Gur Mandi strike Gur traders strike strike after talks with Additional Director - गुड़ मंडी हड़ताल: अपर निदेशक से वार्ता के बाद गुड़ व्यापारियों की हड़ताल समाप्त DA Image
14 दिसंबर, 2019|5:20|IST

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गुड़ मंडी हड़ताल: अपर निदेशक से वार्ता के बाद गुड़ व्यापारियों की हड़ताल समाप्त

गुड़ मंडी हड़ताल: अपर निदेशक से वार्ता के बाद गुड़ व्यापारियों की हड़ताल समाप्त

देश की सबसे बड़ी मुजफ्फरनगर गुड़ मंडी के साथ ही शामली, शाहपुर व खतौली मंडियों में चली आ रही हड़ताल मंडी परिषद के अपर निदेशक कुमार विनित व उपनिदेशक पुष्पराज के साथ देर सायं हुई व्यापारियों की वार्ता के बाद समाप्त हो गई। उन्होंने सिस्टम में सुधार के लिए एक माह का समय व्यापारियों से मांगा जिस पर व्यापारी हड़ताल खोलने पर सहमत हो गए। इससे पहले अपर निदेशक की गाड़ी को मंडी गेट पर रोककर व्यापारियों ने जमकर नारेंबाजी की जिससे अफरा तफरी का माहौल हो गया।

पिछले तीन दिनों से देश की सबसे बड़ी गुड़ मंडी में गुड़ कारोबार पूरी तरह से ठप रहा। व्यापारियों ने तीसरे दिन भी गुड़ खांडसारी ग्रेन मर्चेन्ट्स एसोसिएशन के बैनर तले मंडी समिति कार्यालय पर धरना दिया। इस दौरान अध्यक्ष संजय मित्तल, मंत्री श्याम सिंह सैनी, पूर्व अध्यक्ष हरिशंकर मूंधडा, फैडरेशन ऑफ गुड ट्रेडर्स के अध्यक्ष अरूण खंडेलवाल, संजय मिश्रा, सुरेंद्र बंसल, अमित जैन, शाहपुर मंडी से चौधरी चंद्रवीर, खतौली मंडी से ज्योति मोहन व सुरेश चंद आदि भी धरने पर रहे। इसी दौरान पता चला कि व्यापारियों से वार्ता के लिए मंडी परिषद के अपर निदेशक कुमार विनित और उपनिदेशक पुष्पराज पहुंच रहे हैं। व्यापारियों ने नवीन मंडी व्यापार संघ के संजय मिश्रा के नेतृत्व में मंडी गेट बंद कर दिया और अपर निदेशक की गाड़ी को मंडी के मुख्य द्वार पर ही रोककर जमकर नारेंबाजी की। इससे मंडी में अफरा तफरी का माहौल हो गया। व्यापारियों के उग्र तेवर देखकर मंडी समिति के कर्मी बैकफुट पर आ गए। काफी अनुनय विनय व अनुरोध पर ही अपर निदेशक व उपनिदेश को मंडी में आने दिया। वह मंडी समिति कार्यालय में पहुंचे और व्यापारियों से वार्ता की। वार्ता में उस समय गर्मागर्मी का माहौल बन गया था जब अपर निदेशक ने गुड़ माफिया पर अंकुश लगाने में असमर्थता जताते हुए कहा कि उनके पास मैन पॉवर नही हैं। 24 इन्सपैक्टर जिले में होने चाहिए जिसमें से केवल तीन हैं। इस पर व्यापारियों ने आरोप कि मंडी समिति के द्वारा अवैध कारोबार के लिए एक टोकन की व्यवस्था की है। 3500 रुपए का टोकन लेकर जो वाहन मंडी शुल्क की चोरी कर गुड़ लादकर निकलता है उसे जाने दिया जाता है। यदि कोई व्यापारी बिना टोकन अपना माल निकाले तो उसे पकड़ लिया जाता है इससे स्पष्ट है कि सचल दस्ता सक्रिय है लेकिन वह जानबूझकर गुड माफियाओं के वाहन नही पकड़ता। व्यापारियों ने मंडी समिति सचिव पर जमकर आरोप लगाए। इसके बाद अपर निदेशक कुमार विनित ने व्यापारियों से सिस्टम में सुधार को एक माह का समय मांगा। विचार विमर्श के बाद व्यापारियों ने सहमति जताते हुए हडताल वापस लेने का निर्णय लिया साथ ही चेतावनी दी कि यदि एक माह में व्यवस्था नही सुधरी को दोबारा आंदोलन किया जाएगा। वार्ता के बाद धरनारत व्यापारियों के सामने हड़ताल को एक माह के लिए फिलहाल स्थगित करने और मंडी परिषद के अधिकारियों को समय देने की घोषणा की गई।

