दो एसटीपी प्लांट के बावजूद भी काली नदी का पानी प्रदूषित
Muzaffar-nagar News - शहरी क्षेत्र में दो एसटीपी प्लांट काली नदी के नालों का पानी ट्रीटमेंट कर भेजने के लिए लगे हुए हैं। हालांकि, नदी का पानी प्रदूषित बना हुआ है। अधिकारियों का दावा है कि प्लांट चालू हैं, लेकिन यह सवाल उठता है कि दोनों प्लांट चलने के बावजूद नदी की स्थिति में सुधार क्यों नहीं हो रहा।

शहरी क्षेत्र के नालों का पानी ट्रीटमेंट कर काली नदी में भेजने के लिए दो एसटीपी प्लांट (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगे हुए है, लेकिन फिर भी काली नदी का पानी प्रदूषित बना हुआ है। जिसका सीधा मतलब है कि दोनों एसटीपी प्लांट में नालों के पानी का ट्रीटमेंट नहीं हो रहा है। जबकि अधिकारी दोनों एसटीपी प्लांट के संचालित होने का दावा कर रहे है। ऐसा कैसे हो सकता है कि दोनों एसटीपी प्लांट चल रहे है और फिर भी काली नदी का पानी प्रदूषित बना हुआ है। यह संबंधित अधिकारियों की कार्य शैली पर प्रश्न चिन्ह की तरह है। शहरर के मोहल्ला किदवईनगर में दो एसटीपी प्लांट बने हुए है।
इनमें से एक एसटीपी प्लांट पुराना बना हुआ है। जिसकी करीब 32.5 एमएलडी पानी का ट्रीटमेंट करने की क्षमता है। वहीं दूसरा नमामि गंगे योजना के तहत नए एसटीपी प्लांट बना हुआ है। इस प्लांट के निर्माण को करीब 234 करोड की धनराशि खर्च की गई है। इस प्लांट की क्षमता करीब 32.50 एमएलडी है। इस सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से शहर के कृष्णापुरी, नई बस्ती, सुजडू और खालापार के नाले को जोडा गया है। वहीं पुराने वाले एसटीपी प्लांट से रामलीला टिल्ला, खादरवाला, कृष्णापुरी, पुराना खालापार वाला नाला जुडा है। दोनों एसटीपी का काम उक्त नालों के पानी को ट्रीटमेंट करते हुए काली नदी में भेजना है। ताकि काली नदी प्रदूषित होने से बची रही। दोनों एसटीपी प्लांट पर करोडों रुपए खर्च करने के बाद भी काली नदी को प्रदूषित होने से नहीं बचाया जा रहा है। जबकि अधिकारी दोनों एसटीपी प्लांट के चलने का दावा कर रहे है। जब दोनों एसटीपी प्लांट चल रहे है तो फिर काली नदी का पानी प्रदूषित क्यों बना हुआ है। ------------ कोट पुराने वाला एसटीपी प्लांट लगातार चल रहा है। करीब 32.5 एमएलडी पानी का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। ट्रीटमेंट होने वाले पानी की प्रतिदिन रिपोर्ट शासन को भी भेजी जा रही है। अवनीश कुमार, मैनेजर एसटीपी प्लांट नामामि गंगे योजना के तहत करीब 234 करोड रुपए खर्च करते हुए नए एसटीपी प्लांट को बनाया गया है। इस प्लांट से शहर के चार नालों को जोडा गया है। जिनके पानी को ट्रीटमेंट करते हुए काली नदी में भेजा जा रहा है। प्लांट पूरी तरह से चल रहा है। प्लांट कभी बंद नहीं रहता है। संजीव कटियार, एक्सईएन नमामि गंगे

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