबूत किया है। इस दौरान कई वक्ताओं ने यह भी कहा कि पगड़ी समाज की मर्यादा और परंपरा की पहचान है, जिसका सम्मान बनाए रखना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। महापंचायत में खाप चौधरियों ने न केवल अपने स्वागत को लेकर आयोजन को सराहा बल्कि नई पीढ़ी को परंपरागत नेतृत्व से जोड़ने का संदेश भी दिया। उधर महापंचायत के मंच पर अधिकांश खाप चौधरी पीली पगड़ी में नजर आए। बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत व भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत, सर्वखाप मंत्री सुभाष बालियान आदि ने जोधपुर राजस्थान से आये नीका पंथ के पीठाधीश्वर आचार्य राम निवास महाराज सहित सभी खाप चौधरियों एवं बाहर से आए अतिथियों का पगड़ी पहनाकर एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड से आए तमाम खाप प्रतिनिधियों का फूलमालाओं से स्वागत किया गया, जिससे सर्वखाप परंपरा के आत्मीय सत्कार का व्यापक प्रदर्शन हुआ।महापंचायत को सफल बनाने में जिला जाट महासभा के जिलाध्यक्ष धर्मवीर बालियान और वरिष्ठ पदाधिकारियों का विशेष योगदान रहा। ------ सोरम में मेहमानवाजी में दिखा अतिथि देवो भव:, जगह-जगह भंडारे ऐतिहासिक गांव सोरम में आयोजित सर्वजातीय सर्वखाप महापंचायत को लेकर मेले जैसी स्थिति रही। गांव की सड़कों पर खूब चहल पहल रही। घरों के बाहर व घेरों में महापंचायत में शामिल होने के लिए आने वाले अतिथियों के सम्मान और मेहमानवाजी के लिए जगह-जगह भंडारे की व्यवस्था रही। खास बात यह है कि भंडारों में सेवा देने के लिए युवाओं और महिला मंडलों ने स्वयंसेवी रूप से जिम्मेदारियां निभाईं, जिससे सामाजिक एकजुटता और सहयोग की भावना सुदृढ़ हुई। सोरम गांव और आसपास के कई गांवों ने सर्वजातीय सर्वखाप महापंचायत के दौरान श्रद्धालुओं और प्रतिनिधियों के लिए भंडारे लगाए, जिनमें तीन दिनों तक निःशुल्क भोजन और जल-पान की सतत व्यवस्था रही। सोरम गांव के अलावा अलावलपुर माजरा, भौराकलां, गोयला, करवाड़ा सहित अनेक गांवों के ग्रामीणों ने अलग-अलग भंडारे लगाए, जिसमें सैकड़ों ने भोजन ग्रहण किया। इसके अलावा स्थानीय समितियों और प्रधानों की निगरानी में भोजन, ठहराव और पार्किंग की व्यवस्थाएं संभाली गईं, ताकि बाहर से आने वाले अतिथियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। --- पारंपरिक व्यंजनों में देसी घी की जलेबी-इमरती खाने को मिली भोजन में पारंपरिक व्यंजनों के साथ सुबह देसी घी की जलेबी-इमरती जैसे प्रसाद की व्यवस्था भी रखी गई, जिससे अतिथियों ने बड़े चाव से भोजन एवं मिष्ठान ग्रहण किया। आयोजकों ने बताया कि भंडारे केवल सत्कार नहीं, बल्कि समाज-सुधार के संदेश के साथ सहभागिता का जीवंत माध्यम बने। ---- ये सभी रहे महांपचायत में मंचासीन व वक्ता ब्राह्मण समाज गठवाला खाप के बाबा सतेंद्र शर्मा,चौधरी गजेंद्र अहलावत, सोनीपत जटवाड़ा से अशोक खत्री, मुरादाबाद से देवेंद्र सिंह जटराणा, राहुल काजला, घणघस खाप चौधरी सुखपाल सिंह, संयुक्त गुर्जर परिसंघ, मेरठ के अध्यक्ष भोपाल सिंह, डॉ दीपक सरन, डॉ विनोद कुमार, राजकुमार, चौधरी योगेंद पंवार, कल्लू पहलवान, झुंझुनू से अजय खिचचड, सुभाष कुंडू , हरियाणा, सतरोल खाप के फूल कुमार पेटवाड , कर्मवीर कालीरमण, पंडित सुभाष भारद्वाज, पंडित ओमकार दत्त भारद्वाज, चौधरी यशपाल सिंह, वीरेंद्र शर्मा ने विचार रखे। इसके अलावा फेडरेशन आफ मुस्लिम जाट एसोसिएशन्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशु चौधरी के नेतृत्व में सैकड़ों लोग पहुंचे।

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