--व्यापारियों के सामने मंडी में धरने पर आ गए कोल्हू संचालक

मुजफ्फरनगर। मंडी शुल्क की चोरी कर सीधे कोल्हुओं से ही गुड़ बेचने का विरोध कर रहे गुड़ व्यापारियों के सामने उस समय विकट स्थिति बन गई जब मंडी समिति कर्मियों के समर्थन में और व्यापारियों के विरोध में गुड का उत्पादन करने वाले कई कोल्हू संचालक भी गुड मंडी पहुंच गए और उन्होंने व्यापारियों पर ही आरोप लगाने शुरू कर दिए। मंडी में अंदर घुसकर धरने पर बैठ गए गुड का उत्पादन करने वाले कोल्हू संचालकों ने उल्टे मंडी में गुड लाने पर व्यापारियों पर ही उत्पीडन व शोषण करने का आरोप लगा दिया। उन्होंने मंडी में तौल में गड़बड़ी, माल खरीदने के बाद उसे हल्का बताकर छोड देने, मंडी में डिजीटल कांटे नही होने, कोल्हू मालिक का गुड बिकने पर मजदूरी कोल्हू मालिक से ही काटने, मुजफ्फरनगर मंडी में आने वाले गुड़ की ग्रेडिंग नही होने के आरोप लगाए। कोल्हू मालिकों ने मंडी सचिव आरके सिंह के नाम एक ज्ञापन भी दिया।

मुजफ्फरनगर। देश की सबसे बड़ी गुड़ मंडी में कारोबार करने वाले व्यापारी जिन्हें गुड़ माफिया बताकर सीधे गुड़ कोल्हू से खरीदकर दूसरे राज्यों में बेचने का आरोप लगाकर तीन दिन से हड़ताल पर थे वही लोग अपने को ग्रामीण लाइसेंसधारी व्यापारी बताकर मंडी में प्रदर्शन करने के लिए पहुंच गए। हडताल कर रहे गुड व्यापारियों ने इन्हें मंडी समिति के सचिव पर आने का आरोप लगाया। इन मंडी के लाइसेंसधारी इन ग्रामीण व्यापारियों ने आरोप लगाया कि उनके पास गुड मंडी में व्यापार करने के लिए न तो दुकान है और न ही गोदाम हैं। उनका कहना था कि मंडी के व्यापारी उनके खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं कि वह सीधे कोल्हुओं से गुड खरीदकर दूसरे राज्यों को भेज रहे हैं। जबकि वह कोल्हुओं से गुड तो खरीदते हैँ लेकिन मंडी शुल्क जमा करके ही बाहर भेजते हैं। उन्होंने मंडी में बैठने के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही आरोप लगाया कि मंडी समिति द्वारा आवंटित अनेक दुकानों पर गुड का कारोबार नही होकर अवैध रूप से किराए पर दिया गया है। ऐसी दुकानों का आवंटन जांच कराकर रद्द किया जाएं और पुन: दुकानों को आवंटित किया जाएं। हडताल कर रहे मंडी के व्यापारियों ने आरोप लगाया कि अवैध कारोबार करने वाले व्यापारी महीने में एक दो रसीद कटाकर नाममात्र का मंडी शुल्क देकर उसी की आड में अवैध कारोबार करते हैं। इसमें मंडी समिति के अधिकारियों की पूरी मिलीभगत होती है।

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